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किसानों को जमीन के बदले मिलेगी जमीन
Wed, 03 Apr 2019 12:22 AM IST
पवन सिंह
mau
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Published by: पवन सिंह
Updated Wed, 03 Apr 2019 12:22 AM IST
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- फोटो : PTI
जिलाधिकारी ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी की पहल रंग लाई। उनके निर्देश पर सदर एसडीएम डा. अंकुर लाठर और तहसीलदार मिथिलेश त्रिपाठी ने मंगलवार को तहसील सभागार में सनेगपुर गांव के प्रधान प्रतिनिधि राजेंद्र प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में आए 50 ग्रामीणों के साथ वार्ता कर जमीन के मामले को सुलझा लिया। सहमति बनने के बाद गांव वालों ने मतदान के बहिष्कार की चेतावनी वापस ले ली। सहमति के अनुसार अब गांव वालों को रास्ता मिलेगा। जिस किसानों की जमीन निकलेगी, उन्हें जमीन दी जाएगी।
मालूम हो कि परदहां ब्लाक के सनेगपुर गांव में फोरलेन पर चढने के लिए ढाले की मांग को लेकर ग्रामीणों ने सामूहिक मतदान के बदले नोटा बटन दबाने का एलान किया था। गांव में आने जाने के लिए ढाले को एनएचआईए द्वारा एक महीने पहले तोड़ दिया गया था। जिससे दस किलोमीटर घूम कर गांव में आना जाना पडता है।
गुस्साए दो सौ से अधिक महिलाओं और पुरुषों ने जनप्रतिनिधियों और प्रसाशन की उदासीनता और राजनीतिक दलों और नेताओं के खिलाफ ‘रास्ता नहीं तो वोट नहीं, वोट फॉर नोटा’ का बैनर के साथ विरोध प्रदर्शन किया था। अमर उजाला द्वारा खबर को प्रमुखता से प्रकाशित करने के बाद प्रशासन के कान खड़े हो गए। इसके बाद भाजपा जिलाध्यक्ष दुर्ग विजय राय के नेतृत्व में सनेगपुर गांव का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी से मिला था।
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मालूम हो कि परदहां ब्लाक के सनेगपुर गांव में फोरलेन पर चढने के लिए ढाले की मांग को लेकर ग्रामीणों ने सामूहिक मतदान के बदले नोटा बटन दबाने का एलान किया था। गांव में आने जाने के लिए ढाले को एनएचआईए द्वारा एक महीने पहले तोड़ दिया गया था। जिससे दस किलोमीटर घूम कर गांव में आना जाना पडता है।
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गुस्साए दो सौ से अधिक महिलाओं और पुरुषों ने जनप्रतिनिधियों और प्रसाशन की उदासीनता और राजनीतिक दलों और नेताओं के खिलाफ ‘रास्ता नहीं तो वोट नहीं, वोट फॉर नोटा’ का बैनर के साथ विरोध प्रदर्शन किया था। अमर उजाला द्वारा खबर को प्रमुखता से प्रकाशित करने के बाद प्रशासन के कान खड़े हो गए। इसके बाद भाजपा जिलाध्यक्ष दुर्ग विजय राय के नेतृत्व में सनेगपुर गांव का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी से मिला था।
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