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गोली चलाओ, बम फेंको, पुलिस वालों को मार डालो
अमर उजाला मथुरा
Updated Sun, 19 Jun 2016 12:07 AM IST
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jawahar bagh
- फोटो : अमर उजाला मथुरा
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रामवृक्ष के खास सिपाही राकेश गुप्ता ने पूछताछ में जो बताया वह वार्कई चौंकाने वाला है। राकेश गुप्ता के मुताबिक दो जून को जब पुलिस जवाहर बाग में दाखिल हुई तो रामवृक्ष ने अपने कैंप में लगे लाउडस्पीकर से आदेश देना शुरू कर दिया था। वह कह रहा था कि सभी लोग आगे बढ़कर पुलिस का मुकाबला करो। गोली चलाओ। बम फेंको और एक-एक पुलिस वाले को मार डालो। कलक्ट्रेट और तहसील को घेर लो।
ढाई साल से जवाहर बाग पर कब्जा जमाए बैठा रामवृक्ष यादव जानता था कि उस पर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस जबरन बाग खाली कराएगी लिहाजा उसने उसी तरह से तैयारियां कर ली थीं। हथियार, कारतूस और भारी मात्रा में गोला-बारूद इकट्ठा कर लिया था। बदायूं से गिरफ्तार किए गए रामवृक्ष के फाइनेंसर राकेश गुप्ता ने जो खुलासा किया है वह वाकई हिला देने वाला है।
राकेश गुप्ता ने बताया कि जैसे ही पुलिस जवाहर बाग में दाखिल हुई रामवृक्ष अपने कैंप से बाहर निकल आया और सभी लड़कों को पेड़ों पर चढ़कर मोर्चा संभालने के लिए कहा। माइक से आदेश दिया कि जितने भी हथियार हैं सभी को निकाल लो। एक कैंप में असलहा थे, जिन्हें लेने के लिए सभी पहुंच गए। बम भी वहां से निकाल लिए गए। रामवृक्ष के आदेश पर बम फेंकने शुरू कर दिए गए। पुलिस पर फायरिंग शुरू हो गई। चंदनबोस के साथ रहने वाले लड़कों ने सबसे पहले गोली चलाई। रामवृक्ष भीड़ से कह रहा था कि हमें कलक्ट्रेट पर कब्जा करना है। लिहाजा सभी लोग वहां जाकर बैठ जाओ।
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जब पुलिस ने कार्रवाई तेज की तो राकेश गुप्ता घबरा गया और अपनी लाइसेंसी बंदूक छोड़कर पत्नी के साथ भाग गया। सीधा स्टेशन पहुंचा और ट्रेन पकड़कर अपनी ससुराल बरेली चला गया। अपने सभी मोबाइल और सिम बंद कर दिए थे। राकेश गुप्ता से जब रामवृक्ष की मौत के बारे में पूछा गया तो उसका कहना था कि वह तो अपनी पत्नी को लेकर वहां से भाग गया था। इसलिए उसे पता नहीं कि रामवृक्ष मरा है या नहीं। उसने अपने सारे मोबाइल भी फेंक दिए थे।
चार दोस्तों के साथ लाया था हथियारों की खेप
राकेश गुप्ता अपने चार दोस्तोें के साथ हथियारों की खेप जवाहर बाग में लेकर आया था। पूछताछ में राकेश गुप्ता ने अपनी राइफल की पहचान भी उसके नंबर आदि से की। उसकी लाइसेंसी राइफल पुलिस ने दो जून की रात को जवाहर बाग में सर्च आपरेशन के दौरान बरामद की थी। एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि राकेश गुप्ता के अनुसार वह लाइसेंसी राइफल के साथ अपनी 32 बोर की रिवाल्वर को भी बाग में छोड़कर भाग गया था। हथियारों की आपूर्ति के संबंध में पहले तो उसने मना किया लेकिन बाद में अपने चार दोस्तों के साथ मई महीने में हथियारों की खेप लाना स्वीकार कर लिया। हालांकि उसने एक दोस्त का ही नाम पुलिस को बताया। शेष को सामने आने पर चेहरे से पहचानने की बात कही।
राकेश गुप्ता ने ली थी रामवृक्ष की जमानत
