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मथुरा: यमुना में बहते मिले नाले
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मथुरा। राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) की टीम ने सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता व पर्यावरणविद एमसी मेहता की मौजूदगी में शनिवार को मथुरा-वृंदावन में यमुना का हाल देखा। टीम को नदी में नाले प्रवाहित होते मिले। मसानी नाले में मोक्ष धाम के निकट पशुओं के शव भी दिखे। यमुना का यह हाल देखकर टीम के सदस्यों ने चिंता जाहिर की। विभिन्न स्थानों से नीरी की टीम ने यमुना में गिरते नाले और यमुना जल के नमूने भी लिए। टीम अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करेगी।
मथुरा-वृंदावन में यमुना को लेकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में कई याचिकाएं लंबित हैं। इसी प्रक्रिया में सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर नीरी के डायरेक्टर एसके गोयल, वैज्ञानिक डॉ. अरविंद शर्मा, एडवोकेट कात्यानी और सुप्रीम कोर्ट के न्याय मित्र एमसी मेहता मथुरा पहुंचे। यहां टीम ने याची गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी के साथ सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट(एसटीपी), सीवरेज पंपिंग स्टेशन (एसपीएस) का संचालन देखा। मसानी एसपीएस से यमुना में सीधे जा रहा नालों को देखा। मसानी के निचले हिस्से में नालों की कीचड़-गंदगी और पशुओं के शव मिले। यहां टीम ने यमुना जल और मसानी नाले के पानी के नमूने एकत्रित किए। मसानी स्थित मोक्षधाम को भी देखा।
वृंदावन में कोसी ड्रेन यमुना में गिरते हुए मिली। केसीघाट पर यमुना जल का नमूना भी लिया। यहां पिछले साल ही बनाया गया मोक्षधाम को देखा, जो बदहाल स्थिति में मिला। इसकी अधिकांश भट्टी काम नहीं कर रही थीं। गो कास्ट प्रोजेक्ट भी बंद था। इस पर निर्माण एजेंसी और संचालन कर्ताओं से भी इस विषय पर बात की। इस दौरान जल निगम और नगर निगम के अफसरों के साथ ही श्रीकृष्ण जन्मस्थान से जुड़े विजय बहादुर भी मौजूद रहे।
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मथुरा-वृंदावन में यमुना को लेकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में कई याचिकाएं लंबित हैं। इसी प्रक्रिया में सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर नीरी के डायरेक्टर एसके गोयल, वैज्ञानिक डॉ. अरविंद शर्मा, एडवोकेट कात्यानी और सुप्रीम कोर्ट के न्याय मित्र एमसी मेहता मथुरा पहुंचे। यहां टीम ने याची गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी के साथ सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट(एसटीपी), सीवरेज पंपिंग स्टेशन (एसपीएस) का संचालन देखा। मसानी एसपीएस से यमुना में सीधे जा रहा नालों को देखा। मसानी के निचले हिस्से में नालों की कीचड़-गंदगी और पशुओं के शव मिले। यहां टीम ने यमुना जल और मसानी नाले के पानी के नमूने एकत्रित किए। मसानी स्थित मोक्षधाम को भी देखा।
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वृंदावन में कोसी ड्रेन यमुना में गिरते हुए मिली। केसीघाट पर यमुना जल का नमूना भी लिया। यहां पिछले साल ही बनाया गया मोक्षधाम को देखा, जो बदहाल स्थिति में मिला। इसकी अधिकांश भट्टी काम नहीं कर रही थीं। गो कास्ट प्रोजेक्ट भी बंद था। इस पर निर्माण एजेंसी और संचालन कर्ताओं से भी इस विषय पर बात की। इस दौरान जल निगम और नगर निगम के अफसरों के साथ ही श्रीकृष्ण जन्मस्थान से जुड़े विजय बहादुर भी मौजूद रहे।
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