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Mathura News: महंगाई से फीकी पड़ने लगी साड़ी कारोबार की चमक
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मथुरा। कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी ने साड़ी कारोबार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। धागा, कपड़ा और अन्य जरूरी सामान महंगा होने से उत्पादन लागत बढ़ गई है। इसका असर कारोबारियों के मुनाफे के साथ ही साड़ी निर्माण से जुड़े हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी पर भी पड़ रहा है। जिले में साड़ी उद्योग का वार्षिक कारोबार 12 सौ से 15 सौ करोड़ रुपये का है।
मथुरा में साड़ी की करीब 50 इकाइयां संचालित हैं। इन इकाइयों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 90-95 हजार मजदूर और ठेकेदारों की आजीविका जुड़ी है। साड़ियों की सजावट का काम ठेकेदारों के माध्यम से घरों में कराया जाता है। मथुरा में बनीं साड़ियाें की उप्र, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड दिल्ली और एनसीआर आदि में अच्छी मांग है। वहीं कच्चे माल को सूरत से मंगवाया जाता है।
कारोबारियों के मुताबिक कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के सापेक्ष तैयार साड़ियों के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़ पा रहे हैं। वर्तमान में ग्रे कपड़े पर 2 से 5 रुपये प्रति मीटर तक की तेजी आई है। वहीं रंग और केमिकल पर भी 40 प्रतिशत से अधिक रुपये की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पुराने आदेश में ढील देते हुए टीटीजेड में आने वाले साड़ी कारोबारियों को राहत प्रदान की है।
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कच्चे माल के महंगा होने से प्रति साड़ी लागत बढ़ रही है। इसका सीधा असर कारोबार के मुनाफे पर पड़ रहा है।
मुकुल मित्तल, सदस्य, लघु उद्योग भारती, मथुरा
साड़ी कारोबार से बड़ी संख्या में मजदूर जुड़े हैं। महंगाई से यदि उत्पादन प्रभावित होता है, इससे मजदूरों की आय पर भी पड़ सकता है।
राजेश बजाज, निवर्तमान अध्यक्ष, नेशनल चेंबर ऑफ कॉमर्स, मथुरा
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मथुरा में साड़ी की करीब 50 इकाइयां संचालित हैं। इन इकाइयों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 90-95 हजार मजदूर और ठेकेदारों की आजीविका जुड़ी है। साड़ियों की सजावट का काम ठेकेदारों के माध्यम से घरों में कराया जाता है। मथुरा में बनीं साड़ियाें की उप्र, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड दिल्ली और एनसीआर आदि में अच्छी मांग है। वहीं कच्चे माल को सूरत से मंगवाया जाता है।
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कारोबारियों के मुताबिक कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के सापेक्ष तैयार साड़ियों के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़ पा रहे हैं। वर्तमान में ग्रे कपड़े पर 2 से 5 रुपये प्रति मीटर तक की तेजी आई है। वहीं रंग और केमिकल पर भी 40 प्रतिशत से अधिक रुपये की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पुराने आदेश में ढील देते हुए टीटीजेड में आने वाले साड़ी कारोबारियों को राहत प्रदान की है।
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कच्चे माल के महंगा होने से प्रति साड़ी लागत बढ़ रही है। इसका सीधा असर कारोबार के मुनाफे पर पड़ रहा है।
मुकुल मित्तल, सदस्य, लघु उद्योग भारती, मथुरा
साड़ी कारोबार से बड़ी संख्या में मजदूर जुड़े हैं। महंगाई से यदि उत्पादन प्रभावित होता है, इससे मजदूरों की आय पर भी पड़ सकता है।
राजेश बजाज, निवर्तमान अध्यक्ष, नेशनल चेंबर ऑफ कॉमर्स, मथुरा