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सियासी ‘टॉक’ सिखाने को लखनऊ में ‘वॉक’
पुनीत शर्मा, अमर उजाला मथुरा
Updated Wed, 27 Jul 2016 11:57 PM IST
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पनामा पेपर्स ने भी बढ़ाई चिंता
- फोटो : Getty
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बसपा और भाजपा के बीच छिड़े वाक युद्ध से बने हालातों को देखकर सभी पार्टियां अलर्ट हो गई हैं। बड़बोले नेताओं को तो चुनाव तक मुंह बंद रखने को कह ही दिया गया है। जिला स्तर और प्रदेश के पदाधिकारियों को भी लखनऊ मुख्यालय पर बुलाकर समझाया जा रहा है। नसीहतें दी जा रही हैं कि चुनावी वर्ष है ऐसे में एक गलत शब्द भी सियासी गणित को बिगाड़ सकता है।
बसपा सुप्रीमो मायावती के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल के बाद बसपा और भाजपा में खड़ा हुआ सियासी तूफान कई पार्टियों को चौकस कर गया है। प्रदेश की राजनीति में बड़ा रोल निभाने वाले यह दल अपने बड़बोले नेताओं पर न केवल अंकुश लगा रहे हैं, बल्कि बयान देने का अधिकार किसे होगा और किसे नहीं यह भी तय किया जा रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक बसपा ने अपने सभी कोआर्डिनेटर और जिलाध्यक्षों को हिदायत दी है कि वह मीटिंगों के दौरान केवल पार्टी की नीतियों का प्रचार करें।
भाजपा और सपा भी अपने पदाधिकारियों को लखनऊ बुलाकर एक दिवसीय प्रशिक्षण दे रही है। जो भी बैठकें हो रही हैं उनमें केवल भाषा पर ही जोर दिया जा रहा है। मीडिया के सवालों का जवाब शांत भाव से कैसे दिया जाए, इस पर भी चर्चा हो रही है।
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मर्यादा लांघने वाला पार्टी से बाहर होगा: श्रीकांत शर्मा
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा का कहना है कि भाजपा एक अनुशासित पार्टी है। गलत भाषा का प्रयोग करने वालों को पार्टी में कोई स्थान नहीं दिया जाता। दयाशंकर के खिलाफ भी तत्काल एक्शन लिया गया। कोई भी किसी के खिलाफ गलत भाषा का प्रयोग करता है तो उसे तत्काल पार्टी से बाहर किया जाएगा। उन्होंने कहा, लेकिन बसपा को भी उसी तरह से एक्शन लेना चाहिए। नसीमुद्दीन ने जिस तरह से नारे लगवाए थे उन्हें भी पार्टी से निकाला जाना चाहिए।
सपा ने अपने जिलाध्यक्षों को पढ़ाया पाठ
सपा ने अपने सभी जिलाध्यक्षों से कहा है कि वह पार्टी के नेताओं पर लगाम कसें। कोई भी किसी प्रकार की अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं करेगा। लोगों के साथ प्रेम के साथ पेश आएं। जनता को प्यार से जीतने की जरूरत है। लखनऊ में तीन दिन पहले हुई मीटिंग में सभी जिला अध्यक्षों को भी बताया गया कि किस तरह से जनता के बीच जाना है। अपनी बात शालीनता के साथ रखने को कहा गया है।
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बसपा सुप्रीमो मायावती के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल के बाद बसपा और भाजपा में खड़ा हुआ सियासी तूफान कई पार्टियों को चौकस कर गया है। प्रदेश की राजनीति में बड़ा रोल निभाने वाले यह दल अपने बड़बोले नेताओं पर न केवल अंकुश लगा रहे हैं, बल्कि बयान देने का अधिकार किसे होगा और किसे नहीं यह भी तय किया जा रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक बसपा ने अपने सभी कोआर्डिनेटर और जिलाध्यक्षों को हिदायत दी है कि वह मीटिंगों के दौरान केवल पार्टी की नीतियों का प्रचार करें।
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भाजपा और सपा भी अपने पदाधिकारियों को लखनऊ बुलाकर एक दिवसीय प्रशिक्षण दे रही है। जो भी बैठकें हो रही हैं उनमें केवल भाषा पर ही जोर दिया जा रहा है। मीडिया के सवालों का जवाब शांत भाव से कैसे दिया जाए, इस पर भी चर्चा हो रही है।
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मर्यादा लांघने वाला पार्टी से बाहर होगा: श्रीकांत शर्मा
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा का कहना है कि भाजपा एक अनुशासित पार्टी है। गलत भाषा का प्रयोग करने वालों को पार्टी में कोई स्थान नहीं दिया जाता। दयाशंकर के खिलाफ भी तत्काल एक्शन लिया गया। कोई भी किसी के खिलाफ गलत भाषा का प्रयोग करता है तो उसे तत्काल पार्टी से बाहर किया जाएगा। उन्होंने कहा, लेकिन बसपा को भी उसी तरह से एक्शन लेना चाहिए। नसीमुद्दीन ने जिस तरह से नारे लगवाए थे उन्हें भी पार्टी से निकाला जाना चाहिए।
सपा ने अपने जिलाध्यक्षों को पढ़ाया पाठ
सपा ने अपने सभी जिलाध्यक्षों से कहा है कि वह पार्टी के नेताओं पर लगाम कसें। कोई भी किसी प्रकार की अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं करेगा। लोगों के साथ प्रेम के साथ पेश आएं। जनता को प्यार से जीतने की जरूरत है। लखनऊ में तीन दिन पहले हुई मीटिंग में सभी जिला अध्यक्षों को भी बताया गया कि किस तरह से जनता के बीच जाना है। अपनी बात शालीनता के साथ रखने को कहा गया है।