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सीधे यमुना में गिर रहे सीवर-नाले

Sat, 12 Sep 2015 11:42 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा Updated Sat, 12 Sep 2015 11:42 PM IST
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seavage pollution in yamuna
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश और एनजीटी के सख्त रुख के बावजूद मथुरा-वृंदावन में यमुना को लेकर प्रशासनिक रुख गैर जिम्मेदाराना बना हुआ है। शहर के सीवर और नाले सीधे यमुना में गिर रहे हैं। नगर पालिका और प्रशासनिक अफसर यमुना के मैली होने का तमाशा देख रहे हैं। हाईकोर्ट की ओर से यमुना प्रदूषण नियंत्रण के लिए नियुक्त नोडल अफसर भी इस स्थिति पर खामोश हैं।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर धार्मिक क्षेत्र मथुरा-वृंदावन के सभी नाले टेप हैं। नालों के गंदे पानी को यमुना से दूर करने के लिए एसपीएस और एसटीपी स्थापित हैं। इनके संचालन पर प्रति वर्ष कई करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके बावजूद यमुना में शहर के नाले सीधे गिर रहे हैं। इसकी जानकारी नगर पालिका प्रशासन के साथ यमुना कार्ययोजना के नोडल अधिकारी को भी है, लेकिन सब तमाशबीन बने हैं।
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अब तक तर्क दिया जाता था कि एसटीपी की क्षमता कम होने के कारण नाले ओवरफ्लो होते हैं लेकिन अब तो इस समस्या का भी समाधान हो चुका है। अतिरिक्त एसटीपी की स्थापना कर दी है। इसके बावजूद शहर का अधिकांश सीवर और नालों का पानी एसटीपी में जाने के बजाए सीधे यमुना में गिर रहा है। कम बरसात से यमुना में पानी का बहाव भी कम हो गया है। ऐसे में इन नालों के गंदे पानी का असर यमुना में साफ दिखाई दे रहा है।
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नहीं है एनजीटी का डर
अफसरों को यमुना के प्रदूषण को लेकर एनजीटी का भी डर नहीं है। एनजीटी पिछले कुछ दिनों के दौरान यमुना प्रदूषण को लेकर कई सख्त फैसले दे चुका है। हाल ही में एनजीटी ने आगरा के बिल्डर्स पर एक करोड़ से ज्यादा का जुर्माना लगाया है।


बिल्डर नहीं लगा रहे एसटीपी
नई मल्टीस्टोरी बिल्डिंग और नई कालोनियां मथुरा-वृंदावन में तैयार हो रही हैं लेकिन इनमें एसटीपी की स्थापना संबंधी आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है। शहरी सीमा के बाहर स्थापित होने वाली कालोनियों का पानी भी शहर के नालों में मिला दिया जा रहा है। इससे शहर के नालों की स्थिति और खराब हो चली है।



नहीं हुई यमुना कार्ययोजना की बैठक
याची गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी का कहना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यमुना कार्ययोजना के अंतर्गत सभी विभागों की प्रत्येक तीन माह में बैठक के आदेश दिए हैं। इससे यमुना प्रदूषण की स्थिति पर निरंतर निगरानी के साथ उसकी समीक्षा की जा सके। इसके लिए एडीएम स्तर के अफसर को नोडल अधिकारी बनाया है, लेकिन अफसरों को इसकी फुर्सत नहीं है। करीब पिछले आठ माह से यमुना कार्ययोजना क्रियान्वयन समिति की बैठक नहीं बुलाई गई है।
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