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Mathura News: शरद पूर्णिमा पर मोरमुकुट पहन बांसुरी धारण करेंगे श्रीबांकेबिहारी
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ठाकुर बांके बिहारी मंदिर वृंदावन
- फोटो : mathura
वृंदावन। शरद पूर्णिमा की रात में श्रीबांकेबिहारी मंदिर एक बार फिर दिव्य और अद्भुत दृश्य का साक्षी बनेगा। इस दिन ठाकुरजी स्वयं बांसुरी की मधुर तान छेड़ेंगे और चंद्रमा की शीतल किरणें उनके चरणों की वंदना करेंगी। वर्ष भर में इसी दिन एक बार मोरमुकुट पहनकर ठाकुरजी बांसुरी धारण करते हैं।
एक ओर मंदिर प्रबंधन ने इस विशेष आयोजन की तैयारियां अभी से शुरू कर दी हैं। साल में केवल एक बार, शरद पूर्णिमा की रात ही ठाकुरजी बांसुरी धारण करते हैं। वहीं सेवायतों द्वारा इस दिन ठाकुर की विशेष शृंगार किया जाता है। श्वेत रंग की पोशाक पहने ठाकुरजी मनोहरी रूप में दर्शन देकर श्रद्धालुओं पर अमृतकृपा बरसाते हैं। इस दिन ठाकुरजी की झलक पाने के लिए हर कोई आतुर रहता है। देश-विदेश से श्रद्धालुओं दो दिन पहले से ही वृंदावन में आना शुरू कर दिया है। होटल और धर्मशालाओं की एडवांस में बुकिंग शुरू हो गई हैं।
गौरतलब है कि शरद पूर्णिमा को रासलीला और चंद्रमा की विशेष महत्ता से जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणें अमृतमयी मानी जाती हैं।
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एक ओर मंदिर प्रबंधन ने इस विशेष आयोजन की तैयारियां अभी से शुरू कर दी हैं। साल में केवल एक बार, शरद पूर्णिमा की रात ही ठाकुरजी बांसुरी धारण करते हैं। वहीं सेवायतों द्वारा इस दिन ठाकुर की विशेष शृंगार किया जाता है। श्वेत रंग की पोशाक पहने ठाकुरजी मनोहरी रूप में दर्शन देकर श्रद्धालुओं पर अमृतकृपा बरसाते हैं। इस दिन ठाकुरजी की झलक पाने के लिए हर कोई आतुर रहता है। देश-विदेश से श्रद्धालुओं दो दिन पहले से ही वृंदावन में आना शुरू कर दिया है। होटल और धर्मशालाओं की एडवांस में बुकिंग शुरू हो गई हैं।
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गौरतलब है कि शरद पूर्णिमा को रासलीला और चंद्रमा की विशेष महत्ता से जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणें अमृतमयी मानी जाती हैं।
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