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अश्व प्रजाति के संरक्षण और चिकित्सा सेवाओं पर मंथन

Thu, 26 Feb 2015 12:07 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा Updated Thu, 26 Feb 2015 12:07 AM IST
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national seminar in vetrinari university
उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान मथुरा में अश्व प्रजाति पर एक दिवसीय नेशनल सेमिनार का आयोजन किया गया। शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ।
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सेमिनार में कुलपति प्रो. एसी वार्ष्णेय ने कहा कि देश में वर्तमान में 18 लाख अश्व प्रजाति के पशु मौजूद हैं, जिसकी संख्या पहले की अपेक्षा कम हो गई है। मशीनों के प्रयोग ने अश्वों की उपयोगिता को प्रभावित किया है। फिर भी ये विषम परिस्थितियों जैसे कि पहाड़ियों पर वर्तमान में भी सेना और निवासियों के लिए महत्वपूर्ण यातायात के साधन बने हुए हैं।
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आवश्यकता है कि इनकी वर्तमान में अधिक उपयोगी बनाने के लिए नई योजनाएं तैयार की जाएं। मुख्य अतिथि डा. सुरेश एस हन्नापगोल ने अश्व प्रजाति से जुड़े वर्तमान समय के बुनियादी ढांचे पर प्रकाश डाला। ब्रुक्स इंडिया के निदेशक रियर एडमिरल मल्होत्रा ने अश्वों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए सुझाव रखे। नेशनल एकेडमी ऑफ  वेटरिनरी साइंस का प्रतिनिधित्व कर रहे डा. लाल कृष्णा ने अश्व चिकित्सा के क्षेत्र में नवीन और कारगर नीतियों को लाने पर जोर डाला।
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आरवीसी के महानिदेशक ले. जनरल जगविंदर सिंह ने सेना में अश्वों का उपयोग, आवश्यकता और महत्व बताया। इस मौके पर डा. एसके गर्ग, डा. पीके शुक्ला, अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित डा. खरब अध्यक्ष राष्ट्रीय एनिमल वेलफेयर बोर्ड, विभिन्न प्रान्तों के पशुपालन विभाग और लाईव स्टॉक डेवलेपमेंट बोर्ड के उच्चाधिकारी मौजूद थे।
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