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Mathura News: विश्व को आकर्षित करती हैं मथुरा संग्रहालय की मूर्तियां

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 18 May 2026 12:29 AM IST
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The Sculptures of the Mathura Museum Captivate the World
04 राजकीय संग्रहालय में प्राचीन मूर्तियों के संग्रह को को देखते लोग।
मथुरा। राजकीय संग्रहालय कुषाण, गुप्त और मौर्य काल की बेजोड़ कला का भंडार है। इस संग्रहालय को महात्मा बुद्ध की प्रथम प्रतिमा रखने का गौरव भी हासिल है। यहां कई मूर्तियां समूचे विश्व का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती हैं। विभिन्न धर्मों से संबंधित हजारों मूर्ति यहां बनाई गई, जो उस समय के पहनावे के साथ ही शस्त्र, अस्त्र आदि का परिचय देती हैं।
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मूर्तिकला को अपने आंचल में समेटे संग्रहालय बौद्ध मूर्तियों के लिए विश्व में प्रसिद्ध है। यहां बौद्ध, शैव, जैनियों के पूजा स्थल होने के भी यहां प्रमाण हैं। इसलिए इसकी गणना सप्तपुरियों में की जाती है। नंद, मौर्य, शुंग, क्षत्रप, कुषाण वंश के शासन काल यहां होने के साक्ष्य इसी संग्रहालय में हैं। विभिन्न धर्मों से संबंधित हजारों मूर्ति यहां बनाई गई। ये कार्य 12वीं सदी तक जारी रहा। कुषाण काल और गुप्तकालीन की कलाकृतियां की संग्रहालय में अधिक संख्या है। शुंगकालीन, मातृदेवी, कामदेव, फलक, गुप्तकालीन नारी, विदूषक, कार्तिकेय, सांचे, सिक्के में अंकित बलराम, आहत मुद्राओं के सांचे गोविंद नगर टीले से खोदाई में मिले। कुषाणकालीन सिक्के, धातु की मूर्तियाें में कार्तिकेय, देव युगल प्रतिमा, नाग की मूर्तियां, मंदिरों की पिछवाईयां, सांझी चित्र सौंख टीला से प्राप्त हुए हैं। मूर्तियों का सर्वाधिक संकलन सौंख स्थित टीला से किया गया। यहां से 12 हजार मूर्तियां प्राप्त हुईं। ये बुद्ध, महावीर, मौर्यकाल, शुंगकाल, शक क्षत्रप, उत्तर शुंगवंश, कुषाण काल, गुप्तकाल, पूर्व मध्य काल और उत्तर मध्यकाल की हैं।
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इंगलैंड के संग्रहालय में सजी हैं यहां की मूर्तियां
मथुरा कला की बेजोड़ मूर्तियां इंगलैंड के संग्रहालय में सजी हैं। अंग्रेेज शासन में इस कला की बेशकीमती मूर्तियों को अंग्रेज अपने साथ ले गए थे। इन मूर्तियों के लिए इंगलैंड के संग्रहालय में अलग गैलरी सजाई गई है।
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मथुरा की कला की विशेषताएं

-लाल चित्तीदार पत्थर का प्रयोग, मध्यदेशीय कला का अनुसरण एवं विकास, प्राचीन यक्ष शैली का अन्य देवी-देवताओं में समन्वय, प्रतीकों का मानवाकृतियों में रूपांतरण, विदेशी तत्वों का सामंजस्य, नूतन कला विधाओं का विकास, राजपुरुषों की मूर्तियों का निर्माण, स्त्री आकृति के अंकन में लावण्य और आकर्षण आदि विशेषताएं हैं।

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अब इटली में लगाई जाएगी प्रदर्शनी
राजकीय संग्रहालय के उप निदेशक डाॅ. योगेश यादव ने बताया कि संग्रहालय में हर दिन सैकड़ों दर्शक आते हैं। इसके अलावा देश के साथ विदेशों में भी यहां की मूर्तियों की प्रदर्शन लगाई जाती है। आने वाले समय में इटली में यहां की मूर्तियां प्रदर्शनी के लिए जाएंगी।
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