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Mathura News: सैकड़ों मीट्रिक टन ज्यादा उर्वरक की हुई खरीदारी, फिर भी मांग जारी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 30 Jul 2025 12:59 AM IST
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Hundreds of metric tons more fertilizers were purchased, yet the demand continues
सिसाैदिया खाद भंडार पर निरीक्षण करते जिला कृषि अधिकारी।
मथुरा। खरीफ सीजन में उर्वरक की मारामारी कम नहीं हो रही है। किसान उर्वरक के लिए समितियों पर चक्कर काट रहे हैं। वहीं दूसरी ओर पिछली साल की तुलना में इस साल अब तक 7182 मीट्रिक टन यूरिया और 2792 मीट्रिक टन डीएपी की ज्यादा खरीद हो चुकी है। ऐसे में कृषि विभाग के अधिकारी यूरिया और डीएपी की कालाबाजारी की आशंका से भी इंकार नहीं कर रहे हैं।
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कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दुकानों के साथ ही ज्यादा खाद लेने वाले किसानों की भी पड़ताल की जाएगी। किसान इतनी यूरिया और डीएपी खरीदकर ले कहां जा रहे हैं, इसका पता लगाने के लिए अब विभागीय अधिकारी जुटेंगे। हैरत की बात यह है कि इतनी ज्यादा खरीदी होने के बाद भी किसानों में उर्वरक की मांग लगातार बनी हुई है। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि फसलों के लिए उर्वरक किसानों को आधार कार्ड के जरिए पॉश मशीन से दी जाती है, लेकिन कई दुकानदार बिना इस प्रक्रिया के ही किसानों को खाद बिक्री कर रहे हैं।
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किसान उर्वरक का भंडारण करने में जुटे

कृषि विभाग के अधिकारियों ने कहा कि कई किसान अभी से ही यूरिया और डीएपी को एकत्रित करने में जुट गए हैं। जबकि किसानों को समय से उर्वरक उपलब्ध होगी। कई दुकानदारों ने बिना खतौनी देखे किसानों को उर्वरक का वितरण कर दिया है। ऐसे दुकानदारों को चिन्हित किया जा रहा है। जिले में 720 से अधिक दुकानों का संचालन हो रहा है।
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दो लाख हेक्टेयर में है इस साल पैदावार

जिले के दस ब्लॉकों में इस समय खरीफ सीजन की फसल खेतों में खड़ी हुई है। इस बार 2 लाख हेक्टेयर में किसानों ने फसल उगाई है। इसमें धान 1.03 लाख हेक्टेयर, बाजरा 61 हजार हेक्टेयर, अरहर 2200 हेक्टेयर, मक्का 26 हेक्टेयर, कपास 11 हजार हेक्टेयर, तिल 330 हेक्टेयर, मूंग 225 हेक्टेयर समेत अन्य फसलें भी हुई हैं।



दो साल के आंकड़े
उर्वरक 2024 2025
डीएपी 6442 9234
यूरिया 17859 25041



खरीफ सीजन में पिछली की तुलना में इस साल अभी से ही उर्वरक की ज्यादा बिक्री हो गई है। इसका पता लगाया जाएगा कि किसान उर्वरक का प्रयोग किस जगह कर रहे हैं।
- आवेश कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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