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सत्याग्रह की अनुमति वाला पत्र गायब
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 27 Jun 2016 12:04 AM IST
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jawahar bagh
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मार्च, 2014 को रामवृक्ष एक यात्रा लेकर मथुरा पहुंचा था। उसने प्रशासन से जवाहर बाग में दो दिन के सत्याग्रह की अनुमति मांगी थी। वह जवाहर बाग में दाखिल भी हो गया। दो दिन के लिए आया रामवृक्ष ढाई साल तक इस बाग पर काबिज रहा।
लेकिन अब अफसरों ने अनुमति देने की बात से ही इंकार कर दिया है। अफसरों का कहना है कि सारे रिकार्ड खंगाल लिए। कहीं भी वह पत्र नहीं मिला है,जिस पर उसे सत्याग्रह की अनुमति दी गई थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कहीं बवाल बढ़ने पर उसे गायब तो नहीं कर दिया गया।
रामवृक्ष जब यात्रा लेकर मथुरा पहुंचा था तो उसके साथ करीब पांच सौ लोग थे। रामवृक्ष ने जवाहर बाग में दो दिन सत्याग्रह करने का हवाला देकर प्रशासन से अनुमति मांगी थी। दो जून को जवाहर बाग में हिंसा हुई तब भी सभी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी कह रहे थे कि उसे केवल दो दिन की अनुमति मिली थी लेकिन उसने बाग पर कब्जा कर लिया था।
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जबकि कई दफा नोटिस भेजे गए। जब मथुरा में प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी आए थे तब भी उन्होंने दो दिन की अनुमति का जिक्र किया था। लेकिन अब अधिकारियों ने साफ इंकार कर दिया है। सिटी मजिस्ट्रेट रामअरज यादव ने बताया कि उस वक्त वह तो नहीं थे लेकिन कलक्ट्रेट में पूरा रिकार्ड खंगाला लिया गया है।
2014 से 2016 तक कार्यक्रमों की अनुमति के जो भी पत्र आए सभी पढ़कर देखे गए, उनमें रामवृक्ष यादव का वह पत्र नहीं मिला है, जिस पर उसने जवाहर बाग में सत्याग्रह करने की अनुमति मांगी थी।
अफसर तब झूठ बोल रहे थे या अब
अब सवाल खड़ा हो रहा है कि अफसर तब झूठ बोल रहे थे या अब, न्यायिक आयोग की जांच शुरू होते ही अधिकारी बचाव की मुद्रा में नजर आने लगे हैं। घटना के साक्ष्यों के संबंध में भी विरोधाभास सामने आ रहा है। कोई कहता है कि अनुमति दी गई थी तो कोई इंकार कर देता है। यह भी हो सकता है कि कलक्ट्रेट से अनुमति वाला पत्र ही गायब कर दिया गया हो।
फिर तो अफसरों पर होना चाहिए बड़ा एक्शन
अब प्रशासन अनुमति देने से इंकार कर रहा है। इसका मतलब है कि रामवृक्ष गुंडई दिखाते हुए जवाहर बाग में घुसा था। इसके लिए तो पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। सरकारी संपत्ति की सुरक्षा का जिम्मा इन्हीं पर होता है।
कानून व्यवस्था संभालने वाले भी यही होते हैं। यहां तो डीएम और एसएसपी की बगल में इतना बड़ा कब्जा हो गया लेकिन इन लोगों को खबर तक नहीं लगी। होना तो यह चाहिए था कि अगले ही दिन इन लोगों को बाहर कर दिया जाता। अधिकारी फिर भी खामोश रहे।
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लेकिन अब अफसरों ने अनुमति देने की बात से ही इंकार कर दिया है। अफसरों का कहना है कि सारे रिकार्ड खंगाल लिए। कहीं भी वह पत्र नहीं मिला है,जिस पर उसे सत्याग्रह की अनुमति दी गई थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कहीं बवाल बढ़ने पर उसे गायब तो नहीं कर दिया गया।
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रामवृक्ष जब यात्रा लेकर मथुरा पहुंचा था तो उसके साथ करीब पांच सौ लोग थे। रामवृक्ष ने जवाहर बाग में दो दिन सत्याग्रह करने का हवाला देकर प्रशासन से अनुमति मांगी थी। दो जून को जवाहर बाग में हिंसा हुई तब भी सभी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी कह रहे थे कि उसे केवल दो दिन की अनुमति मिली थी लेकिन उसने बाग पर कब्जा कर लिया था।
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जबकि कई दफा नोटिस भेजे गए। जब मथुरा में प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी आए थे तब भी उन्होंने दो दिन की अनुमति का जिक्र किया था। लेकिन अब अधिकारियों ने साफ इंकार कर दिया है। सिटी मजिस्ट्रेट रामअरज यादव ने बताया कि उस वक्त वह तो नहीं थे लेकिन कलक्ट्रेट में पूरा रिकार्ड खंगाला लिया गया है।
2014 से 2016 तक कार्यक्रमों की अनुमति के जो भी पत्र आए सभी पढ़कर देखे गए, उनमें रामवृक्ष यादव का वह पत्र नहीं मिला है, जिस पर उसने जवाहर बाग में सत्याग्रह करने की अनुमति मांगी थी।
अफसर तब झूठ बोल रहे थे या अब
अब सवाल खड़ा हो रहा है कि अफसर तब झूठ बोल रहे थे या अब, न्यायिक आयोग की जांच शुरू होते ही अधिकारी बचाव की मुद्रा में नजर आने लगे हैं। घटना के साक्ष्यों के संबंध में भी विरोधाभास सामने आ रहा है। कोई कहता है कि अनुमति दी गई थी तो कोई इंकार कर देता है। यह भी हो सकता है कि कलक्ट्रेट से अनुमति वाला पत्र ही गायब कर दिया गया हो।
फिर तो अफसरों पर होना चाहिए बड़ा एक्शन
अब प्रशासन अनुमति देने से इंकार कर रहा है। इसका मतलब है कि रामवृक्ष गुंडई दिखाते हुए जवाहर बाग में घुसा था। इसके लिए तो पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। सरकारी संपत्ति की सुरक्षा का जिम्मा इन्हीं पर होता है।
कानून व्यवस्था संभालने वाले भी यही होते हैं। यहां तो डीएम और एसएसपी की बगल में इतना बड़ा कब्जा हो गया लेकिन इन लोगों को खबर तक नहीं लगी। होना तो यह चाहिए था कि अगले ही दिन इन लोगों को बाहर कर दिया जाता। अधिकारी फिर भी खामोश रहे।