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Mathura News: गंगाजल नहीं...यमुना के पानी पर निगाहें
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ट्रीटमेंट प्लांट
- फोटो : mathura
प्रदीप कुमार
मथुरा। मथुरा-वृंदावन में गंगाजल आपूर्ति की आस टूटने के बाद जिम्मेदारों की अब यमुना के पानी पर निगाहें टिकी हैं। नगर निगम ने अमृत 2.0 योजना के तहत यमुना के पानी को शोधित कर जलापूर्ति के लिए गोकुल बैराज पर 120 एमएलडी क्षमता वाला जल उपचार संयंत्र (डब्ल्यूटीपी) स्थापित करने की योजना बनाई है। शासन से निराशा मिलने के बाद हतोत्साहित अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने यह कदम उठाया है। निगम की बोर्ड में बैठक में प्रस्ताव मंजूरी के बाद डब्ल्यूटीपी का कार्य शुरू होगा।
वर्तमान में मथुरा-वृंदावन में करीब 150 एमएलडी जलापूर्ति के सापेक्ष 25 एमएलडी गंगाजल की आपूर्ति की जा रही है। ये गंगाजल कुछ की क्षेत्रों में सप्लाई हो रहा है। अन्य क्षेत्रों के लोग अपने-अपने संसाधनों से जलापूर्ति कर रहे हैं। हालांकि नगर निगम के अधिकारी मथुरा-वृंदावन में पर्याप्त मात्रा में गंगाजल आपूर्ति की लगातार मांग कर रहे हैं। इसके बाद भी केंद्र व राज्य सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसलिए नगर निगम के अधिकारियों ने गंगाजल आपूर्ति की निर्भरता को कम करने की दिशा में डब्ल्यूटीपी स्थापित करने की योजना बनाई है। इस परियोजना पर कुल 258.47 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसके माध्यम से यमुना के पानी को शोधित करके प्रतिदिन 120 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रति दिन) पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। अधिकारियों ने इसका प्रस्ताव बना लिया है। आगामी दिनों में निगम होने वाले बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जाएगा। प्रस्ताव पर मंजूरी मिलने के बाद प्लांट का लगाने का कार्य शुरू होगा। संवाद
नवीनतम तकनीकी पर आधारित होगा प्लांट
अधिकारियों ने बताया कि यह संयंत्र पारंपरिक जल शोधन संयंत्रों से बिल्कुल अलग होगा। इसे नवीनतम तकनीकी प्रणाली से लैस होगा, जो पानी की गुणवत्ता की रियल-टाइम निगरानी और पूरे संयंत्र के संचालन में मदद करेगी। इसमें मल्टी-लेयर फिल्ट्रेशन, एडवांस्ड क्लोरीनेशन और ऑनलाइन टर्बिडिटी मीटर जैसी सुविधाएं होंगी, जो यह सुनिश्चित करेंगी कि शोधित पानी राष्ट्रीय पेयजल मानकों पर खरा उतरे।
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पर्याप्त मात्रा में होगी जलापूर्ति
महाप्रबंधक जल मोहम्मद अनवर ख्वाजा ने कहा कि इस परियोजना से शहर के उन बाहरी और नव-विकसित क्षेत्रों को विशेष रूप से लाभ होगा, जहां अभी तक पाइपलाइन से स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति एक चुनौती बनी हुई है। 120 एमएलडी की विशाल क्षमता न केवल वर्तमान मांग को पूरा करेगी, बल्कि अगले दो दशकों तक भी जलापूर्ति को पूरा करेगी। निर्माण कार्य को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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मथुरा। मथुरा-वृंदावन में गंगाजल आपूर्ति की आस टूटने के बाद जिम्मेदारों की अब यमुना के पानी पर निगाहें टिकी हैं। नगर निगम ने अमृत 2.0 योजना के तहत यमुना के पानी को शोधित कर जलापूर्ति के लिए गोकुल बैराज पर 120 एमएलडी क्षमता वाला जल उपचार संयंत्र (डब्ल्यूटीपी) स्थापित करने की योजना बनाई है। शासन से निराशा मिलने के बाद हतोत्साहित अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने यह कदम उठाया है। निगम की बोर्ड में बैठक में प्रस्ताव मंजूरी के बाद डब्ल्यूटीपी का कार्य शुरू होगा।
वर्तमान में मथुरा-वृंदावन में करीब 150 एमएलडी जलापूर्ति के सापेक्ष 25 एमएलडी गंगाजल की आपूर्ति की जा रही है। ये गंगाजल कुछ की क्षेत्रों में सप्लाई हो रहा है। अन्य क्षेत्रों के लोग अपने-अपने संसाधनों से जलापूर्ति कर रहे हैं। हालांकि नगर निगम के अधिकारी मथुरा-वृंदावन में पर्याप्त मात्रा में गंगाजल आपूर्ति की लगातार मांग कर रहे हैं। इसके बाद भी केंद्र व राज्य सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसलिए नगर निगम के अधिकारियों ने गंगाजल आपूर्ति की निर्भरता को कम करने की दिशा में डब्ल्यूटीपी स्थापित करने की योजना बनाई है। इस परियोजना पर कुल 258.47 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसके माध्यम से यमुना के पानी को शोधित करके प्रतिदिन 120 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रति दिन) पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। अधिकारियों ने इसका प्रस्ताव बना लिया है। आगामी दिनों में निगम होने वाले बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जाएगा। प्रस्ताव पर मंजूरी मिलने के बाद प्लांट का लगाने का कार्य शुरू होगा। संवाद
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नवीनतम तकनीकी पर आधारित होगा प्लांट
अधिकारियों ने बताया कि यह संयंत्र पारंपरिक जल शोधन संयंत्रों से बिल्कुल अलग होगा। इसे नवीनतम तकनीकी प्रणाली से लैस होगा, जो पानी की गुणवत्ता की रियल-टाइम निगरानी और पूरे संयंत्र के संचालन में मदद करेगी। इसमें मल्टी-लेयर फिल्ट्रेशन, एडवांस्ड क्लोरीनेशन और ऑनलाइन टर्बिडिटी मीटर जैसी सुविधाएं होंगी, जो यह सुनिश्चित करेंगी कि शोधित पानी राष्ट्रीय पेयजल मानकों पर खरा उतरे।
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पर्याप्त मात्रा में होगी जलापूर्ति
महाप्रबंधक जल मोहम्मद अनवर ख्वाजा ने कहा कि इस परियोजना से शहर के उन बाहरी और नव-विकसित क्षेत्रों को विशेष रूप से लाभ होगा, जहां अभी तक पाइपलाइन से स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति एक चुनौती बनी हुई है। 120 एमएलडी की विशाल क्षमता न केवल वर्तमान मांग को पूरा करेगी, बल्कि अगले दो दशकों तक भी जलापूर्ति को पूरा करेगी। निर्माण कार्य को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।