{"_id":"5760485f4f1c1bc54d11c40f","slug":"ramvriksh-was-working-as-a-doctor","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेटा बूटी के नाम पर भी लोगों को छलता था रामवृक्ष","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेटा बूटी के नाम पर भी लोगों को छलता था रामवृक्ष
पुनीत शर्मा
Updated Tue, 14 Jun 2016 11:51 PM IST
विज्ञापन
jawahar bagh
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जवाहर बाग हिंसा का सूत्रधार रामवृक्ष वर्षों तक डाक्टर बनकर लोगों का इलाज करता रहा। कई गंभीर रोगों के शर्तिया इलाज का दावा भी करता था। गाजीपुर और देवरिया समेत कई जगह होम्योपैथिक क्लीनिक के नाम पर दवाखाने खोल रखे थे। बेटा बूटी के नाम पर भोले-भाले लोगों को उसने खूब छला है। खास बात यह है कि वह लोगों को छलता रहा मगर जिम्मेदार विभाग के लोग आंखें मूंदे रहे।
रामवृक्ष गाजीपुर जनपद में रामपुर बांगसुर गांव का रहने वाला था। बताते हैं कि वह सोलह साल की उम्र में ही बाबा जयगुरुदेव का शिष्य बन गया था। आसपास के गांवों में कार्यक्रम करके जयगुुरुदेव मिशन का प्रचार-प्रसार करने लगा। क्षेत्र में लोग उसे जानने लगे थे। 2005 में उसने क्षेत्र में होम्योपैथिक के नाम से क्लीनिक खोल दिया। एक क्लीनिक देवरिया में खोला जबकि दूसरा गाजीपुर में। वर्ष 2010 तक उसने बाकायदा क्लीनिक चलाए। लोगों को दवाइयां बेचीं। बेटा बूटी के नाम पर तो उसने तमाम लोगों को छला।
बताया जाता है कि रामवृक्ष ने अपने साथ कुछ लोग भी जोड़ रखे थे। उसके इस गोरखधंधे का नेटवर्क कुशीनगर, बस्ती, बलिया, मऊ, कन्नौज, कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, बदायूं और बरेली के ग्रामीण इलाकों तक पहुंच गया था। रामवृक्ष को जानने वाले लोगों का कहना है कि 2010 में उसने अपने सभी अवैध क्लीनिक बंद कर दिए थे। बाद में उसने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम से संगठन बना लिया।
विज्ञापन
वर्ष 2014 में वह मथुरा के जवाहर बाग में आ गया था। इस बाग पर उसने कब्जा कर लिया। बताया जाता है कि बेटा बूटी के नाम पर छलने का धंधा उसने यहां भी शुरू कर दिया था। कई दूसरे गंभीर रोगों के इलाज के नाम पर भी वह लोगों से पैसे ऐंठ रहा था।
तीन जून और पांच जून को जब पुलिस ने जवाहर बाग में आपरेशन सर्च चलाया था, तब भी तमाम दवाएं यहां से बरामद हुई थीं। जवाहर बाग हिंसा में घायल झारखंड निवासी देवकी प्रसाद, जानकी और बिहार के केशव सिंह का कहना है कि जवाहर बाग में उसने अस्पताल खोल रखा था। अगर किसी को कोई दिक्कत होती थी तो रामवृक्ष ही दवा देता था। उसके साथ दो दूसरे लोग भी दवा बांटते थे। कैंप लगाकर भी दवाएं बांटी जाती थीं। कई लोगों की दवा खाने से तबीयत भी बिगड़ गई थी।
कौन थे डाक्टर साहब मुजफ्फरपुर वाले
पुलिस ने 4 जून को उन 10 लोगों की सूची जारी की थी जिनकी शिनाख्त गिरफ्तार किए गए कब्जाधारियों ने की थी। इनमें एक डाक्टर साहब मुजफ्फरपुर वाले का भी उल्लेख था। पुलिस ने जो रिपोर्ट डीजीपी को दी है उसमें लिखा है कि लोगों से पूछताछ में जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक यह डाक्टर जवाहर बाग में कैंप लगाकर बीमार लोगों का इलाज करता था। पूरे जवाहर बाग में उसे डाक्टर साहब के नाम से पुकारा जाता था। पूछताछ में पुलिस को इतना तो पता चल गया था कि वह मुजफ्फरपुर के रहने वाला है, लेकिन मुजफ्फरपुर में कहां का रहने वाला है, इसकी जानकारी नहीं हो पाई है। हालांकि लोगों ने इतना जरूर बताया था कि वह रामवृक्ष के खास थे। पिछले ढाई साल से ही जवाहर बाग में रह रहे थे। उन्होंने यहां पूरा मेडिकल स्टोर भी खोल रखा था। जो दवाई नहीं होती थी उसे बाहर से मंगवा लिया जाता था।
