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ऊर्ध्वकमल में प्रियाजी के साथ विराजे राधारमण लाल
ब्यूरो, अमर उजाला मथ़ुरा
Updated Fri, 02 Jan 2015 11:56 PM IST
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ठाकुर राधारमण मंदिर में चल रहे शीतकालीन निकुंज सेवा महोत्सव का शुक्रवार को समापन हो गया। इस अवसर पर ठाकुरजी ने प्रियाजी के साथ ऊर्ध्वकमल और कल्पवृक्ष की झांकी में भक्तों को दर्शन दिए।
भागवत वक्ता आचार्य वेणुगोपाल गोस्वामी ने श्रद्धालुओं को भागवतजी का रसपान कराया। शाम को ठाकुर राधारमण लाल ने भक्तों को विशेष और औलाई शृंगार में दर्शन दिए। राग सेवा करने आए भजन गायक गोविंद भार्गव ने दुर्लभ प्रस्तुति दी। इसे सुन ब्रज की प्राचीन नृत्य परंपरा पर श्रद्धालु मंदिर में देर तक थिरकते रहे। सेवायत अभिनव गोस्वामी ने पान का बीड़ा भेंट किया। शयन आरती सुवर्ण गोस्वामी ने उतारी।
सेवायत आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने बताया कि राधारमण लाल ने भक्तों को 34 दिन के महोत्सव में उन्हीं झांकियों में दर्शन दिए जिसमें ठाकुरजी भाव रूप में चैतन्य महाप्रभु के ब्रज भ्रमण के दौरान पधारे। ब्रज भ्रमण के बाद श्रीमन्महाप्रभु वृंदावन वापस आए हैं।
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उन्होंने झांकी के बारे में बताया कि वृंदावन चिन्मय भूमि है, इसकी जड़ें आकाश में हैं और शाखाएं और फूल भूमि में। इस स्थल को ऊर्ध्वकमल यानि उल्टा कमल भी कहा गया है। उस अष्टदलीय कमल वृंदावन धाम में प्रिया-प्रियतम विलास के बाद विश्राम करने हेतु पधारे हैं और सखी उनकी सेवा कर रही हैं।
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भागवत वक्ता आचार्य वेणुगोपाल गोस्वामी ने श्रद्धालुओं को भागवतजी का रसपान कराया। शाम को ठाकुर राधारमण लाल ने भक्तों को विशेष और औलाई शृंगार में दर्शन दिए। राग सेवा करने आए भजन गायक गोविंद भार्गव ने दुर्लभ प्रस्तुति दी। इसे सुन ब्रज की प्राचीन नृत्य परंपरा पर श्रद्धालु मंदिर में देर तक थिरकते रहे। सेवायत अभिनव गोस्वामी ने पान का बीड़ा भेंट किया। शयन आरती सुवर्ण गोस्वामी ने उतारी।
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सेवायत आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने बताया कि राधारमण लाल ने भक्तों को 34 दिन के महोत्सव में उन्हीं झांकियों में दर्शन दिए जिसमें ठाकुरजी भाव रूप में चैतन्य महाप्रभु के ब्रज भ्रमण के दौरान पधारे। ब्रज भ्रमण के बाद श्रीमन्महाप्रभु वृंदावन वापस आए हैं।
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उन्होंने झांकी के बारे में बताया कि वृंदावन चिन्मय भूमि है, इसकी जड़ें आकाश में हैं और शाखाएं और फूल भूमि में। इस स्थल को ऊर्ध्वकमल यानि उल्टा कमल भी कहा गया है। उस अष्टदलीय कमल वृंदावन धाम में प्रिया-प्रियतम विलास के बाद विश्राम करने हेतु पधारे हैं और सखी उनकी सेवा कर रही हैं।