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Mathura News: विद्यालयों में मुख्य विषयों के शिक्षक ही नहीं, कैसे पूरे हों सपने

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 20 Apr 2025 12:48 AM IST
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There are no teachers for core subjects in schools, how can dreams be fulfilled
मथुरा। माध्यमिक विद्यालयों में नया सत्र शुरू हुए 19 दिन हो गए। विद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है। स्कूलों में शिक्षकों की संख्या कम होने के कारण विद्यार्थी व अभिभावक रुचि नहीं दिखा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि नए सत्र में सालभर अब कैसे पढ़ाई होगी। वहीं, छात्र-छात्राओं का डाॅक्टर, इंजीनियर व प्रशासनिक सेवाओं में जाने का सपना कैसे साकार होगा।
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जिले में 550 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इसमें 36 राजकीय, 93 एडेड और 421 वित्तविहीन स्कूल हैं। अशासकीय सहायता प्राप्त एवं राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में स्वीकृत पद के सापेक्ष शिक्षक-शिक्षिकाओं की संख्या पहले से ही कम है। पिछले माह 11 शिक्षक सेवानिवृत्त होने के कारण संख्या और गिर गई। राजकीय इंटर कॉलेज वीडीपी मथुरा की बात करें तो बीती 31 मार्च को जीव विज्ञान, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के तीन शिक्षक सेवानिवृत्त हुए हैं। जबकि विभिन्न एडेड विद्यालयों के दो प्रधानाचार्य, चार प्रवक्ता और पांच सहायक अध्यापक सेवानिवृत्त हुए हैं। वहीं, राजकीय विद्यालयों में भी करीब 13 शिक्षक सेवानिवृत्त हो गए हैं।
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मुख्य विषय पढ़ाने वाले भी शिक्षक नहीं

जिले के विद्यालयों में नई नियुक्ति न होने एवं लगातार शिक्षक-शिक्षिकाओं के सेवानिवृत्त होने से अब नए सत्र में शिक्षण कार्य भी प्रभावित होगा। क्योंकि, कई विद्यालयों में मुख्य विषयों के शिक्षक ही नहीं बचे हैं। इनमें अंग्रेजी, गणित व विज्ञान समेत अन्य विषय शामिल हैं। राजकीय इंटर काॅलेज वीडीपी मथुरा के प्रधानाचार्य सत्यदेव के अनुसार कॉलेज में गणित, भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र और हिंदी के प्रवक्ता नहीं है। इसके अलावा विज्ञान, हिंदी, चित्रकला, व्यायाम शिक्षक और सामाजिक विज्ञान के सहायक अध्यापक नहीं हैं। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज फरह की प्रधानाचार्या नम्रता बरौलिया ने बताया कि स्कूल में अंग्रेजी, भौतिक विज्ञान, रसायनिक विज्ञान और अर्थशास्त्र की प्रवक्ता नहीं हैं। साथ ही चित्रकला और कंप्यूटर की सहायक अध्यापक भी नहीं हैं।
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वर्जन

माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य, प्रवक्ता, सहायक अध्यापक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को डिमांड भेजी है। स्थानीय स्तर से नियुक्ति का प्रावधान नहीं है।

रविंद्र सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक
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