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UP News: नंदगांव के 'विनोद' ने तराशी है सुप्रीम कोर्ट में लगी न्याय की देवी की मूर्ति, जानें पूरी कहानी

Thu, 17 Oct 2024 06:05 PM IST
भूपेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Thu, 17 Oct 2024 06:05 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट में लगी न्याय की देवी की मूर्ति  नंदगांव के 'विनोद' और उनकी टीम ने तराशी है। आगे पढ़ें और जानें इस मूर्ति के बारे में पूरी कहानी...

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statue of Goddess of Justice in Supreme Court has been carved by 'Vinod' of Nandgaon at Mathura
सीजेआई के साथ सफेद कुर्ता और टोपी पहनें विनोद गोस्वामी - फोटो : संवाद

विस्तार

हाल ही में देश के सर्वोच्च न्यायालय में ऐतिहासिक बदलाव किया गया है। यहां लगी न्याय की देवी की मूर्ति सीजेआई के आदेश पर बदली गई है। अब एक नई मूर्ति स्थापित की गई है। पहले की और नई मूर्ति में यह अंतर है कि पहले की मूर्ति में आंखों पर काली पट्टी बंधी थी, अब जो मूर्ति स्थापित की गई है, उसकी आंखों में काली पट्टी नहीं बंधी है। साथ ही उनके हाथ में तलवार की जगह भारतीय संविधान की पुस्तक पकड़ाई गई है।

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सुप्रीम कोर्ट में स्थापित नई मूर्ति को प्रोफेसर विनोद गोस्वामी और उनकी टीम ने तराशा है। प्रो. विनोद मथुरा जिले के नंदगांव के रहने वाले हैं। यह मूर्ति उन्होंने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ के निर्देश पर तराशी है। मूर्ति में न्याय की देवी को साड़ी पहनाई गई है। उनकी आंखों से काली पट्टी भी हटा दी गई है।

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साथ ही उनके हाथ में तलवार की जगह भारतीय संविधान की पुस्तक पकड़ाई गई है। विनोद गोस्वामी और उनकी टीम ने इसे अप्रैल 2023 में तैयार कर लिया था। यह मूर्ति फाइबर ग्लास युक्त है। इसका वजन करीब 100 किग्रा है। देखने में यह सफेद संगमरमर से बनी मूर्ति प्रतीत होती है। 

नंदगांव के रहने वाले प्रो. विनोद गोस्वामी वर्तमान में नई दिल्ली के कॉलेज ऑफ आर्ट में कार्यरत हैं। इनके कार्यों का संग्रह दिल्ली मेट्रो, हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड, हिंदुस्तान शिव पार्क लिमिटेड, गोवर्धन बस स्टैंड आदि स्थलों में देखा जा सकता है। लगभग 30 वर्ष के लंबे अंतराल में इनको कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं।  

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फोन पर हुई बातचीत में विनोद ने बताया कि इस ऐतिहासिक प्रतिमा को बनाने के लिए लगभग छह माह में कई रेखांकन किए गए। इसके बाद जो मूर्ति स्थापित की गई है, इसे फाइनल किया गया। बताया इस मूर्ति को बनाने की प्रेरणा उन्हें शनिदेव की मां 'छाया' से मिली थी। क्योंकि, शनिदेव न्याय के देवता हैं। उनकी मां छाया उनकी गुरु रही हैं। बताया कि इस ऐतिहासिक कार्य को करना वह अपना सौभाग्य मानते हैं। उन्होंने चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का आभारा व्यक्त किया। 

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