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Mathura News: कोचिंग संस्थानों के लिए छात्र संख्या के आधार पर तय हों मानक
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मथुरा। प्रशासन की कार्रवाई का सामना कर रहे कोचिंग संचालकों के प्रतिनिधि मंडल ने विधायक श्रीकांत शर्मा से मुलाकात कर छात्र संख्या आधारित व्यावहारिक मानक तय करने और इन्हें पूरा करने के लिए 90 दिन की मोहलत दिए जाने की मांग रखी। उत्तर प्रदेश कोचिंग संघ के जिलाध्यक्ष लकी चौधरी की अध्यक्षता में संपन्न बैठक के बाद प्रतिनिधिमंडल ने विधायक को ज्ञापन सौंपा।
श्रीकांत शर्मा ने छात्र हितों और सुरक्षा मानकों के संतुलन को ध्यान में रखते हुए मुद्दा शासन स्तर पर मजबूती से उठाने का आश्वासन दिया। बैठक में जनपद के कोचिंग व लाइब्रेरी संचालकों, भवन स्वामियों और संघ पदाधिकारियों ने भारी संख्या में भाग लिया। अग्नि सुरक्षा, विद्युत सुरक्षा और भवन संबंधी मानकों पर मंथन हुआ। संघ ने कहा कि कोचिंग की कार्यप्रणाली स्कूलों से अलग है, इसलिए विद्यालयों जैसे कड़े नियम थोपना व्यावहारिक नहीं। 20 विद्यार्थियों और 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले संस्थानों के लिए एक समान मानक न्यायसंगत नहीं हैं। मानक स्टूडेंट स्ट्रेंथ के आधार पर लचीले और चरणबद्ध होने चाहिए।
संचालकों ने फायर और विद्युत एनओसी जैसी औपचारिकताएं पूरी करने या संस्थान शिफ्ट करने के लिए न्यूनतम 90 दिनों का समय मांगा, ताकि पढ़ाई बाधित न हो। भवन स्वामियों ने कहा कि सड़क उच्चीकरण से 4-8 फीट नीचे हुए वैध भवनों को केवल इस आधार पर बेसमेंट न माना जाए। वेंटिलेशन और निकास सुरक्षित हों तो स्थलीय निरीक्षण कर राहत दी जाए। इस दौरान विद्युत सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग भी उठी। इस अवसर पर रणधीर सिकरवार, सचिन सोलंकी, जितेंद्र कुंतल, भूपेंद्र सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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श्रीकांत शर्मा ने छात्र हितों और सुरक्षा मानकों के संतुलन को ध्यान में रखते हुए मुद्दा शासन स्तर पर मजबूती से उठाने का आश्वासन दिया। बैठक में जनपद के कोचिंग व लाइब्रेरी संचालकों, भवन स्वामियों और संघ पदाधिकारियों ने भारी संख्या में भाग लिया। अग्नि सुरक्षा, विद्युत सुरक्षा और भवन संबंधी मानकों पर मंथन हुआ। संघ ने कहा कि कोचिंग की कार्यप्रणाली स्कूलों से अलग है, इसलिए विद्यालयों जैसे कड़े नियम थोपना व्यावहारिक नहीं। 20 विद्यार्थियों और 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले संस्थानों के लिए एक समान मानक न्यायसंगत नहीं हैं। मानक स्टूडेंट स्ट्रेंथ के आधार पर लचीले और चरणबद्ध होने चाहिए।
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संचालकों ने फायर और विद्युत एनओसी जैसी औपचारिकताएं पूरी करने या संस्थान शिफ्ट करने के लिए न्यूनतम 90 दिनों का समय मांगा, ताकि पढ़ाई बाधित न हो। भवन स्वामियों ने कहा कि सड़क उच्चीकरण से 4-8 फीट नीचे हुए वैध भवनों को केवल इस आधार पर बेसमेंट न माना जाए। वेंटिलेशन और निकास सुरक्षित हों तो स्थलीय निरीक्षण कर राहत दी जाए। इस दौरान विद्युत सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग भी उठी। इस अवसर पर रणधीर सिकरवार, सचिन सोलंकी, जितेंद्र कुंतल, भूपेंद्र सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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