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Mathura News: पटाखों से झुलसें तो पानी का नहीं करें इस्तेमाल
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- स्वास्थ्य विभाग ने दिवाली के मद्देनजर जारी की एडवाइजरी
- गर्भवती महिलाओं और बच्चों, वृद्धों को तेज धमाके वाले पटाखों से दूर रहने की सलाह
- अस्थमा रोगियों के लिए भी खतरनाक बताए गए पटाखे
संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा। दिवाली पर आतिशबाजी के दौरान अक्सर जलने के मामले सामने आते हैं। हालांकि झुलसे व्यक्ति को जितना जल्द संभव हो नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए, लेकिन घर पर भी प्राथमिक उपचार के साधन रखने चाहिए। कई बार जानकारी के अभाव में झुलसे व्यक्ति को उनके परिजन उपचार के नाम पर और पीड़ा पहुंचा देते हैं।
त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल अग्रवाल ने बताया कि आतिशबाजी से जलने के बाद हड़बड़ाए नहीं। बल्कि झुलसे स्थान पर एंटीबायोटिक क्रीम लगाएं। जले और झुलसे स्थान पर पानी नहीं डालें। पानी डालने से कुछ देर के लिए तो आराम मिल जाता है, लेकिन बाद में वह स्थान संक्रमित हो जाता है। जलन कम होने के बाद उसे तत्काल चिकित्सक के पास ले जाएं। झुलसने वाली महिला हैं तो उसकी चूड़ियां व अंगूठियों को तुरंत उतार दें। क्योंकि झुलसे या जले हुए स्थान पर सूजन आने के बाद उन्हें उतारना मुश्किल हो जाता है और मरीज को काफी कष्ट सहना पड़ता है। आतिशबाजी के दौरान आंख में चिंगारी या धुंआ चला जाए तो उसे रगड़ना नहीं चाहिए। आंख को भी तब तक पानी से धोना चाहिए जब तक कि जलन बंद न हो जाए। आतिशबाजी से निकलने वाला धुंआ काफी हानिकारक होता है। इससे आंखों की रोशनी तक जा सकती है। इसलिए इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।
एसीएमओ डॉ. भूदेव सिंह ने बताया कि हृदय रोगियों को तेज आवाज करने वाली आतिशबाजी-पटाखों से दूर रहना चाहिए। इसके साथ ही जिनको अस्थमा और एलर्जी है उन्हें आतिशबाजी के धुंए से दूर रहना चाहिए। उन्हें मास्क का प्रयोग करना चाहिए। ताकि सांस के माध्यम से उनके फेफड़ों में धुंआ प्रवेश न कर पाएं। यदि उन्होंने धुंए से परहेज नहीं किया तो अस्थमा का अटैक भी पड़ सकता है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. वर्षा तिवारी ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को तेज धमाके वाले पटाखों से दूर रहना चाहिए। तेज आवाज और आतिशबाजी का धुंआ गर्भवती महिला और उसके गर्भ में पल रहे शिशु में विकार पैदा कर सकता है।
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सीएचसी और पीएचसी पर व्यवस्थाएं दुरुस्त
दिवाली पर ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित सीएचसी में 24 घंटे आपातकालीन व्यवस्था रहेगी। इसके साथ ही पीएचसी पर 108 एंबुलेंस और चिकित्सक मौजूद रहेंगे। सीएमओ डॉ. एके वर्मा ने बताया कि सभी सीएचसी और पीएचसी प्रभारियों को निर्देशित किया जा चुका है कि दिवाली पर आतिशबाजी के कारण कोई झुलसा हुआ मरीज आए तो उसका तुरंत उपचार स्थानीय स्तर पर करें। गंभीर हालत में हैं तो उसे एबुलेंस से जिला अस्पताल रेफर करें।
आतिशबाजी के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
आतिशबाजी करते समय चिगारियां छोड़ने वाले पटाखों के पास नहीं जाना चाहिए।
- जूते पहनकर ही आतिशबाजी जलाएं, पटाखा न चले तो उस पर पानी या मिट्टी डालें, छोटे बच्चों व बुजुर्गो का भी ख्याल रखें।
- आतिशबाजी खुले मैदान में ही जलाएं। रॉकेट छोड़ने के लिए हमेशा बोतल का प्रयोग करें।
- पटाखे जलाते समय सूती कपड़े ही पहनने चाहिए।
- पटाखे जलाने के दौरान पानी के साथ ही बालू-मिट्टी का इंतजाम करें। पटाखों में आग दूर से ही लगाएं।
