फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mathura News ›   What kind of peacock conservation center is this, where there is not a single peacock

Mathura News: यह कैसा मयूर संरक्षण केंद्र, जहां एक भी मोर नहीं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 07 Apr 2023 12:39 AM IST
विज्ञापन
What kind of peacock conservation center is this, where there is not a single peacock
वृंदावन। राष्ट्रीय पक्षी मोर के संरक्षण के लिए वन विभाग ने एक अच्छी खासी रकम मयूर संरक्षण केंद्र पर खर्च तो कर दी, लेकिन यहां आपको एक भी मोर दिखाई नहीं देगा। रखरखाव के अभाव में मयूर संरक्षण केंद्र खराब होता जा रहा है। केंद्र में कटीली झाड़ियां तक उग आई हैं। मीठे पानी की समस्या के कारण यहां लगाए गए पौधों को सींचने में भी मशक्कत करनी पड़ रही है।
विज्ञापन

आध्यात्मिक महत्व के साथ ही राष्ट्रीय पक्षी मोर के संरक्षण के लिए मथुरा-वृंदावन रोड पर वन चेतना केंद्र को मयूर संरक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए शासन ने दो हेक्टेयर में वन विभाग को 2016-17 और 2019-20 में बजट स्वीकृत किया। कार्यदायी संस्था आवास विकास के माध्यम से यहां 93.68 लाख रुपये मयूर संरक्षण केंद्र के निर्माण पर खर्च भी हो गए। करीब 25 लाख रुपये से सोलर पैनल लाइट सिस्टम लगवाए गए और दस फुट ऊंची दीवार भी बनाई गई, लेकिन मोरों के अभाव में ये मयूर संरक्षण केंद्र सफेद हाथी साबित हो रहा है।
विज्ञापन


धार्मिक दृष्टि से ब्रज में है मोरों का महत्व
मोर केवल राष्ट्रीय पक्षी नहीं बल्कि सनातन धर्म में भी विशेष महत्व रखता है। भगवान श्रीकृष्ण को भी मोर सबसे प्यारा था। वह मोर पंख अपने मुकुट पर लगाते थे। यही वजह है कि आज भी ब्रज में मोर को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पक्षी माना जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन



घायल मोर के उपचार की थी योजना
मयूर संरक्षण केंद्र के निर्माण का मुख्य उद्देश्य बंदरों के साथ बिजली के तारों में उलझकर घायल होने वाले मोर का उपचार करना था। इसके साथ प्रजनन को बढ़ाया जाना भी उद्देश्य रहा लेकिन ऐसा यहां कुछ नहीं है।


मोरों के संरक्षण के लिए डिस्पेंसरी बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था, लेकिन यह प्रस्ताव वापस आ गया। इस मयूर संरक्षण केंद्र में रेस्क्यू सेंटर बनाने की योजना है। इसके लिए एक रेस्क्यू व्हीकल, वेटरनेरी स्टाफ की मांग की है।
9 ब्रजेश परमार, डिप्टी रेंजर वन विभाग
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed