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‘समरसता का अभाव हिंदुओं के लिए घातक’
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Sat, 27 Feb 2016 08:18 PM IST
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परिक्रमा मार्ग स्थित कृष्ण कृपा धाम में शनिवार को विश्व हिंदू परिषद की ओर से अखिल भारतीय सामाजिक समरसता मिशन अभियान सम्मेलन का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने आज के दौर में सामाजिक समरसता की महती आवश्यकता जताई।
उद्घाटन विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. प्रवीण तोगड़िया और गीता मनीषी महामंडलेश्वर ज्ञानानंद महाराज ने राधाकृष्ण के चित्रपट पर माल्यार्पण कर किया। प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि आज समाज में समरसता का अभाव देखा जा रहा है। यह हिंदुओं के लिए घातक है।
आज जरूरत है आपसी समरसता की। लोगों को जाति-पंथ से परे होकर एक-दूसरे के दुख-सुख में काम आने की भावना रखनी होगी। तभी सामाजिक समरसता भारत में देखने को मिल सकती है।
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महामंडलेश्वर ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि देश के स्वतंत्र होने के बाद हिंदुओं को जाति में बांट दिया गया, यह दुभाग्यपूर्ण है। चंद राजनीतिक लोगों ने हिंदुओं की वर्ण व्यवस्था को तहस-नहस करने की कोशिश की है।
समाज में प्रत्येक जाति को मानवता के आधार पर अपनी मौलिकता के भाव को स्मरण रखना चाहिए। इस अवसर पर विहिप के महावीरजी, बच्चू सिंह, वासुदेव, विनोदजी, विजय बहादुर आदि लोग उपस्थित रहे।
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उद्घाटन विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. प्रवीण तोगड़िया और गीता मनीषी महामंडलेश्वर ज्ञानानंद महाराज ने राधाकृष्ण के चित्रपट पर माल्यार्पण कर किया। प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि आज समाज में समरसता का अभाव देखा जा रहा है। यह हिंदुओं के लिए घातक है।
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आज जरूरत है आपसी समरसता की। लोगों को जाति-पंथ से परे होकर एक-दूसरे के दुख-सुख में काम आने की भावना रखनी होगी। तभी सामाजिक समरसता भारत में देखने को मिल सकती है।
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महामंडलेश्वर ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि देश के स्वतंत्र होने के बाद हिंदुओं को जाति में बांट दिया गया, यह दुभाग्यपूर्ण है। चंद राजनीतिक लोगों ने हिंदुओं की वर्ण व्यवस्था को तहस-नहस करने की कोशिश की है।
समाज में प्रत्येक जाति को मानवता के आधार पर अपनी मौलिकता के भाव को स्मरण रखना चाहिए। इस अवसर पर विहिप के महावीरजी, बच्चू सिंह, वासुदेव, विनोदजी, विजय बहादुर आदि लोग उपस्थित रहे।