{"_id":"5876777f4f1c1b7840ba7f45","slug":"harm-effect-of-cold-at-cropes","type":"story","status":"publish","title_hn":"पाले से मुरझाने लगी आलू, सरसों की फसल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पाले से मुरझाने लगी आलू, सरसों की फसल
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Wed, 11 Jan 2017 11:50 PM IST
विज्ञापन
सुबह रास्ताों पर जमा पाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंगलवार की रात कड़ाके की ठंड के साथ गिरे पाले से आलू और सरसों की फसल मुरझाने लगी है। किसानों का कहना है कि इससे बड़ा नुकसान होगा। अचानक बदले मौसम और फसलों पर जमे पाले से सबसे अधिक नुकसान आलू और सरसों की फसल को बताया जा रहा है।
बलदेव, राया, फरह के किसान 18,000 हेक्टेयर इलाके में आलू करते हैं। अन्य ब्लाकों में गेहूं के साथ सरसों की जाती है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी डा यतेंद्र सिंह ने बताया कि ज्यादातर किसानों की फसल 60 से 70 दिन की हो चुकी है।
पाले से आलू और सरसों को बचाने के लिए किसान फसलों की सिंचाई करें। साथ ही आधा किलो सल्फर 80 प्रतिशत को 400 लीटर पानी में घोलकर एक हेक्टेयर में स्प्रे करें। इसके अलावा किसान आलू को फुलाने और मोटा करने के प्रयास में जाइम आदि न दें। इससे आलू फट सकता है।
विज्ञापन
पाले से नहीं मिलता पौधे को भोजन
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि पाला गिरने से पौधे के तने व पत्ते की कोशिकाआें के छिद्र रुक जाते हैं और पौधे को भोजन मिलने की प्रक्रिया रुक जाती है। इससे पौधा मर जाता है।
विज्ञापन
बलदेव, राया, फरह के किसान 18,000 हेक्टेयर इलाके में आलू करते हैं। अन्य ब्लाकों में गेहूं के साथ सरसों की जाती है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी डा यतेंद्र सिंह ने बताया कि ज्यादातर किसानों की फसल 60 से 70 दिन की हो चुकी है।
विज्ञापन
पाले से आलू और सरसों को बचाने के लिए किसान फसलों की सिंचाई करें। साथ ही आधा किलो सल्फर 80 प्रतिशत को 400 लीटर पानी में घोलकर एक हेक्टेयर में स्प्रे करें। इसके अलावा किसान आलू को फुलाने और मोटा करने के प्रयास में जाइम आदि न दें। इससे आलू फट सकता है।
विज्ञापन
पाले से नहीं मिलता पौधे को भोजन
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि पाला गिरने से पौधे के तने व पत्ते की कोशिकाआें के छिद्र रुक जाते हैं और पौधे को भोजन मिलने की प्रक्रिया रुक जाती है। इससे पौधा मर जाता है।