विज्ञापन
रामवृक्ष गाजीपुर जनपद में रामपुर बांगसुर गांव का रहने वाला था। बताते हैं कि वह सोलह साल की उम्र में ही बाबा जयगुरुदेव का शिष्य बन गया था। आसपास के गांवों में कार्यक्रम करके जयगुुरुदेव मिशन का प्रचार-प्रसार करने लगा। क्षेत्र में लोग उसे जानने लगे थे। 2005 में उसने क्षेत्र में होम्योपैथिक के नाम से क्लीनिक खोल दिया। एक क्लीनिक देवरिया में खोला जबकि दूसरा गाजीपुर में। वर्ष 2010 तक उसने बाकायदा क्लीनिक चलाए। लोगों को दवाइयां बेचीं। बेटा बूटी के नाम पर तो उसने तमाम लोगों को छला।
विज्ञापन
बताया जाता है कि रामवृक्ष ने अपने साथ कुछ लोग भी जोड़ रखे थे। उसके इस गोरखधंधे का नेटवर्क कुशीनगर, बस्ती, बलिया, मऊ, कन्नौज, कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, बदायूं और बरेली के ग्रामीण इलाकों तक पहुंच गया था। रामवृक्ष को जानने वाले लोगों का कहना है कि 2010 में उसने अपने सभी अवैध क्लीनिक बंद कर दिए थे। बाद में उसने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम से संगठन बना लिया।
विज्ञापन
वर्ष 2014 में वह मथुरा के जवाहर बाग में आ गया था। इस बाग पर उसने कब्जा कर लिया। बताया जाता है कि बेटा बूटी के नाम पर छलने का धंधा उसने यहां भी शुरू कर दिया था। कई दूसरे गंभीर रोगों के इलाज के नाम पर भी वह लोगों से पैसे ऐंठ रहा था।
तीन जून और पांच जून को जब पुलिस ने जवाहर बाग में आपरेशन सर्च चलाया था, तब भी तमाम दवाएं यहां से बरामद हुई थीं। जवाहर बाग हिंसा में घायल झारखंड निवासी देवकी प्रसाद, जानकी और बिहार के केशव सिंह का कहना है कि जवाहर बाग में उसने अस्पताल खोल रखा था। अगर किसी को कोई दिक्कत होती थी तो रामवृक्ष ही दवा देता था। उसके साथ दो दूसरे लोग भी दवा बांटते थे। कैंप लगाकर भी दवाएं बांटी जाती थीं। कई लोगों की दवा खाने से तबीयत भी बिगड़ गई थी।
कौन थे डाक्टर साहब मुजफ्फरपुर वाले
पुलिस ने 4 जून को उन 10 लोगों की सूची जारी की थी जिनकी शिनाख्त गिरफ्तार किए गए कब्जाधारियों ने की थी। इनमें एक डाक्टर साहब मुजफ्फरपुर वाले का भी उल्लेख था। पुलिस ने जो रिपोर्ट डीजीपी को दी है उसमें लिखा है कि लोगों से पूछताछ में जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक यह डाक्टर जवाहर बाग में कैंप लगाकर बीमार लोगों का इलाज करता था। पूरे जवाहर बाग में उसे डाक्टर साहब के नाम से पुकारा जाता था। पूछताछ में पुलिस को इतना तो पता चल गया था कि वह मुजफ्फरपुर के रहने वाला है, लेकिन मुजफ्फरपुर में कहां का रहने वाला है, इसकी जानकारी नहीं हो पाई है। हालांकि लोगों ने इतना जरूर बताया था कि वह रामवृक्ष के खास थे। पिछले ढाई साल से ही जवाहर बाग में रह रहे थे। उन्होंने यहां पूरा मेडिकल स्टोर भी खोल रखा था। जो दवाई नहीं होती थी उसे बाहर से मंगवा लिया जाता था।