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राम को 14 वर्ष का वनवास, भरत को राजगद्दी
अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 03 Oct 2016 12:42 AM IST
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प्रभु श्रीराम की बारात लौटकर अवधपुरी पहुंच गई।
- फोटो : अमर उजाला
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प्रभु श्रीराम की बारात लौटकर अवधपुरी पहुंच गई। यहां महिलाओं द्वारा मंगलाचार गाए जा रहे थे। नर-नारियां प्रभु श्रीराम और जानकी के दर्शन कर हर्षित हो रहे थे। मां कौशल्या, सुमित्रा, कैकेयी ने चारों भाइयों की आरती उतारी।
राजा दशरथ ने गुरु वशिष्ठ से श्रीराम का राज्याभिषेक करने की बात कही। इसके लिए राज्य में तैयारियां शुरू हो गई। हर ओर हर्ष और उल्लास छा गया। दीपकों की जगमग ज्योति होने लगी। तोरण द्वार बनाए गए। देवताओं को विचार आया कि श्रीराम का अभिषेक हो गया तो राक्षसों का वध कौन करेगा।
उन्होंने सरस्वती को अपनी बात बताई। सरस्वती ने माया से मंथरा को जहर का प्याला बना दिया और कैकेयी के कान भर दिए। कैकेयी कोपभवन में चली गई और जब दशरथ आए तो उन्होंने अपने दो वचनों की याद दिलाई। पहले वचन में भरत को राजगद्दी और दूसरा श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास मांगा।
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यह सुनते ही दशरथ मूर्छित हो गए। राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के विवाह की खुशियां काफूर हो गई। जब श्रीराम को यह बात पता चली तो वह वनवास जाने को तैयार हो गए। लक्ष्मण भी भाई की सेवा के लिए उनके साथ चल दिए। श्रीकृष्ण जन्मस्थान के लीलामंच पर यह दृश्य देखकर सभी का हृदय द्रवित हो गया।
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राजा दशरथ ने गुरु वशिष्ठ से श्रीराम का राज्याभिषेक करने की बात कही। इसके लिए राज्य में तैयारियां शुरू हो गई। हर ओर हर्ष और उल्लास छा गया। दीपकों की जगमग ज्योति होने लगी। तोरण द्वार बनाए गए। देवताओं को विचार आया कि श्रीराम का अभिषेक हो गया तो राक्षसों का वध कौन करेगा।
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उन्होंने सरस्वती को अपनी बात बताई। सरस्वती ने माया से मंथरा को जहर का प्याला बना दिया और कैकेयी के कान भर दिए। कैकेयी कोपभवन में चली गई और जब दशरथ आए तो उन्होंने अपने दो वचनों की याद दिलाई। पहले वचन में भरत को राजगद्दी और दूसरा श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास मांगा।
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यह सुनते ही दशरथ मूर्छित हो गए। राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के विवाह की खुशियां काफूर हो गई। जब श्रीराम को यह बात पता चली तो वह वनवास जाने को तैयार हो गए। लक्ष्मण भी भाई की सेवा के लिए उनके साथ चल दिए। श्रीकृष्ण जन्मस्थान के लीलामंच पर यह दृश्य देखकर सभी का हृदय द्रवित हो गया।