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पुण्य प्राप्ति के लिए प्रथम दान की होड़
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Fri, 15 Jan 2016 10:35 PM IST
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सूर्यनारायण के उत्तरायण होने का पर्व ‘मकर संक्रांति’ शुक्रवार को ब्रज में श्रद्धा के साथ मनाया गया। पवित्र यमुना के घाटों पर स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ रही।
विधि-विधान से पूजा अर्चना करने के बाद यहीं पर भक्तों ने दान का संकल्प लिया। विश्व के एकमात्र धर्मराज मंदिर में प्रथम दान देने की होड़ थी।
मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन देवता पृथ्वी पर आकर स्वयं दान ग्रहण करते हैं और दानियों को सौ गुना फल की प्राप्ति होती है।
इसी पुण्य की लालसा में संक्रांति के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भोर में ही यमुना में स्नान किया। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच दुग्धाभिषेक कर पूजा अर्चना की।
यहीं पर श्रद्धालुओं ने दान के लिए विधि-विधान से संकल्प लिया। यमुना के पवित्र विश्राम घाट स्थित धर्मराज और यमुनाजी के मंदिर में प्रथम दान देने की होड़ मच गई।
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इस दिन यहां काली छतरी और छड़ी का दान किया जाता है। इसके अलावा श्रद्धालुओं कंबल, शाल, तिल के लड्डू आदि दान देकर पुण्य अर्जित किया।
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विधि-विधान से पूजा अर्चना करने के बाद यहीं पर भक्तों ने दान का संकल्प लिया। विश्व के एकमात्र धर्मराज मंदिर में प्रथम दान देने की होड़ थी।
मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन देवता पृथ्वी पर आकर स्वयं दान ग्रहण करते हैं और दानियों को सौ गुना फल की प्राप्ति होती है।
इसी पुण्य की लालसा में संक्रांति के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भोर में ही यमुना में स्नान किया। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच दुग्धाभिषेक कर पूजा अर्चना की।
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यहीं पर श्रद्धालुओं ने दान के लिए विधि-विधान से संकल्प लिया। यमुना के पवित्र विश्राम घाट स्थित धर्मराज और यमुनाजी के मंदिर में प्रथम दान देने की होड़ मच गई।
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इस दिन यहां काली छतरी और छड़ी का दान किया जाता है। इसके अलावा श्रद्धालुओं कंबल, शाल, तिल के लड्डू आदि दान देकर पुण्य अर्जित किया।