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Mathura News: नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की...
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मथुरा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर अजन्मे के जन्म के दर्शन की अभिलाषा लिए देश-विदेश से आए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही यूं लग रहा था मानों सभी गलियां श्रीकृष्ण जन्मस्थान की ओर जा रही थी। श्रीराधे-श्रीराधे रटते-रटते भक्त सिर पर सामान और गोद में छोटे बच्चों को लिए जन्मभूमि की ओर बढ़ रहे थे। कड़ी धूप में पसीने से लथपथ चेहरों पर प्रभु के दर्शन की अभिलाष इस कदर दमक रही थी कि उसके आगे तमाम मुश्किलें कुछ नहीं थी। जन्मभूमि के गेट संख्या एक पर सुबह से रात तक भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। घंटों प्रतीक्षा के बाद भागवत भवन में युगल सरकार श्रीराधाकृष्ण की छवि को निहार कर भक्त निहाल हो गए।
सुबह होते ही श्रीकृष्ण जन्मस्थान के गोविंद नगर द्वार पर भक्तों की कतार लगना शुरू हो गई थी। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, कतारें भी लंबी होती गईं। शाम को तो यह आलम यह था कि चंद कदमों की दूरी तय करने में ही 20-30 मिनट लगने लगे। हालत यह हो गई कि जिधर देखो उधर भक्तों की भीड़ थी। सूरज की किरणों का प्रकाश मंद पड़ते ही जन्स्थान भव्य रोशनी से दमक उठा। इसकी आभा दूर-दूर तक दिखाई दे रही थी। सुरक्षा जांच के बाद कड़ी मशक्कत के सात जन्मस्थान के अंदर पहुंचे भक्त मंदिर की भव्यता को देख मंत्रमुग्ध हो गए। अपार भीड़ के कारण भागवत भवन में पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी। यहां श्रीराधाकृष्ण युगल सरकार की छवि देखकर भक्त नतमस्तक होते हुए आगे बढ़ते रहे। सुबह से शुरु हुआ यह दौर मध्य रात के बाद 1.30 बजे तक अनवरत चलता रहा।
लीला मंचन और भजनों से बांधा समा
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पुष्पांजलि कार्यक्रम आयोजित हुआ। प्रातः मंगला आरती के बाद पंचामृत अभिषेक कर पुष्पार्चन किया गया। सुबह 9 बजे भागवत भवन स्थित श्रीराधाकृष्ण युगल सरकार के श्रीचरणों में पुष्प अपिर्तत किए। कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव कपिल शर्मा एवं प्रबंध समिति के सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने किया। लीलामंच पर उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के कलाकारों ने भजन-गायन और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का मंचन किय एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए। भजन गायक जगदीश ब्रजवासी एवं सहयोगी रसिक भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म एवं लीलाओं से जुडे़ भजनों में मंत्रमुग्ध कर दिया।
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सुबह होते ही श्रीकृष्ण जन्मस्थान के गोविंद नगर द्वार पर भक्तों की कतार लगना शुरू हो गई थी। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, कतारें भी लंबी होती गईं। शाम को तो यह आलम यह था कि चंद कदमों की दूरी तय करने में ही 20-30 मिनट लगने लगे। हालत यह हो गई कि जिधर देखो उधर भक्तों की भीड़ थी। सूरज की किरणों का प्रकाश मंद पड़ते ही जन्स्थान भव्य रोशनी से दमक उठा। इसकी आभा दूर-दूर तक दिखाई दे रही थी। सुरक्षा जांच के बाद कड़ी मशक्कत के सात जन्मस्थान के अंदर पहुंचे भक्त मंदिर की भव्यता को देख मंत्रमुग्ध हो गए। अपार भीड़ के कारण भागवत भवन में पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी। यहां श्रीराधाकृष्ण युगल सरकार की छवि देखकर भक्त नतमस्तक होते हुए आगे बढ़ते रहे। सुबह से शुरु हुआ यह दौर मध्य रात के बाद 1.30 बजे तक अनवरत चलता रहा।
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लीला मंचन और भजनों से बांधा समा
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पुष्पांजलि कार्यक्रम आयोजित हुआ। प्रातः मंगला आरती के बाद पंचामृत अभिषेक कर पुष्पार्चन किया गया। सुबह 9 बजे भागवत भवन स्थित श्रीराधाकृष्ण युगल सरकार के श्रीचरणों में पुष्प अपिर्तत किए। कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव कपिल शर्मा एवं प्रबंध समिति के सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने किया। लीलामंच पर उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के कलाकारों ने भजन-गायन और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का मंचन किय एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए। भजन गायक जगदीश ब्रजवासी एवं सहयोगी रसिक भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म एवं लीलाओं से जुडे़ भजनों में मंत्रमुग्ध कर दिया।
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