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Mathura News: लाखों की आरओ मशीन खराब
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कोसीकलां मंडी समिति कार्यालय परिसर में खराब ओरओ मशीन।
कोसीकलां। अनाज मंडी परिसर में शुद्ध पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए लाखों रुपये की लागत से लगी आरओ मशीन करीब दो साल से खराब है। इससे गर्मी में लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है लेकिन मंडी प्रशासन ने पेयजल व्यवस्था को सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। इससे व्यापारी, मजदूर परेशान हैं।
फल एवं सब्जी की 100 आढ़त हैं, जबकि गल्ले की करीब 250 आढ़त रजिस्टर्ड हैं। मंडी में हर दिन करीब 1 से 2 हजार व्यापारी, किसान व खरीदार पहुंचते हैं। पानी न मिलने से सभी को परेशानी उठानी पड़ती है। मंडी में पेयजल सप्लाई के लिए लगी आरओ मशीन करीब दो साल से खराब है। मशीन की मोटर जल जाने व मशीन में खराबी आ जाने से बंद हो गई। इसके बाद इसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं रह गया है। वर्तमान में आरओ मशीन शोपीस बनकर रह गई है।
खाद्यान्न विक्रेता व्यापारी संघ के पूर्व अध्यक्ष चौधरी दिगंबर सिंह का कहना है कि खराब पड़ी आरओ मशीन को सही कराने के लिए कई बार अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। व्यापारी परशुराम शर्मा का कहना है कि लाखों रुपये की लागत से लगा आरओ सिस्टम खराब है, जिससे रोजाना पानी खरीदना पड़ता है। पानी के लिए प्रति माह 15 सौ से 2 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। मंडी में काम करने वाले मजदूर रहीश का कहना है कि काम के दौरान अगर उन्हें पीने के लिए पानी की जरूरत पड़ जाए तो खरीद कर पीना पड़ता है। ऐसे में उन्हें अनावश्यक बोझ झेलना पड़ रहा है।
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फल एवं सब्जी की 100 आढ़त हैं, जबकि गल्ले की करीब 250 आढ़त रजिस्टर्ड हैं। मंडी में हर दिन करीब 1 से 2 हजार व्यापारी, किसान व खरीदार पहुंचते हैं। पानी न मिलने से सभी को परेशानी उठानी पड़ती है। मंडी में पेयजल सप्लाई के लिए लगी आरओ मशीन करीब दो साल से खराब है। मशीन की मोटर जल जाने व मशीन में खराबी आ जाने से बंद हो गई। इसके बाद इसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं रह गया है। वर्तमान में आरओ मशीन शोपीस बनकर रह गई है।
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खाद्यान्न विक्रेता व्यापारी संघ के पूर्व अध्यक्ष चौधरी दिगंबर सिंह का कहना है कि खराब पड़ी आरओ मशीन को सही कराने के लिए कई बार अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। व्यापारी परशुराम शर्मा का कहना है कि लाखों रुपये की लागत से लगा आरओ सिस्टम खराब है, जिससे रोजाना पानी खरीदना पड़ता है। पानी के लिए प्रति माह 15 सौ से 2 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। मंडी में काम करने वाले मजदूर रहीश का कहना है कि काम के दौरान अगर उन्हें पीने के लिए पानी की जरूरत पड़ जाए तो खरीद कर पीना पड़ता है। ऐसे में उन्हें अनावश्यक बोझ झेलना पड़ रहा है।
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