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Lord Krishna Public School: अदालत ने कहा- पहले बताओ स्कूल की मान्यता वैध है या नहीं, सीबीएसई से जवाब-तलब
Mon, 13 Apr 2026 09:52 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 13 Apr 2026 09:52 AM IST
सार
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कथित फर्जी मान्यता के मामले में सख्ती दिखाते हुए सीबीएसई से विस्तृत जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को होगी, जिसमें स्कूल की वैधता पर अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
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सरकारी स्कूल(सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लॉर्ड कृष्णा पब्लिक स्कूल की कथित फर्जी मान्यता के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सीबीएसई से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। यह आदेश रिट याचिका संख्या 13244/2026 (प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स अवेयरनेस बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य) में न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने पारित किया।
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इस मामले से अवगत कराने के लिए पापा संस्था ने रविवार को संजय प्लेस स्थित कार्यालय में प्रेस वार्ता की। पापा संस्था के संस्थापक याचिकाकर्ता दीपक सरीन ने बताया कि 26 मार्च को इस मामले की याचिका डाली थी। इसकी सुनवाई 7 अप्रैल को हुई। कोर्ट ने साफ किया कि सबसे पहले यह तय किया जाएगा कि संबंधित विद्यालय के पास वैध मान्यता है या नहीं। अदालत ने सीबीएसई को शपथपत्र दाखिल कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। बिंदुवार स्पष्टीकरण भी मांगा है।
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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ताओं ने मामले को जनहित से जुड़ा बताया। प्रतिवादी पक्ष ने याचिका की ग्राह्यता पर सवाल उठाए। याचिका में आरोप है कि विद्यालय संचालित करने वाली सोसाइटी का पंजीकरण 2011 में निरस्त हो गया था, इसके बावजूद 2012 में मान्यता दी गई। साथ ही 2015 में भूमि विक्रय, 2018 में ट्रस्ट गठन और 2023 के न्यायिक आदेशों के बाद भी विद्यालय की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।
29 को अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल, 2026 को होगी, जिसे कोर्ट ने टॉप-20 मामलों में शामिल किया है। दीपक सरीन ने इसे छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए अभिभावकों से स्कूल में प्रवेश से पहले मान्यता की जांच करने की अपील की है।
मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल, 2026 को होगी, जिसे कोर्ट ने टॉप-20 मामलों में शामिल किया है। दीपक सरीन ने इसे छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए अभिभावकों से स्कूल में प्रवेश से पहले मान्यता की जांच करने की अपील की है।