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श्रीजी मंदिर में नहीं होगा कोई नया कार्यक्रम
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 23 Jun 2016 11:49 PM IST
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श्रीजी टेंपल
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श्रीजी मंदिर, बरसाना में छह जुलाई को प्रस्तावित दिव्य श्रीराधा रानी विग्रह प्राकट्योत्सव परिसर में आयोजित नहीं होगा। आयोजन के विरोध के बाद गुरुवार को बुलाई गई गोस्वामी समाज की बैठक में ये निर्णय लिया गया। बैठक में तय किया गया कि परंपरागत उत्सवों के अतिरिक्त कोई आयोजन मंदिर परिसर में नहीं करने दिया जाएगा।
बुधवार की शाम को दिव्य श्रीराधा रानी विग्रह प्राकट्य महोत्सव के बारे में होर्डिंग लगाए गए थे। इसके बाद सोशल मीडिया पर भी इस संबंध में पोस्ट डाले गए। छह जुलाई को प्रस्तावित कार्यक्रम के आयोजक मुख्य रूप से श्यामसुंदर गोस्वामी और अभिषेक गोस्वामी बताए गए। आयोजन में प्रसिद्ध भजन गायक अनूप जलौटा, जेएस मधुकर भी आमंत्रित हैं।
होर्डिंग लगाए जाने और सोशल मीडिया पर प्रचार के साथ ही कार्यक्रम का विरोध शुरू हो गया। विरोध कर रहे गोस्वामियों के एक बड़े गुट का तर्क है कि 6 जुलाई को नारायण दास महाराज का जयंती दिवस (स्वामी जी की दौज) है। कुछ लोग श्रीजी विग्रह का प्राकट्योत्सव मनाकर सैकड़ों वर्षों पुरानी परंपराओं से खिलवाड़ कर रहे हैं।
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समाज और कस्बे में विरोध को देख मंदिर के रिसीवर ने गुरुवार को गोस्वामी समाज की बैठक बुलाई। इसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि मंदिर परिसर में नंदगांव-बरसाना के गोस्वामी समाज की ओर से समाज गायन किया जाएगा। बाहर से आए श्रद्धालु भजन संध्या का आयोजन तो कर सकेंगे लेकिन परिसर के बाहर।
मंदिर के रिसीवर डा. कृष्णमुरारी गोस्वामी का कहना है कि हमारी ये कोशिश है कि मंदिर परिसर वाद-विवाद का केंद्र न बने। भविष्य में मंदिर परिसर में कोई भी प्रोग्राम नहीं होगा। अगर किसी को कोई भी प्रोग्राम कराना हो तो वह मंदिर से नीचे कहीं पर भी करा सकता है।
बैठक में मंदिर के दूसरे रिसीवर मनमोहन गोस्वामी भी मौजूद रहे जबकि दो रिसीवर हरीमोहन गोस्वामी और मोहन गोस्वामी अनुपस्थित रहे। मुख्य आयोजकों में से एक अभिषेक गोस्वामी भी इस दौरान मौजूद थे। प्रकरण में राधारानी के प्राकट्योत्सव के आयोजक श्याम सुंदर गोस्वामी से बात की गई तो उन्होंने कार्यक्रम के संबंध में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
सोशल मीडिया पर भी कड़ी प्रतिक्रिया
राधारानी के प्राकट्योत्सव के बारे में सोशल मीडिया पर डाली गई पोस्ट पर भी विरोध में बड़ी संख्या में कमेंट आए हैं। विरोध में कमेंट करने वालों में गोस्वामी समाज के अतिरिक्त कस्बे के अन्य लोग भी हैं।
प्राचीन उत्सव है नारायण दास महाराज का प्राकट्योत्सव
राधारानी के गांव बरसाना में छह जुलाई को पड़ने वाली स्वामीजी की दौज भी परंपरागत उत्सवों में से माना जाता है। इस उत्सव को गोस्वामी समाज वर्षों से मनाता चला आ रहा है। मंदिर के पूर्व अध्यक्ष संजय गोस्वामी और मुकेश गोस्वामी का कहना है कि 6 जुलाई को मनाए जाने वाला प्राचीन उत्सव स्वामीजी की दौज है न कि श्रीजी के विग्रह का प्राकट्योत्सव।
विरोध में तर्क
-राधारानी का प्राकट्य दिवस राधाष्टमी वाले दिन ही मनाया जाता है
- प्रस्तावित उत्सव वाले दिन किशोरी जू के अभिषेक के दर्शन नहीं कराए जाते
- महज मंदिर में भजन संध्या कराई जाती है
- छह जुलाई को नारायण दास जी (स्वामी जी) की जयंती मनाई जाती है
-प्राचीन परंपरा के अनुसार हलुवा, लोई का प्रसाद स्वामी जी को लगाया जाता है
6 माह पहले भी शुरू किया जा रहा था एक उत्सव
