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होली के रंग में सराबोर हुई धर्म नगरी
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Wed, 23 Mar 2016 12:08 AM IST
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मथुरा में होली
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धर्मनगरी होली के रंगों में सराबोर हो गई है। नगर के मठ, मंदिर, कुंज गलियों और आश्रमों में रंग और गुलाल उड़ाया जा रहा है। रंगभरनी एकादशी से शुरू हुआ होली का आनंद अपने चरम पर पहुंच रहा है। बांके बिहारी मंदिर में मंगलवार को सुबह और शाम को रंग बरसा। सेवायतों ने मंदिर में स्वर्ण-रजत पिचकारियों से भक्तों पर रंग डाला। मंदिर प्रांगण बांके बिहारी लाल के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। नगर के ठाकुर राधा बल्लभ मंदिर में होली महोत्सव में जमकर रंग बरसा।
आश्रम गोदा बिहार में हुरंगा
वृंदावन। आश्रम गोदा बिहार में ठाकुर राधा बिहारीजी महाराज के प्रांगण में सोमवार की शाम फाग महोत्सव के अंतर्गत हुरंगे का आयोजन हुआ। महिला एवं बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। सजी-धजी गोपिकाओं ने हुरियारों के साथ लठामार होली खेली। इसके बाद ठाकुरजी ने भक्तों के साथ फूलों की होली भी खेली गई। महंत स्वामी रंगनाथाचार्य ने प्रसाद वितरित किया। नारायणाचार्य, अनंताचार्य, द्वारिका प्रसाद तायल, मुकुंद उपाध्याय, घनश्याम तायल, रामकुमार गुप्ता, डा. योगेश कुमार गुप्ता, अशोक गोयल आदि उपस्थित रहे।
‘जीवन को रंगों से सजाने का पर्व होली’
वृंदावन। श्रीजी पुरम कालोनी स्थित वेदांत आश्रम पर त्रिदिवसीय होली महोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार को फूलों की होली एवं संत सम्मान समारोह हुआ। महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज ने अध्यक्षता की।
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स्वामी डा. रामकमल दास वेंदाती ने कहा कि होली पर्व सबके जीवन को रंगों से सजाने के साथ सुगंधित करने का पर्व है। भागवताचार्य आचार्य रामविलास चतुर्वेदी ने कहा कि ब्रज की होली प्रिया-प्रियतम की अंतरंग लीला का परिदृश्य है। महंत नरहरि दास, महंत बालकदास, सर्वेश्वर शरण, सियावल्लभ शरण, धनुषधारी दास, उमेशदास, स्वामी राघवदास, रामानुजदास आदि उपस्थित रहे।
दाऊजी मंदिर में महारास
बलदेव। दाऊजी मंदिर में सभी पर फाग का रंग चढ़ा है। यहां महारास हर किसी में जोश, उत्साह और उमंग भर रहा है। होली गीतों की धुन पर लहंगा, फरिया पहन कर नृत्य कर रही महिलाएं बलदेव-कृष्ण का आह्वान करते हुए महारास में भाग ले रही हैं। हमारौ दाऊ बड़ौ रसीलौ होली पै खेलै हुरंगा..., मेरे नैनन में श्याम समाय गयौ.., ऐसौ चटक रंग डार्यौ, ब्रज मच्यौ आनंद जो कहु कह्यौ न जाइ, खेलत बलभद्र होली हुरंगा।
होली गीत कानों में मिश्री सी घोल रहे हैं। सुबह समाज गायन में टेसू के रंग और गुलाल की वर्षा की जा रही हैं। 25 मार्च को विश्व प्रसिद्ध हुरंगा का आयोजन होगा। महारास को हुरंगा का रिहर्सल माना जा रहा है।
अनेकता में एकता की पहचान है बलदेव की होली
बलदेव। ब्रजराज दाऊजी महाराज की नगरी बलदेव की होली अनेकता में एकता की पहचान है। पूरे नगर की होली एक ही स्थान पर जलाई जाती है। नगरवासी यहीं होली पूजन करते हैं। महिलाएं प्रात: सज-धजकर लहंगा फरिया और आभूषण पहनकर गीत गाती हुई होली पूजने जाती हैं। पुरुष शाम को होली का पूजन करते हैं।
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आश्रम गोदा बिहार में हुरंगा
वृंदावन। आश्रम गोदा बिहार में ठाकुर राधा बिहारीजी महाराज के प्रांगण में सोमवार की शाम फाग महोत्सव के अंतर्गत हुरंगे का आयोजन हुआ। महिला एवं बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। सजी-धजी गोपिकाओं ने हुरियारों के साथ लठामार होली खेली। इसके बाद ठाकुरजी ने भक्तों के साथ फूलों की होली भी खेली गई। महंत स्वामी रंगनाथाचार्य ने प्रसाद वितरित किया। नारायणाचार्य, अनंताचार्य, द्वारिका प्रसाद तायल, मुकुंद उपाध्याय, घनश्याम तायल, रामकुमार गुप्ता, डा. योगेश कुमार गुप्ता, अशोक गोयल आदि उपस्थित रहे।
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‘जीवन को रंगों से सजाने का पर्व होली’
वृंदावन। श्रीजी पुरम कालोनी स्थित वेदांत आश्रम पर त्रिदिवसीय होली महोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार को फूलों की होली एवं संत सम्मान समारोह हुआ। महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज ने अध्यक्षता की।
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स्वामी डा. रामकमल दास वेंदाती ने कहा कि होली पर्व सबके जीवन को रंगों से सजाने के साथ सुगंधित करने का पर्व है। भागवताचार्य आचार्य रामविलास चतुर्वेदी ने कहा कि ब्रज की होली प्रिया-प्रियतम की अंतरंग लीला का परिदृश्य है। महंत नरहरि दास, महंत बालकदास, सर्वेश्वर शरण, सियावल्लभ शरण, धनुषधारी दास, उमेशदास, स्वामी राघवदास, रामानुजदास आदि उपस्थित रहे।
दाऊजी मंदिर में महारास
बलदेव। दाऊजी मंदिर में सभी पर फाग का रंग चढ़ा है। यहां महारास हर किसी में जोश, उत्साह और उमंग भर रहा है। होली गीतों की धुन पर लहंगा, फरिया पहन कर नृत्य कर रही महिलाएं बलदेव-कृष्ण का आह्वान करते हुए महारास में भाग ले रही हैं। हमारौ दाऊ बड़ौ रसीलौ होली पै खेलै हुरंगा..., मेरे नैनन में श्याम समाय गयौ.., ऐसौ चटक रंग डार्यौ, ब्रज मच्यौ आनंद जो कहु कह्यौ न जाइ, खेलत बलभद्र होली हुरंगा।
होली गीत कानों में मिश्री सी घोल रहे हैं। सुबह समाज गायन में टेसू के रंग और गुलाल की वर्षा की जा रही हैं। 25 मार्च को विश्व प्रसिद्ध हुरंगा का आयोजन होगा। महारास को हुरंगा का रिहर्सल माना जा रहा है।
अनेकता में एकता की पहचान है बलदेव की होली
बलदेव। ब्रजराज दाऊजी महाराज की नगरी बलदेव की होली अनेकता में एकता की पहचान है। पूरे नगर की होली एक ही स्थान पर जलाई जाती है। नगरवासी यहीं होली पूजन करते हैं। महिलाएं प्रात: सज-धजकर लहंगा फरिया और आभूषण पहनकर गीत गाती हुई होली पूजने जाती हैं। पुरुष शाम को होली का पूजन करते हैं।