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ये ‘बोल’ नहीं सकते, पर बोलती है इनकी ‘दोस्ती’
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 08 Aug 2016 12:15 AM IST
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कर्णअक्षम
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ये बोल नहीं सकते, पर इनकी दोस्ती बोलती है। इशारों ही इशारों से अपनी पक्की दोस्ती की पूरी कहानी बयां कर देते हैं। ये आठ दोस्त हैं। कोई दिन ऐसा नहीं बीतता, जब इनकी मुलाकात न होती हो। मोबाइल से एक मैसेज निकलता है और मीटिंग का वक्त, स्थान तय हो जाता है। यह सिलसिला कोई आज का नहीं, पिछले कई वर्षों से चला आ रहा है। लोग भी कहने लगे हैं...कोई इनसे सीखे जीना।
इन सभी दोस्तों की उम्र 25 से 35 साल के बीच की है। सभी मथुरा या आसपास के रहने वाले हैं। इनकी दोस्ती के चर्चे पूरे जिले में हैं। लोगों का कहना है कि दिन में एक बार जरूर सभी मिलते हैं। इशारों में अपने सुख-दुख की बातें करते हैं। मोतीकुंज निवासी आशू गौतम, मोहल्ला चौबे निवासी रजनीकांत चतुर्वेदी, शांति नगर निवासी विपिन चौधरी, नटवर नगर निवासी सुनील सैनी ने आठ दोस्तों का एक ग्रुप बना रहा है। सभी सुन और बोल नहीं पाते हैं।
पढ़े लिखे सभी हैं। अगर आप इनसे कुछ पूछना चाहते हैं, तो कागज पर लिखकर दे दीजिए जवाब मिल जाएगा। ये लोग महीने में एक दिन किसी होटल या गेस्ट हाउस में अपनी मीटिंग भी करते हैं। अगर किसी के परिवार पर कोई आर्थिक संकट होता है, तो सभी मिलकर उसकी मदद भी करते हैं। बाकायदा मोबाइल पर अपना एक ग्रुप बना रखा है।
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इनके परिवार के लोगों का कहना है कि अगर किसी की तबीयत खराब हो जाती है तो उसका हाल जानने के लिए सभी लोग घर पर पहुंच जाते हैं। घंटों उसके साथ बैठे रहेंगे। इतना ही नहीं अगर कपड़े आदि कुछ भी खरीदना होता है, तब भी सब साथ जाते हैं। एक दूसरे को कपड़े आदि पसंद कराते हैं।
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इन सभी दोस्तों की उम्र 25 से 35 साल के बीच की है। सभी मथुरा या आसपास के रहने वाले हैं। इनकी दोस्ती के चर्चे पूरे जिले में हैं। लोगों का कहना है कि दिन में एक बार जरूर सभी मिलते हैं। इशारों में अपने सुख-दुख की बातें करते हैं। मोतीकुंज निवासी आशू गौतम, मोहल्ला चौबे निवासी रजनीकांत चतुर्वेदी, शांति नगर निवासी विपिन चौधरी, नटवर नगर निवासी सुनील सैनी ने आठ दोस्तों का एक ग्रुप बना रहा है। सभी सुन और बोल नहीं पाते हैं।
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पढ़े लिखे सभी हैं। अगर आप इनसे कुछ पूछना चाहते हैं, तो कागज पर लिखकर दे दीजिए जवाब मिल जाएगा। ये लोग महीने में एक दिन किसी होटल या गेस्ट हाउस में अपनी मीटिंग भी करते हैं। अगर किसी के परिवार पर कोई आर्थिक संकट होता है, तो सभी मिलकर उसकी मदद भी करते हैं। बाकायदा मोबाइल पर अपना एक ग्रुप बना रखा है।
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इनके परिवार के लोगों का कहना है कि अगर किसी की तबीयत खराब हो जाती है तो उसका हाल जानने के लिए सभी लोग घर पर पहुंच जाते हैं। घंटों उसके साथ बैठे रहेंगे। इतना ही नहीं अगर कपड़े आदि कुछ भी खरीदना होता है, तब भी सब साथ जाते हैं। एक दूसरे को कपड़े आदि पसंद कराते हैं।