{"_id":"5c55d5febdec227386331869","slug":"111549129214-mau-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्लास्टर चढ़ाने तक सीमित रह गया हड्डी रोग विभाग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्लास्टर चढ़ाने तक सीमित रह गया हड्डी रोग विभाग
विज्ञापन
मऊ। जनपद मुख्यालय पर जिला चिकित्सालय के हड्डी रोग विभाग में ऑपरेशन की सुविधा नहीं है, जिसके चलते हर माह लगभग पचास मरीजों को निजी अस्पताल में ऑपरेशन कराने को मजबूर होना पड़ता है। जिला चिकित्सालय के हड्डी रोग विभाग में हड्डी रोग विशेषज्ञों का कार्य महज प्लास्टर चढ़ाने तक ही सीमित होकर रह गया है, जबकि चिकित्सालय के दो चिकित्सक मेजर ऑपरेशन के लिए आर्थोपैडिक सर्जन के रूप में तैनात हैं। बताया यह जाता है कि सी आर्म्स मशीन को चलाने वाले आपरेटर नहीं हैं।
उल्लेखनीय है कि जिला अस्पताल में हड्डी रोग विभाग काफी अहम है। इसमें शासन ने तीन डाक्टर तैनात किए हैं। जिसमें दो डाक्टर विशेषज्ञ हैं और एक डाक्टर संविदा पर तैनात हैं। इसी तरह नेत्र विभाग में तीन डाक्टरों को रखा गया है। यही नहीं इसके लिए अलग से ऑपरेशन थियेटर भी है, बावजूद पिछले कई महीने से आपरेशन नहीं हो रहे है। दरअसल, इस मामले में जानकारों का कहना है कि यदि किसी मरीज को ऑपरेशन थियेटर में प्लास्टर चढ़ाने के दौरान बेहोश किया जाता है अथवा उसके किसी अंग को काटना पड़ता है तो उसे मेजर ऑपरेशन की श्रेणी में ही रखा जाता है। जनपद में प्रत्येक माह लगभग 50 लोग दुर्घटनाओं में घायल होकर उपचार की उम्मीद से जिला अस्पताल आते हैं, लेकिन ऑपरेशन की स्थिति न होने पर चिकित्सक उन्हें रेफर कर देते हैं। इन हालातों में मरीजों को शारीरिक वेदना के साथ आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है।
इनसेट
मशीन के आपरेटर न होने से दिक्कत
मऊ। सीएमएस डॉ. बृजकुमार ने बताया कि जिला अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर में सी आर्म्स मशीन है। लेकिन इस मशीन को आपरेट करना वाला ट्रेंड आपरेटर नहीं है। इसके चलते मेजर आपरेशन नहीं हो पा रहा है। इसके नियुक्ति को लेकर शासन को पत्र लिखा जा चुका है। इस मशीन की स्क्रीन पर ऑपरेशन के दौरान हड्डी को जोड़ने के लिए लगाए जाने वाले पिन से लेकर रॉड तक को आसानी से देखा जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
उल्लेखनीय है कि जिला अस्पताल में हड्डी रोग विभाग काफी अहम है। इसमें शासन ने तीन डाक्टर तैनात किए हैं। जिसमें दो डाक्टर विशेषज्ञ हैं और एक डाक्टर संविदा पर तैनात हैं। इसी तरह नेत्र विभाग में तीन डाक्टरों को रखा गया है। यही नहीं इसके लिए अलग से ऑपरेशन थियेटर भी है, बावजूद पिछले कई महीने से आपरेशन नहीं हो रहे है। दरअसल, इस मामले में जानकारों का कहना है कि यदि किसी मरीज को ऑपरेशन थियेटर में प्लास्टर चढ़ाने के दौरान बेहोश किया जाता है अथवा उसके किसी अंग को काटना पड़ता है तो उसे मेजर ऑपरेशन की श्रेणी में ही रखा जाता है। जनपद में प्रत्येक माह लगभग 50 लोग दुर्घटनाओं में घायल होकर उपचार की उम्मीद से जिला अस्पताल आते हैं, लेकिन ऑपरेशन की स्थिति न होने पर चिकित्सक उन्हें रेफर कर देते हैं। इन हालातों में मरीजों को शारीरिक वेदना के साथ आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है।
विज्ञापन
इनसेट
मशीन के आपरेटर न होने से दिक्कत
मऊ। सीएमएस डॉ. बृजकुमार ने बताया कि जिला अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर में सी आर्म्स मशीन है। लेकिन इस मशीन को आपरेट करना वाला ट्रेंड आपरेटर नहीं है। इसके चलते मेजर आपरेशन नहीं हो पा रहा है। इसके नियुक्ति को लेकर शासन को पत्र लिखा जा चुका है। इस मशीन की स्क्रीन पर ऑपरेशन के दौरान हड्डी को जोड़ने के लिए लगाए जाने वाले पिन से लेकर रॉड तक को आसानी से देखा जा सकता है।
विज्ञापन