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श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन : कारसेवा के लिए बना पांडव बल
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मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के लिए 6 दिसंबर को कारसेवा का शंखनाद करने के बाद चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद ने पांडव बल का गठन किया है। राधाकुंड के जुलैंदी स्थित चित्रगुप्त पीठ में बुधवार को कारसेवा के समर्थन में दिल्ली से आए सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में इसकी घोषणा की गई है। पांचों पांडव भाइयों के नाम पर गठित बल की कमान धर्मराज युधिष्ठिर के नाम पर बनाए गए धर्म बल के पास रहेगी।
पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने 9 अगस्त को चित्रगुप्त पीठ में साधु-संतों की मौजूदगी में हवन-पूजन कर 6 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर निर्माण के लिए कारसेवा का शंखनाद किया था। प्रस्तावित कारसेवा को देशभर से व्यापक समर्थन मिल रहा है। दिल्ली से मथुरा-वृंदावन स्थित चित्रगुप्त पीठ आश्रम पहुंचे सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारियों ने कारसेवा का समर्थन किया है। इस मौके पर बैठक कर आंदोलन को सफल बनाने के लिए महाभारत के पांच पांडवों की तर्ज पर पांच विशेष बलों का गठन किया गया है।
स्वामी सच्चिदानंद महाराज का कहना है कि जिस तरह महाभारत में संकट के समय भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों का सारथी बनकर मार्गदर्शन किया था, ठीक उसी तरह यह पांडव बल कारसेवा को संबल और दिशा प्रदान करेगा। युधिष्ठिर के नाम पर बना धर्म बल पूरे आंदोलन की आत्मा और मस्तिष्क होगा। इसमें साधु-संत, वरिष्ठ जन और सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी रहेंगे।
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धर्मराज युधिष्ठिर की तरह यह बल बाकी चारों बलों को सही दिशा, मार्गदर्शन और रणनीतिक निर्देश देगा। भीम बल में 35 से 45 वर्ष और उससे अधिक आयुवर्ग के लोगों को रखा गया है। अर्जुन बल में 25 से 35 वर्ष के युवाओं को रखा जाएगा। वहीं, नकुल एवं सहदेव बल में 19 से 25 वर्ष के युवाओं को शामिल किया जाएगा। चारों दिशाओं में बांटी गई भारत की कमान देशभर से कारसेवा में जुटने वाले समर्थकों के समन्वय के लिए भारत को चार भौगोलिक क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। पूर्वी भारत की कमान भीम बल के पास रहेगी, अर्जुन बल के पास पश्चिमी भारत, दक्षिण भारत को नकुल बल और उत्तर भारत की कमान सहदेव बल के पास रहेगी।
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पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने 9 अगस्त को चित्रगुप्त पीठ में साधु-संतों की मौजूदगी में हवन-पूजन कर 6 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर निर्माण के लिए कारसेवा का शंखनाद किया था। प्रस्तावित कारसेवा को देशभर से व्यापक समर्थन मिल रहा है। दिल्ली से मथुरा-वृंदावन स्थित चित्रगुप्त पीठ आश्रम पहुंचे सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारियों ने कारसेवा का समर्थन किया है। इस मौके पर बैठक कर आंदोलन को सफल बनाने के लिए महाभारत के पांच पांडवों की तर्ज पर पांच विशेष बलों का गठन किया गया है।
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स्वामी सच्चिदानंद महाराज का कहना है कि जिस तरह महाभारत में संकट के समय भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों का सारथी बनकर मार्गदर्शन किया था, ठीक उसी तरह यह पांडव बल कारसेवा को संबल और दिशा प्रदान करेगा। युधिष्ठिर के नाम पर बना धर्म बल पूरे आंदोलन की आत्मा और मस्तिष्क होगा। इसमें साधु-संत, वरिष्ठ जन और सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी रहेंगे।
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धर्मराज युधिष्ठिर की तरह यह बल बाकी चारों बलों को सही दिशा, मार्गदर्शन और रणनीतिक निर्देश देगा। भीम बल में 35 से 45 वर्ष और उससे अधिक आयुवर्ग के लोगों को रखा गया है। अर्जुन बल में 25 से 35 वर्ष के युवाओं को रखा जाएगा। वहीं, नकुल एवं सहदेव बल में 19 से 25 वर्ष के युवाओं को शामिल किया जाएगा। चारों दिशाओं में बांटी गई भारत की कमान देशभर से कारसेवा में जुटने वाले समर्थकों के समन्वय के लिए भारत को चार भौगोलिक क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। पूर्वी भारत की कमान भीम बल के पास रहेगी, अर्जुन बल के पास पश्चिमी भारत, दक्षिण भारत को नकुल बल और उत्तर भारत की कमान सहदेव बल के पास रहेगी।