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बैंक कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने से प्रभावित हुआ 20 करोड़ का कारोबार

Thu, 26 Nov 2020 10:26 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 26 Nov 2020 10:26 PM IST
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Business worth 20 crores affected due to bank employees being on strike
मऊ। केंद्रीय श्रम संघों, अखिल भारतीय कर्मचारी एवं मजदूर फेडरेशनों के हड़ताल के आह्वान पर बृहस्पतिवार को अधिकांश बैंक और एलआईसी के कर्मचारी भी हड़ताल पर रहे। बैंक कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर प्रदर्शन किया। इस दौरान भारतीय स्टेट बैंक और ग्रामीण बैंकों में बैंकिंग कामकाज होता रहा। बैंकों में हड़ताल होने से दूर दराज से आने वाले ग्राहकों को बैरंग लौटना पड़ा। इस दौरान जिले में करीब 20 कारोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ।
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प्रदेश सरकार की तरफ से हड़ताल पर प्रतिबंध लगाने से सरकारी कार्यालयों में हड़ताल का असर नहीं दिखा। सभी सरकारी विभागों में अधिकारी तथा कर्मचारी सरकारी कार्य निपटाते देखे गए। यूपी बैंक इंपलाइज यूनियन के संयुक्त मंत्री बालाजी मोदी के अनुुसार बैकों के बंद रहने से लगभग 20 करोड़ का कारोबार व लेनदेन प्रभावित रहा। केंद्रीय श्रम सघों के हड़ताल पर यूनियन बैंक आफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, सिंडीकेट बैंक, केनरा बैंक, बैंक आफ बड़ौदा, बैंक आफ इंडिया के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। बैंकों की शाखाओं पर प्रदर्शन किया। मजदूर विरोधी, किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ यूपी बैंक इंपलाइज यूनियन के नेतृत्व में राष्ट्रीकृत एवं निजी बैंकों के कर्मचारी पूरे दिन हड़ताल पर रहे। सभी कर्मचारी सामूहिक रुप से बैंक आफ बड़ौदा सहादतपुरा पर एकत्र हुए। जुलूस के शक्ल में कलेक्ट्रेट पहुुंचकर प्रधानमंत्री, श्रम मंत्री, वित्त मंत्री को संबोधित जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर यूनियन के वरिष्ठ नेता रामअवतार सिंह ने कहा कि सरकार गलत नीतियों और बैंकों के निजीकरण की सरकार की मंशा को श्रमिक विरोधी है। दावा किया कि देश भर के कर्मचारी, खेतिहर किसान, बुनकर, मजदूरों हड़ताल में शामिल रहे। बोले बैकों के बंद रहने से लगभग 20 करोड़ का कारोबार व लेनदेन प्रभावित रहा। इस अवसर पर अंकुर श्रीवास्तव, आकाश गुप्ता, कौशल कुमार, केदारनाथ चौहान, कैलाश गुप्ता, अभिषेक व मनोज आदि शामिल रहे।
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एस्मा का डर, प्रदर्शन तो किया लेकिन नहीं गए हड़ताल पर
मऊ। प्रदेश सरकार द्वारा एस्मा लगाने का परिणाम रहा कि राज्य कर्मचारी प्रदर्शन में भाग तो लिए, लेकिन हड़ताल में शामिल नहीं हुए। लेकिन दूसरी तरफ हड़ताल पर न रहने के बाद भी कर्मचारियों ने न के बराबर काम किया। इस तरह से कर्मचारियों ने विरोध भी कर लिया, और हड़ताल से दूरी भी बनाए रहे।
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हड़ताल पर रहे बीमा कर्मी, किया प्रदर्शन:
मऊ। मजदूर संगठनों के आह्वान पर भारतीय जीवन बीमा निगम के कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर हड़ताल पर चले गए। बीमा कर्मचारियों ने कार्यालय के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सार्वजनिक प्रतिष्ठानों का निजीकरण बंद किया जाए। प्रदर्शन करने वालों में बृजेश कुमार, राहुल पांडेय, अनुज श्रीवास्तव, वीपी यादव, विशाल सिंह, रुपा आदि शामिल रहे।
कर्मचारियों, मजदूरों ने किया धरना प्रदर्शन
मऊ। जिला श्रमिक समन्वय समिति के तत्वावधान में एटक, सीटू ,एचएमएस, एक्टू, बैंक, बिजली, बीमा, राज्य कर्मचारी, इंकलाबी मजदूर सहित विभिन्न संगठनों ने जुलूस निकाला। साथ ही नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान पीएम और सीएम के संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा।
वक्ताओं ने कहा कि श्रम सुधार के नाम पर नियत अवधि के नौकरी का कानून वापस लिया जाए। ठेका मजदूरों की हालत सुधारा जाए। योजना कर्मियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। पुरानी पेंशन योजना बहाल किया जाए। प्रवासी मजदूरो की रक्षा के लिए कारगर उपाय कर न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपया घोषित किया जाए। साथ ही निजीकरण बंद करने समेत अन्य मांगे की। श्रमिकों के देशव्यापी आम हड़ताल मे भाग ले रहे संगठनों को वामपंथी दलों के नेताओं ने भी शामिल होकर समर्थन दिया। अंत मे श्रमिक संगठनो की ओर से संयुक्त रूप से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, को संबोधित 10 सूत्रीय ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। धरने को पूर्वांचल महामंत्री सूर्यदेव पांडेय, पूर्व विधायक इम्तेयाज अहमद, रामअवतार सिंह, रामाश्रय यादव, अशोक कुमार, विरेंद्र कुमार, बसंत, रघुनंदन यादव, आंगनबाडी नेत्री किताबुनिशा, बीना राय, प्रमोद कुमार राय व शिवाकांत मिश्रा आदि शामिल रहे।
श्रमिक संगठनों के मजदूरों ने किया कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च
मऊ। देशव्यापी हड़ताल में श्रमिक संगठन ऐक्टू और कताई मिल मजदूरों ने आजमगढ़ तिराहा से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च किया। इस मौके पर मजदूरों ने राष्ट्रपति को संबोधित 11 सूत्री मांग पत्र जिलाधिकारी को सौंपा।

कलेक्ट्रेट पर कताई मिल मजदूर नेता कामरेड श्रीराम सिंह ने कहा कि ईपीएफओ के सीबीटी की सिफारिश और संसद समिति के निर्देश के बाद भी मजदूरों के पेंशन बढ़ोतरी के प्रस्ताव को लागू नहीं किया जा रहा है। मिल मजदूर अपनी पेंशन की मांग को लेकर निर्णायक संघर्ष के रास्ते पर हैं। उन्होंने कहा कि आज भी कताई मिल के मजदूर 1000 रुपयों के पेंशन पर जीवन गुजर बसर करने को मजबूर हैं। कहा कि जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है तब से अपने मित्र पूंजीपतियों के पक्ष में एक-एक करके लगातार फैसले कर रही है और देश के सार्वजनिक क्षेत्र को उनके हवाले करते जा रही है। एक्टू के नेता शिव मूरत गुप्ता ने कहा कि मजदूर विरोधी मोदी सरकार कोरोना महामारी में मजदूरों को गुलाम बनाने वाले श्रम कानून को पास करा दिया है। पहले ही भाजपा की बाजपेई सरकार ने मजदूरों के पेंशन को समाप्त कर दिया था ,रही सही कसर मोदी की सरकार ने कर दिया। इस कानून से सरकार ने मजदूरों को पूजीपतियों का गुलाम बनाने का हथियार दे दिया है। आम हड़ताल को समर्थन के लिए उत्तर प्रदेश किसान सभा के जिला मंत्री कामरेड विरेद्र कुमार, माकपा के नगर सचिव समसुलहक चौधरी, भाकपा (माले) के जिला सचिव बसंत कुमार शामिल रहे।
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