करीब 6 माह पूर्व भी एक सेवायत की ओर से ब्याहवला नामक एक नए उत्सव का आयोजन श्रीजी मंदिर में किया जाना था। जोर-शोर से कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार किया गया। लेकिन विरोध के चलते कार्यक्रम रद्द करना पड़ा।
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बुधवार की शाम को दिव्य श्रीराधा रानी विग्रह प्राकट्य महोत्सव के बारे में होर्डिंग लगाए गए थे। इसके बाद सोशल मीडिया पर भी इस संबंध में पोस्ट डाले गए। छह जुलाई को प्रस्तावित कार्यक्रम के आयोजक मुख्य रूप से श्यामसुंदर गोस्वामी और अभिषेक गोस्वामी बताए गए। आयोजन में प्रसिद्ध भजन गायक अनूप जलौटा, जेएस मधुकर भी आमंत्रित हैं।
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होर्डिंग लगाए जाने और सोशल मीडिया पर प्रचार के साथ ही कार्यक्रम का विरोध शुरू हो गया। विरोध कर रहे गोस्वामियों के एक बड़े गुट का तर्क है कि 6 जुलाई को नारायण दास महाराज का जयंती दिवस (स्वामी जी की दौज) है। कुछ लोग श्रीजी विग्रह का प्राकट्योत्सव मनाकर सैकड़ों वर्षों पुरानी परंपराओं से खिलवाड़ कर रहे हैं।
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समाज और कस्बे में विरोध को देख मंदिर के रिसीवर ने गुरुवार को गोस्वामी समाज की बैठक बुलाई। इसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि मंदिर परिसर में नंदगांव-बरसाना के गोस्वामी समाज की ओर से समाज गायन किया जाएगा। बाहर से आए श्रद्धालु भजन संध्या का आयोजन तो कर सकेंगे लेकिन परिसर के बाहर।
मंदिर के रिसीवर डा. कृष्णमुरारी गोस्वामी का कहना है कि हमारी ये कोशिश है कि मंदिर परिसर वाद-विवाद का केंद्र न बने। भविष्य में मंदिर परिसर में कोई भी प्रोग्राम नहीं होगा। अगर किसी को कोई भी प्रोग्राम कराना हो तो वह मंदिर से नीचे कहीं पर भी करा सकता है।
बैठक में मंदिर के दूसरे रिसीवर मनमोहन गोस्वामी भी मौजूद रहे जबकि दो रिसीवर हरीमोहन गोस्वामी और मोहन गोस्वामी अनुपस्थित रहे। मुख्य आयोजकों में से एक अभिषेक गोस्वामी भी इस दौरान मौजूद थे। प्रकरण में राधारानी के प्राकट्योत्सव के आयोजक श्याम सुंदर गोस्वामी से बात की गई तो उन्होंने कार्यक्रम के संबंध में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
सोशल मीडिया पर भी कड़ी प्रतिक्रिया
राधारानी के प्राकट्योत्सव के बारे में सोशल मीडिया पर डाली गई पोस्ट पर भी विरोध में बड़ी संख्या में कमेंट आए हैं। विरोध में कमेंट करने वालों में गोस्वामी समाज के अतिरिक्त कस्बे के अन्य लोग भी हैं।
प्राचीन उत्सव है नारायण दास महाराज का प्राकट्योत्सव
राधारानी के गांव बरसाना में छह जुलाई को पड़ने वाली स्वामीजी की दौज भी परंपरागत उत्सवों में से माना जाता है। इस उत्सव को गोस्वामी समाज वर्षों से मनाता चला आ रहा है। मंदिर के पूर्व अध्यक्ष संजय गोस्वामी और मुकेश गोस्वामी का कहना है कि 6 जुलाई को मनाए जाने वाला प्राचीन उत्सव स्वामीजी की दौज है न कि श्रीजी के विग्रह का प्राकट्योत्सव।
विरोध में तर्क
-राधारानी का प्राकट्य दिवस राधाष्टमी वाले दिन ही मनाया जाता है
- प्रस्तावित उत्सव वाले दिन किशोरी जू के अभिषेक के दर्शन नहीं कराए जाते
- महज मंदिर में भजन संध्या कराई जाती है
- छह जुलाई को नारायण दास जी (स्वामी जी) की जयंती मनाई जाती है
-प्राचीन परंपरा के अनुसार हलुवा, लोई का प्रसाद स्वामी जी को लगाया जाता है
6 माह पहले भी शुरू किया जा रहा था एक उत्सव
करीब 6 माह पूर्व भी एक सेवायत की ओर से ब्याहवला नामक एक नए उत्सव का आयोजन श्रीजी मंदिर में किया जाना था। जोर-शोर से कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार किया गया। लेकिन विरोध के चलते कार्यक्रम रद्द करना पड़ा।