{"_id":"56ed601a4f1c1b7e628b4bf7","slug":"holi-cellibration-in-bankebihari-temple","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रिया-प्रियतम ने भक्तों संग खेली होली ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रिया-प्रियतम ने भक्तों संग खेली होली
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 20 Mar 2016 12:04 AM IST
विज्ञापन
बांकेबिहारी मंदिर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रंगभरनी एकादशी पर धर्मनगरी में होली का उल्लास छा गया। अपराह्न राधावल्लभ घेरा से बग्गी में सवार होकर भगवान प्रिया-प्रियतम के प्रतीकात्मक स्वरूपों ने भक्तों के साथ गुलाल से होली खेली।
प्रिया-प्रियतम गुलाल उड़ा रहे थे और सवारी के आगे आगे श्रद्धालु रसिक महानुभाव होली के रसिया गाते, ढोल-नगाड़े की थाप पर नृत्य करते चल रहे थे। सवारी ठाकुर राधावल्लभ मंदिर से प्रारंभ होकर विभिन्न मार्गों से होते हुए मंदिर परिसर में आकर समाप्त हुई।
राधाबल्लभ घेरा से निकलने वाली इस पारंपरिक सवारी के साथ ही नगर में होली की शुरुआत हो गई। राधावल्लभीय वैष्णव महासभा के पदाधिकारी यादवेंद्र वल्लभ गोस्वामी और योगेंद्र वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि प्रतिवर्ष निकलने वाली इस सवारी की परंपरा सैकड़ों वर्ष पुरानी है।
विज्ञापन
सांझ ढलते ही वृंदावन की कुंज गलियों में भगवान श्रीकृष्ण गोपियों के साथ होली खेलते थे। उसी के प्रतीकात्मक रूप में यह सवारी निकाली जाती हैै। राधावल्लभ मंदिर में शाम को राधाबल्लभ लाल का ब्याहुला उत्सव मनाया गया। इसी के साथ नगर के बांकेबिहारी, राधाबल्लभ, राधारमण, भट्ट जी, यशोदानंदन, राधादामोदर और श्याम सुंदर आदि मंदिरों में होली का शुभारंभ हो गया।
सवारी के बाद ही खेला जाता है रंग
वृंदावन। प्रिया वल्लभ कुंज के सेवाधिकारी विष्णु मोहन नागार्च ने बताया कि मान्यता है कि जब तक ठाकुर राधावल्लभ लाल की सवारी नहीं निकल जाती, तब तक अन्य मंदिरों में गुलाल तो डाला जाता है, लेकिन रंग नहीं पड़ता। टेसू के उबले फूलों से तैयार रंग की केसरिया पिचकारियां रंगभरनी एकादशी की सवारी के बाद ही शुभारंभ होती है।
विज्ञापन
प्रिया-प्रियतम गुलाल उड़ा रहे थे और सवारी के आगे आगे श्रद्धालु रसिक महानुभाव होली के रसिया गाते, ढोल-नगाड़े की थाप पर नृत्य करते चल रहे थे। सवारी ठाकुर राधावल्लभ मंदिर से प्रारंभ होकर विभिन्न मार्गों से होते हुए मंदिर परिसर में आकर समाप्त हुई।
विज्ञापन
राधाबल्लभ घेरा से निकलने वाली इस पारंपरिक सवारी के साथ ही नगर में होली की शुरुआत हो गई। राधावल्लभीय वैष्णव महासभा के पदाधिकारी यादवेंद्र वल्लभ गोस्वामी और योगेंद्र वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि प्रतिवर्ष निकलने वाली इस सवारी की परंपरा सैकड़ों वर्ष पुरानी है।
विज्ञापन
सांझ ढलते ही वृंदावन की कुंज गलियों में भगवान श्रीकृष्ण गोपियों के साथ होली खेलते थे। उसी के प्रतीकात्मक रूप में यह सवारी निकाली जाती हैै। राधावल्लभ मंदिर में शाम को राधाबल्लभ लाल का ब्याहुला उत्सव मनाया गया। इसी के साथ नगर के बांकेबिहारी, राधाबल्लभ, राधारमण, भट्ट जी, यशोदानंदन, राधादामोदर और श्याम सुंदर आदि मंदिरों में होली का शुभारंभ हो गया।
सवारी के बाद ही खेला जाता है रंग
वृंदावन। प्रिया वल्लभ कुंज के सेवाधिकारी विष्णु मोहन नागार्च ने बताया कि मान्यता है कि जब तक ठाकुर राधावल्लभ लाल की सवारी नहीं निकल जाती, तब तक अन्य मंदिरों में गुलाल तो डाला जाता है, लेकिन रंग नहीं पड़ता। टेसू के उबले फूलों से तैयार रंग की केसरिया पिचकारियां रंगभरनी एकादशी की सवारी के बाद ही शुभारंभ होती है।