- आतिशबाजी जलाते समय बच्चों पर नजर रखें। आतिशबाजी रखने के लिए अच्छी और सुरक्षित स्थान चुनें।
- गर्भवती महिलाओं और बच्चों, वृद्धों को तेज धमाके वाले पटाखों से दूर रहने की सलाह
- अस्थमा रोगियों के लिए भी खतरनाक बताए गए पटाखे
संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा। दिवाली पर आतिशबाजी के दौरान अक्सर जलने के मामले सामने आते हैं। हालांकि झुलसे व्यक्ति को जितना जल्द संभव हो नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए, लेकिन घर पर भी प्राथमिक उपचार के साधन रखने चाहिए। कई बार जानकारी के अभाव में झुलसे व्यक्ति को उनके परिजन उपचार के नाम पर और पीड़ा पहुंचा देते हैं।
त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल अग्रवाल ने बताया कि आतिशबाजी से जलने के बाद हड़बड़ाए नहीं। बल्कि झुलसे स्थान पर एंटीबायोटिक क्रीम लगाएं। जले और झुलसे स्थान पर पानी नहीं डालें। पानी डालने से कुछ देर के लिए तो आराम मिल जाता है, लेकिन बाद में वह स्थान संक्रमित हो जाता है। जलन कम होने के बाद उसे तत्काल चिकित्सक के पास ले जाएं। झुलसने वाली महिला हैं तो उसकी चूड़ियां व अंगूठियों को तुरंत उतार दें। क्योंकि झुलसे या जले हुए स्थान पर सूजन आने के बाद उन्हें उतारना मुश्किल हो जाता है और मरीज को काफी कष्ट सहना पड़ता है। आतिशबाजी के दौरान आंख में चिंगारी या धुंआ चला जाए तो उसे रगड़ना नहीं चाहिए। आंख को भी तब तक पानी से धोना चाहिए जब तक कि जलन बंद न हो जाए। आतिशबाजी से निकलने वाला धुंआ काफी हानिकारक होता है। इससे आंखों की रोशनी तक जा सकती है। इसलिए इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।
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एसीएमओ डॉ. भूदेव सिंह ने बताया कि हृदय रोगियों को तेज आवाज करने वाली आतिशबाजी-पटाखों से दूर रहना चाहिए। इसके साथ ही जिनको अस्थमा और एलर्जी है उन्हें आतिशबाजी के धुंए से दूर रहना चाहिए। उन्हें मास्क का प्रयोग करना चाहिए। ताकि सांस के माध्यम से उनके फेफड़ों में धुंआ प्रवेश न कर पाएं। यदि उन्होंने धुंए से परहेज नहीं किया तो अस्थमा का अटैक भी पड़ सकता है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. वर्षा तिवारी ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को तेज धमाके वाले पटाखों से दूर रहना चाहिए। तेज आवाज और आतिशबाजी का धुंआ गर्भवती महिला और उसके गर्भ में पल रहे शिशु में विकार पैदा कर सकता है।
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सीएचसी और पीएचसी पर व्यवस्थाएं दुरुस्त
दिवाली पर ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित सीएचसी में 24 घंटे आपातकालीन व्यवस्था रहेगी। इसके साथ ही पीएचसी पर 108 एंबुलेंस और चिकित्सक मौजूद रहेंगे। सीएमओ डॉ. एके वर्मा ने बताया कि सभी सीएचसी और पीएचसी प्रभारियों को निर्देशित किया जा चुका है कि दिवाली पर आतिशबाजी के कारण कोई झुलसा हुआ मरीज आए तो उसका तुरंत उपचार स्थानीय स्तर पर करें। गंभीर हालत में हैं तो उसे एबुलेंस से जिला अस्पताल रेफर करें।
आतिशबाजी के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
आतिशबाजी करते समय चिगारियां छोड़ने वाले पटाखों के पास नहीं जाना चाहिए।
- जूते पहनकर ही आतिशबाजी जलाएं, पटाखा न चले तो उस पर पानी या मिट्टी डालें, छोटे बच्चों व बुजुर्गो का भी ख्याल रखें।
- आतिशबाजी खुले मैदान में ही जलाएं। रॉकेट छोड़ने के लिए हमेशा बोतल का प्रयोग करें।
- पटाखे जलाते समय सूती कपड़े ही पहनने चाहिए।
- पटाखे जलाने के दौरान पानी के साथ ही बालू-मिट्टी का इंतजाम करें। पटाखों में आग दूर से ही लगाएं।
- आतिशबाजी जलाते समय बच्चों पर नजर रखें। आतिशबाजी रखने के लिए अच्छी और सुरक्षित स्थान चुनें।