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Mathura News: कुछ बिंदुओं पर हो जाता बेहतर काम, तो टॉप-10 में होता मथुरा का नाम
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मथुरा। कुछ बिंदुओं पर और बेहतर काम हो जाता तो स्वच्छ सर्वेक्षण की रैंकिंग में मथुरा का नाम टॉप-10 में शामिल होने की राह आसान हो जाती। हालांकि बीते वर्षों की तुलना में नगर निगम की कार्यप्रणाली में काफी सुधार हुआ है। इसका परिणाम स्वच्छ सर्वेक्षण की रैंकिंग में देखने को भी मिला है। रैंकिंग में 11वां स्थान आने पर महापौर समेत नगर निगम के आला अधिकारी उत्साहित हैं, लेकिन टॉप-10 में जगह बनाने का मलाल भी है।
साफ-सफाई में नहीं हुआ ढंग से काम
भारत सरकार द्वारा जारी स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 की रिपोर्ट दर्शाती है कि मथुरा-वृंदावन के नाले-नालियों की साफ-सफाई के लिए बेहतर ढंग से इंतजाम नहीं किए गए। कूड़े से अटे पड़े नाले-नालियां हल्की बारिश में उफन जाती हैं। फिर गंदा पानी सड़कों और घरों में घुसता है। इससे राहगीरों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यही कारण रहा कि नाले-नालियों की साफ-सफाई की व्यवस्था ठीक ढंग से न होने पर रैंकिंग में 67 अंक प्राप्त हुए हैं। सूखा कूड़ा और गीला कूड़ा को अलग करने में भी थोड़ा पिछड़े हैं। इसमें हमें 77 नंबर मिले हैं। इन दो बिंदुओं पर थोड़ा पिछड़ने का नगर निगम के अधिकारियों को मलाल है।
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साफ-सफाई में नहीं हुआ ढंग से काम
भारत सरकार द्वारा जारी स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 की रिपोर्ट दर्शाती है कि मथुरा-वृंदावन के नाले-नालियों की साफ-सफाई के लिए बेहतर ढंग से इंतजाम नहीं किए गए। कूड़े से अटे पड़े नाले-नालियां हल्की बारिश में उफन जाती हैं। फिर गंदा पानी सड़कों और घरों में घुसता है। इससे राहगीरों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यही कारण रहा कि नाले-नालियों की साफ-सफाई की व्यवस्था ठीक ढंग से न होने पर रैंकिंग में 67 अंक प्राप्त हुए हैं। सूखा कूड़ा और गीला कूड़ा को अलग करने में भी थोड़ा पिछड़े हैं। इसमें हमें 77 नंबर मिले हैं। इन दो बिंदुओं पर थोड़ा पिछड़ने का नगर निगम के अधिकारियों को मलाल है।
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