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ग्रहण में चंद्र के पीछे छुपे सूर्य देव, लोगों ने बादलों के बीच निहारी अद्भुत छटा
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दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर खींचा गया सूर्यग्रहण का चित्र।
- फोटो : VRINDAVAN
मथुरा। वर्ष के सबसे पहले और सबसे बड़े सूर्यग्रहण पर धर्म और आस्था की भूमि धार्मिक भावनाओं में सराबोर हो गई। सूर्यग्रहण शुरू होने से पहले ही हवन-कीर्तन का दौर शुरू हो गया। लोगों ने घरों में ही रहकर ठाकुरजी की आराधना की। शहर में कर्फ्यू जैसे हालात हो गए। इक्का-दुक्का वाहनों को छोड़ सड़कों पर पूरी तरह से वीरानगी छा गई। मंदिरों के पट बंद रहे।
रविवार को वर्ष का पहला सूर्यग्रहण दुर्लभ संयोग के साथ करीब 10 बजकर 20 मिनट पर शुरू होकर दोपहर 1 बजकर 58 मिनट पर मथुरा में देखा गया। सूर्यग्रहण तीन घंटा 39 मिनट तक रहा। सूर्यग्रहण के दौरान एक बार स्थिति ऐसी बनी, जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच में पूरी तरह आ गया। अद्भुत खगोलीय नजारे दिखाता सूर्य एक बार लगभग छल्ला जैसी आकृति में दिखा। इस दौरान पृथ्वी पर सूर्य की छवि पूरी तरह से अस्पष्ट हो गई। इसे निहारने के लिए लोगों ने विभिन्न साधन उपयोग किए।
इधर, सूर्यग्रहण को लेकर हिंदू मान्यताओं के अनुसार तमाम अधिकांश लोग अपने
घरों में अपने इष्ट देव की आराधना में लगे रहे। कई जगह भक्तों ने हवन यज्ञ भी किए। ग्रहण काल समाप्त होने के बाद सैकड़ों लोगों ने यमुना में भी स्नान किया। मंदिर का शुद्धिकरण किया गया। इसके बाद मंदिरों में घंटी घड़ियाल बजने लगे और मंदिरों में आरती शुरू हुईं। शहर के प्रमुख श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर शाम 4:30 बजे मंदिर के पट भक्तों के लिए खोले गए। भक्त भी ठाकुरजी के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। इधर, प्राचीन केशवदेव, मां चामुंडा, बिरला मंदिर, बागलामुखी सहित अधिकांश मंदिर शाम को भक्तों के लिए खुले। लोग दर्शन करने भी पहुंचे।
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ग्रहण काल में राजाधिराज ने भक्तों को दिए दर्शन
मथुरा। रविवार को सूर्यग्रहण के समय द्वारिकाधीश मंदिर भक्तों के लिए खुला रहा। सुबह राजभोग के समय काल में 10 से 11 बजे तक राजाधिराज ने भक्तों को दर्शन दिए। भक्त भी अपने आराध्य के दर्शन पाकर कृतार्थ हुए। लेकिन भक्तों को शयन भोग के दर्शन नहीं हुए।
मंदिर के विधि एवं मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी एडवोकेट ने बताया कि मंदिर के गोस्वामी बृजेश कुमार महाराज व डॉ. वागीश कुमार महाराज के निर्देशानुसार मंदिर के पट खुले। उन्होंने बताया कि पुष्टिमार्ग में सभी भक्त भगवान के दर्शन कर भजन-कीर्तन करते हैं। जिससे ग्रहण में राक्षस और देवताओं के बीच हो रहे युद्ध में भगवान की विजय हो। इसी कामना के साथ सभी भक्त भगवान के दर्शन और भजन कीर्तन करते हैं। सरकार की गाइडलाइन के अनुसार सभी नियमों का पालन करते हुए यह दर्शन खोले गए।
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रविवार को वर्ष का पहला सूर्यग्रहण दुर्लभ संयोग के साथ करीब 10 बजकर 20 मिनट पर शुरू होकर दोपहर 1 बजकर 58 मिनट पर मथुरा में देखा गया। सूर्यग्रहण तीन घंटा 39 मिनट तक रहा। सूर्यग्रहण के दौरान एक बार स्थिति ऐसी बनी, जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच में पूरी तरह आ गया। अद्भुत खगोलीय नजारे दिखाता सूर्य एक बार लगभग छल्ला जैसी आकृति में दिखा। इस दौरान पृथ्वी पर सूर्य की छवि पूरी तरह से अस्पष्ट हो गई। इसे निहारने के लिए लोगों ने विभिन्न साधन उपयोग किए।
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इधर, सूर्यग्रहण को लेकर हिंदू मान्यताओं के अनुसार तमाम अधिकांश लोग अपने
घरों में अपने इष्ट देव की आराधना में लगे रहे। कई जगह भक्तों ने हवन यज्ञ भी किए। ग्रहण काल समाप्त होने के बाद सैकड़ों लोगों ने यमुना में भी स्नान किया। मंदिर का शुद्धिकरण किया गया। इसके बाद मंदिरों में घंटी घड़ियाल बजने लगे और मंदिरों में आरती शुरू हुईं। शहर के प्रमुख श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर शाम 4:30 बजे मंदिर के पट भक्तों के लिए खोले गए। भक्त भी ठाकुरजी के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। इधर, प्राचीन केशवदेव, मां चामुंडा, बिरला मंदिर, बागलामुखी सहित अधिकांश मंदिर शाम को भक्तों के लिए खुले। लोग दर्शन करने भी पहुंचे।
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ग्रहण काल में राजाधिराज ने भक्तों को दिए दर्शन
मथुरा। रविवार को सूर्यग्रहण के समय द्वारिकाधीश मंदिर भक्तों के लिए खुला रहा। सुबह राजभोग के समय काल में 10 से 11 बजे तक राजाधिराज ने भक्तों को दर्शन दिए। भक्त भी अपने आराध्य के दर्शन पाकर कृतार्थ हुए। लेकिन भक्तों को शयन भोग के दर्शन नहीं हुए।
मंदिर के विधि एवं मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी एडवोकेट ने बताया कि मंदिर के गोस्वामी बृजेश कुमार महाराज व डॉ. वागीश कुमार महाराज के निर्देशानुसार मंदिर के पट खुले। उन्होंने बताया कि पुष्टिमार्ग में सभी भक्त भगवान के दर्शन कर भजन-कीर्तन करते हैं। जिससे ग्रहण में राक्षस और देवताओं के बीच हो रहे युद्ध में भगवान की विजय हो। इसी कामना के साथ सभी भक्त भगवान के दर्शन और भजन कीर्तन करते हैं। सरकार की गाइडलाइन के अनुसार सभी नियमों का पालन करते हुए यह दर्शन खोले गए।