सन् 2011 में भी रामवृक्ष विधिक स्वाधीन यात्रा लेकर मथुरा में आया था। यहां बाबा जयगुरुदेव की पेट्रोल पंप पर उसने एक रुपये में 40 लीटर पेट्रोल और 60 लीटर डीजल गाड़ियों में डालने के लिए कहा। कर्मचारियों ने मना किया तो रामवृक्ष और उसके साथियों ने उनकी पिटाई कर दी थी। मामले में थाना हाईवे में रामवृक्ष सहित 11 लोगों के खिलाफ जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। 22 दिसंबर, 2013 को मथुरा पुलिस ने रामवृक्ष को गाजीपुर से गिरफ्तार किया था। तब वह 22 दिनों तक मथुरा जेल में रहा। जनवरी, 2014 में रामवृक्ष की जमानत राकेश गुप्ता ने ही ली थी।
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ढाई साल से जवाहर बाग पर कब्जा जमाए बैठा रामवृक्ष यादव जानता था कि उस पर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस जबरन बाग खाली कराएगी लिहाजा उसने उसी तरह से तैयारियां कर ली थीं। हथियार, कारतूस और भारी मात्रा में गोला-बारूद इकट्ठा कर लिया था। बदायूं से गिरफ्तार किए गए रामवृक्ष के फाइनेंसर राकेश गुप्ता ने जो खुलासा किया है वह वाकई हिला देने वाला है।
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राकेश गुप्ता ने बताया कि जैसे ही पुलिस जवाहर बाग में दाखिल हुई रामवृक्ष अपने कैंप से बाहर निकल आया और सभी लड़कों को पेड़ों पर चढ़कर मोर्चा संभालने के लिए कहा। माइक से आदेश दिया कि जितने भी हथियार हैं सभी को निकाल लो। एक कैंप में असलहा थे, जिन्हें लेने के लिए सभी पहुंच गए। बम भी वहां से निकाल लिए गए। रामवृक्ष के आदेश पर बम फेंकने शुरू कर दिए गए। पुलिस पर फायरिंग शुरू हो गई। चंदनबोस के साथ रहने वाले लड़कों ने सबसे पहले गोली चलाई। रामवृक्ष भीड़ से कह रहा था कि हमें कलक्ट्रेट पर कब्जा करना है। लिहाजा सभी लोग वहां जाकर बैठ जाओ।
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जब पुलिस ने कार्रवाई तेज की तो राकेश गुप्ता घबरा गया और अपनी लाइसेंसी बंदूक छोड़कर पत्नी के साथ भाग गया। सीधा स्टेशन पहुंचा और ट्रेन पकड़कर अपनी ससुराल बरेली चला गया। अपने सभी मोबाइल और सिम बंद कर दिए थे। राकेश गुप्ता से जब रामवृक्ष की मौत के बारे में पूछा गया तो उसका कहना था कि वह तो अपनी पत्नी को लेकर वहां से भाग गया था। इसलिए उसे पता नहीं कि रामवृक्ष मरा है या नहीं। उसने अपने सारे मोबाइल भी फेंक दिए थे।
चार दोस्तों के साथ लाया था हथियारों की खेप
राकेश गुप्ता अपने चार दोस्तोें के साथ हथियारों की खेप जवाहर बाग में लेकर आया था। पूछताछ में राकेश गुप्ता ने अपनी राइफल की पहचान भी उसके नंबर आदि से की। उसकी लाइसेंसी राइफल पुलिस ने दो जून की रात को जवाहर बाग में सर्च आपरेशन के दौरान बरामद की थी। एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि राकेश गुप्ता के अनुसार वह लाइसेंसी राइफल के साथ अपनी 32 बोर की रिवाल्वर को भी बाग में छोड़कर भाग गया था। हथियारों की आपूर्ति के संबंध में पहले तो उसने मना किया लेकिन बाद में अपने चार दोस्तों के साथ मई महीने में हथियारों की खेप लाना स्वीकार कर लिया। हालांकि उसने एक दोस्त का ही नाम पुलिस को बताया। शेष को सामने आने पर चेहरे से पहचानने की बात कही।
राकेश गुप्ता ने ली थी रामवृक्ष की जमानत
सन् 2011 में भी रामवृक्ष विधिक स्वाधीन यात्रा लेकर मथुरा में आया था। यहां बाबा जयगुरुदेव की पेट्रोल पंप पर उसने एक रुपये में 40 लीटर पेट्रोल और 60 लीटर डीजल गाड़ियों में डालने के लिए कहा। कर्मचारियों ने मना किया तो रामवृक्ष और उसके साथियों ने उनकी पिटाई कर दी थी। मामले में थाना हाईवे में रामवृक्ष सहित 11 लोगों के खिलाफ जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। 22 दिसंबर, 2013 को मथुरा पुलिस ने रामवृक्ष को गाजीपुर से गिरफ्तार किया था। तब वह 22 दिनों तक मथुरा जेल में रहा। जनवरी, 2014 में रामवृक्ष की जमानत राकेश गुप्ता ने ही ली थी।