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दूसरी बार जलती होली से निकलेंगे हीरालाल

Wed, 23 Mar 2016 12:12 AM IST
नवीन गोयल
नवीन गोयल Updated Wed, 23 Mar 2016 12:12 AM IST
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heralal panda in kosikalan
दूसरी बार जलती होली से निकलेंगे हीरालाल - फोटो : अमर उजाला
ब्रजभूमि के गांव फालैन में एक बार फिर हीरालाल पंडा भक्त प्रह्लाद की लीला को जीवंत करेंगे। कोसीकलां से सात किलोमीटर दूर स्थित गांव में गुरुवार तड़के चार बजे जलती होली के बीच से निकलने की लीला दोहराई जाएगी। कौशिक परिवार के सदस्य हीरालाल दूसरी बार जलती होली से गुजरेंगे। परंपरा के अनुसार फाल्गुन शुक्ल एकादशी से वह अन्न का त्याग करके पूजा पर बैठे हैं।
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फालैन स्थित मंदिर और कुंड के निर्माण की कहानी अनोखी है। गोपालजी मंदिर के संत बालकदास  बताते हैं कि एक समय आसपास के गांवों के निवासी यहां गाय चराने आते थे। गांव के निकट ही एक साधु तप किया करते थे। एक रात साधु को स्वप्न में डूंगर के पेड़ के नीचे एक मूर्ति दबी दिखाई दी। उनके बताने पर गांव के कौशिक परिवार के लोगों ने खोदाई कराई। खोदाई में यहं भगवान नृसिंह और भक्त प्रहलाद की प्रतिमा निकलीं।
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इस पर साधु ने कौशिक परिवार के लोगों को आशीर्वाद दिया कि इस परिवार का जो व्यक्ति शुद्ध मन से पूजा करके धधकती होलिका से गुजरेगा तो उसके शरीर पर प्रहलाद की तरह आग की लपटों का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके बाद श्रद्धालुओं ने मूर्ति वाले स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर के समीप ही प्रहलाद कुंड है।
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फालैन में भक्त प्रह्लाद की होलिका दहन से जीवित निकलने की लीला के आयोजन की परंपरा है। इस लीला को साकार करने के लिए आसपास के पांच गांवों की होली एक साथ रखी जाती है। इस होली का आकार काफी बड़ा होता है और दहन से पहले सभी गांवों के लोग नृत्य करते, ढोल मजीरा बजाते, गुलाल अबीर की बरसात करते हुए प्रहलाद मंदिर पर पहुंचते हैं। मंदिर पर पूजा अर्चना और कुंड में आचमन करने के बाद 30 फुट व्यास की होली को अंतिम रूप दिया जाता है। इसकी ऊंचाई  10 से 15 फुट होती है।


ये निभा चुके हैं परंपरा
फालैन के हरिश्चंद निराला ने बताया कि अब तक कौशिक परिवार के अमृतलाल, कुंवरपाल, लटूर पंडा, श्रीचंद, टोकी, इंद्रजीत, बलराम, बाबूलाल धधकते अंगारों से निकलने की परंपरा निभा चुके हैं। एक बार मेले की माला लटूर पंडा ने ली थी लेकिन अंगारों से निकलने की मना करने पर टोकी पंडा ने परंपरा निभाई।
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