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निर्माणाधीन टावर गिरा, तीन मजदूर की मौत
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Fri, 12 Dec 2014 12:37 AM IST
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नौहझील पुलिस ने गुरुवार शाम तीनों मजदूरों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए हैं। इसके अलावा गोविंद कुमार महतो निवासी दुदलू जनपद गिरड़ी झारखंड, सुधाकर ठाकुर निवासी खगड़िया बिहार को गंभीर अवस्था में अलीगढ़ के मलखान सिंह अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मजदूरों ने बताया टावर की कार्यदायी संस्था केपीटीएल प्राइवेट लिमिटेड गांधी नगर गुजरात है।
जेसीबी ने बचाए 12 मजदूर
टावर निर्माण में एक जेसीबी कार्यकर रही थी। दुर्घटना के समय टावर का एक हिस्सा जेसीबी पर गिरा। जेसीबी खेत में काफी नीचे धंस गई और टावर का आधा हिस्सा नीचे नहीं गिर पाया। जिससे लगभग 12 मजदूर टावर की चपेट में आने से बच गए। इधर अन्य मजदूरों को कंपनी प्रशासन अंधेरे में रखे है। किसी भी मजदूर को ज्ञात नहीं कि उनके घायल साथियों का इलाज कहां पर चल रहा है।
भारी वजन नहीं झेल पाया टावर
जानकारों के अनुसार पावर ग्रिड लाइन के लिए ए, बी, सी, डी और ई टाइप टावर होते है। भारी वजन के लिए ई टावर का उपयोग किया गया था। निर्माणाधीन टावर के कोंण का ठीक तरह से उपयोग नहीं किया गया। ब्रेड स्टिक मजबूत नहीं थी। टावर पर साढ़े छह कुंतल वजन के 28 रोल लगाए जाते हैं। एक किलोमीटर लंबी लाइन का वजन हर समय रहता है।
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जेसीबी ने बचाए 12 मजदूर
टावर निर्माण में एक जेसीबी कार्यकर रही थी। दुर्घटना के समय टावर का एक हिस्सा जेसीबी पर गिरा। जेसीबी खेत में काफी नीचे धंस गई और टावर का आधा हिस्सा नीचे नहीं गिर पाया। जिससे लगभग 12 मजदूर टावर की चपेट में आने से बच गए। इधर अन्य मजदूरों को कंपनी प्रशासन अंधेरे में रखे है। किसी भी मजदूर को ज्ञात नहीं कि उनके घायल साथियों का इलाज कहां पर चल रहा है।
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भारी वजन नहीं झेल पाया टावर
जानकारों के अनुसार पावर ग्रिड लाइन के लिए ए, बी, सी, डी और ई टाइप टावर होते है। भारी वजन के लिए ई टावर का उपयोग किया गया था। निर्माणाधीन टावर के कोंण का ठीक तरह से उपयोग नहीं किया गया। ब्रेड स्टिक मजबूत नहीं थी। टावर पर साढ़े छह कुंतल वजन के 28 रोल लगाए जाते हैं। एक किलोमीटर लंबी लाइन का वजन हर समय रहता है।
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