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डीएम के फटकार के बाद दूसरे दिन भी अधिकारी शासनादेश का करते रहे अध्ययन

Mon, 26 Jul 2021 10:45 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 26 Jul 2021 10:45 PM IST
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After the reprimand of the DM, the officers continued to study the mandate for the second day as well.
मऊ। कलेक्ट्रेट सभागार में गत रविवार को डीएम की बैठक में कई अधिकारी शासनादेश का जवाब नहीं दे पाए। शासनादेश का जवाब न दे पाने से जिलाधिकारी भड़क गए। नाराज डीएम ने अधिकारियों को शासनादेश का बोध कराया। इस दौरान घंटों तक अधिकारी पसीने से तर बतर होकर शासनादेश का अध्ययन करते रहे। दूसरे दिन सोमवार को भी शासनादेश का घंटों अध्ययन करने के बाद जमा किया।
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कलेक्ट्रेट सभागार में रविवार को जनपदस्तरीय अधिकारियों की आयोजित बैठक में यूपी विधान परिषद की विशेषाधिकार समिति के कार्य सभापति व भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष विजय बहादुर पाठक शामिल हुए। इस दौरान सभी अफसरों से प्रदेश उपाध्यक्ष जानकारी ले रहे थे। सारे अफसरों के पास शासनादेश की प्रति थी। जिला कृषि अधिकारी के शासनादेश की प्रति नहीं थी। इस बीच सभापति ने जिला कृषि अधिकारी से ही शासनादेश के बारे में पूछा तो वह तर्कसंगत जवाब नहीं दे पाए। इस पर सभापति ने प्रशासनिक अफसरों पर नाराजगी जताई। अपराह्न बाद बैठक समाप्त हो गई और सभापति चले गए।
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अधिकारियों के कार्यप्रणाली से नाराज डीएम अमित कुमार बंसल नेे शासनादेश का अध्ययन करने का फरमान जारी कर दिया। अधिकारी शासनादेश अध्ययन करने में पसीने छूटने लगा। इस दौरान कुछ अफसर तो शासनादेश उतार लिए थे और इसकी कापी जमा कर दिए। तमाम अफसर शासनादेश उतार ही नहीं पाए। सभी को डीएम ने शासनादेश उतारने के बाद याद कर जमा करने के लिए कहा।
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दूसरे दिन सोमवार को तमाम अफसर कलेक्ट्रेट में बैठकर शासनादेश का अध्ययन करते रहे। इसके बाद फिर जमा किए। कलेक्ट्रेट में दिनभर यह चर्चा गूंजती रही लेकिन कोई भी अफसर कुछ बोलने को तैयार नहीं था। इस बाबत जिलाधिकारी अमित सिंह बंसल का कहना था कि बैठक के दौरान कई जिलास्तरीय अधिकरियों को शासनादेश की जानकारी नहीं थी। इसलिए अधिकारियों को शासनादेश का बोध कराया गया।
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