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Mathura News: पूर्वोत्तर से मथुरा पहुंच रहीं ठगी के लिए सिम, टेलीग्राम पर चल रहा सिंडिकेट
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मथुरा। साइबर ठग टेलीग्राम के जरिए सिंडिकेट चलाकर पूर्वोत्तर राज्यों से बड़ी संख्या में सिम कार्ड मंगा रहे हैं। टेलीग्राम पर संदेश मिलते ही एक बार में 700 से 800 सिम कार्ड की खेप मथुरा आ जाती है, जिनका इस्तेमाल देशभर में साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम देने में किया जा रहा है। बीते दिनों पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ है।
अधिकारियों के अनुसार, गोवर्धन, बरसान, कोसीकलां और शेरगढ़ क्षेत्र के लगभग 14 गांवों के साइबर ठग टेलीग्राम पर साइबर ठगी का सिंडिकेट संचालित करते हैं। इन्होंने टेलीग्राम पर ईमानदार व नेक बालक के नाम से ग्रुप बना रखें हैं। लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए साइबर ठग सबसे पहले टेलीग्राम पर संदेश भेजकर सिम कार्डों की मांग करते हैं। उसी दिन एक अजनाज व्यक्ति बताए गए पते पर 700 से 800 सिम कार्ड लेकर पहुंच जाता है। ये सिम कार्ड पूर्वोत्तर राज्यों के विभिन्न क्षेत्र के मजदूरों और गरीब लोगों के नाम पर पंजीकृत होती हैं।
बीते दिनों पुलिस द्वारा साइबर ठगों के खिलाफ चलाए सर्च ऑपरेशन और जांच के दौरान यह बात सामने आई है। जांच में यह भी सामने आया है कि नौहझील क्षेत्र के घुमंतू समुदाय के सैकड़ों लोगों के नाम पर भी बड़ी संख्या में सिम कार्ड जारी कराए गए हैं। इन सिम का इस्तेमाल बैंकिंग फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, ओटीपी फ्रॉड और निवेश के नाम पर होने वाली ठगी में किया है। एसपी ग्रामीण सुरेश चंद्र रावत का कहना है कि संबंधित टेलीग्राम ग्रुप, सिम सप्लायरों और नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि अब तक इन सिम कार्डों का इस्तेमाल कितनी ठगी की घटनाओं में किया गया।
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ठगों से ऐसे बचें
साइबर ठग बैंक अधिकारी, पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बनकर फोन या वीडियो कॉल के जरिए लोगों को झांसे में लेते हैं। ऐसे में किसी भी अनजान कॉल या संदेश पर भरोसा न करें और ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम कार्ड नंबर, सीवीवी या बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा न करें। ठगी का शिकार होने पर साइबर हेल्पलाइन 1930, www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
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अधिकारियों के अनुसार, गोवर्धन, बरसान, कोसीकलां और शेरगढ़ क्षेत्र के लगभग 14 गांवों के साइबर ठग टेलीग्राम पर साइबर ठगी का सिंडिकेट संचालित करते हैं। इन्होंने टेलीग्राम पर ईमानदार व नेक बालक के नाम से ग्रुप बना रखें हैं। लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए साइबर ठग सबसे पहले टेलीग्राम पर संदेश भेजकर सिम कार्डों की मांग करते हैं। उसी दिन एक अजनाज व्यक्ति बताए गए पते पर 700 से 800 सिम कार्ड लेकर पहुंच जाता है। ये सिम कार्ड पूर्वोत्तर राज्यों के विभिन्न क्षेत्र के मजदूरों और गरीब लोगों के नाम पर पंजीकृत होती हैं।
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बीते दिनों पुलिस द्वारा साइबर ठगों के खिलाफ चलाए सर्च ऑपरेशन और जांच के दौरान यह बात सामने आई है। जांच में यह भी सामने आया है कि नौहझील क्षेत्र के घुमंतू समुदाय के सैकड़ों लोगों के नाम पर भी बड़ी संख्या में सिम कार्ड जारी कराए गए हैं। इन सिम का इस्तेमाल बैंकिंग फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, ओटीपी फ्रॉड और निवेश के नाम पर होने वाली ठगी में किया है। एसपी ग्रामीण सुरेश चंद्र रावत का कहना है कि संबंधित टेलीग्राम ग्रुप, सिम सप्लायरों और नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि अब तक इन सिम कार्डों का इस्तेमाल कितनी ठगी की घटनाओं में किया गया।
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ठगों से ऐसे बचें
साइबर ठग बैंक अधिकारी, पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बनकर फोन या वीडियो कॉल के जरिए लोगों को झांसे में लेते हैं। ऐसे में किसी भी अनजान कॉल या संदेश पर भरोसा न करें और ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम कार्ड नंबर, सीवीवी या बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा न करें। ठगी का शिकार होने पर साइबर हेल्पलाइन 1930, www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।