मथुरा जिले में घाटे से उबरने के लिए रोडवेज ने 38 बसें की सरेंडर
कोरोना महामारी के चलते हर कोई हलाकान दिख रहा है। करीब चार महीनों में पांच लॉकडाउन और दो अनलॉक होने के चलते रोडवेज बसों के पहिए पूरी तरह से थम गए थे। केवल यूपी के जनपदों में जरूर इस बीच में केवल चंद बसों का ही संचालन हुआ, जिसके चलते रोडवेज को लाखों रुपये का घाटा सहन करना पड़ा।
लगातार हो रहे घाटे का कारण रोडवेज ने इससे उबरने के लिए 27 निगम और 11 अनुबंधित बसों को सरेंडर कर दिया। यह केवल बसें तीन माह तक सरेंडर की गई हैं। यह बसें बिल्कुल भी चल नहीं पा रही थीं। संभावना यह भी जताई जा रही है कि अभी और कुछ बसें भी रोडवेज सरेंडर कर सकता है।
बसें सरेंडर करके बचाए 8,89, 200 रुपये
जिले में रोडवेज की एक बस का टैक्स 7800 रुपये महीना देना पड़ता है। 38 बसों का टैक्स ढाई लाख रुपये अदा करना पड़ रहा था। इन बसों को तीन माह के लिए सरेंडर करने से आठ लाख 89 हजार 200 रुपये के टैक्स की बचत रोडवेज ने कर ली है। फिलहाल रोडवेज इस घाटे से बचने के लिए कुछ और बसों की लिस्ट तैयार कर रहा है, जिन्हें सरेंडर किया जा सकता है।
खड़ी बसों का भरना पड़ रहा था टैक्स
एआरएम विनोद कुमार शुक्ला ने बताया कि कोरोना महामारी के चलते काफी बसों का संचालन नहीं हो पा रहा था। लगातार बसें संचालन न होने से टैक्स की मार भी पड़ रही थी। इसके चलते 38 बसों को सरेंडर किया गया है ।