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Mathura News: जांच के लिए आई सिंचाई विभाग की टीम के साथ जाना हेमेंद्र गर्ग को पड़ा भारी
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मथुरा। प्लॉट के विवाद में जांच करने गई सिंचाई विभाग की टीम के साथ जाना व्यापारी नेता हेमेंद्र गर्ग के लिए भारी पड़ गया। उनके प्लॉट पर जाने से ही यादव बंधु बौखला गए थे। इसके बाद ही उन्होंने खोखा संचालक को उनका जल्द से जल्द इंतजाम करने के लिए कहा था। जांच टीम पहुंचने के साढ़े सात घंटे बाद ही हेमेंद्र को आरोपियों ने मौत के घाट उतार दिया।
यादव बंधु द्वारा मोक्षधाम के पास स्थित प्लॉट पर दुकानों का निर्माण किया जा रहा था। वहीं हेमेंद्र गर्ग अवैध निर्माण बताते हुए प्रशासन और सिंचाई विभाग में शिकायतें कर रहे थे। इससे यादव बंधु पहले से ही उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रच रहे थे। 23 अप्रैल को दोपहर ढाई बजे के करीब सिंचाई विभाग की एक टीम मौके पर जांच करने पहुंची थी। उनके साथ हेमेंद्र गर्ग भी गए थे।
इसकी जानकारी दोनों यादव भाइयों को उनके ठेकेदार संजू ने फोन कर दी थी। इसके बाद ही यादव बंधु बौखला गए थे। वह बस किसी तरह हेमेंद्र को रास्ते से हटाना चाहते थे। इसी को लेकर उन्होंने खोखा संचालक राकेश जोशी को फोन कर कहा था कि आखिर कब तक वह हेमेंद्र का इंतजाम करेगा। इसके साढ़े सात घंटे बाद ही रात 10 बजे के करीब राकेश जोशी ने एक अन्य आरोपी के साथ मिलकर हेमेंद्र को मौत के घाट उतार दिया।
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खोखे का नहीं लेते थे किराया, राकेश नहीं लेता था चौकीदारी
यादव बंधुओं के प्लॉट के सामने ही राकेश जोशी का खोखा रखा था। इसके लिए उससे कोई किराया वसूल नहीं किया जाता था। इसके एवज में राकेश निर्माणधीन दुकानों पर चौकीदारी करता था। वह भी कोई रुपया नहीं लेता था। धीरे-धीरे वह यादव बंधुओं के करीब होता चला गया। यहां तक कि निर्माण के लिए आने वाले सामान का लेखा-जोखा भी वही रखता था।
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यादव बंधु द्वारा मोक्षधाम के पास स्थित प्लॉट पर दुकानों का निर्माण किया जा रहा था। वहीं हेमेंद्र गर्ग अवैध निर्माण बताते हुए प्रशासन और सिंचाई विभाग में शिकायतें कर रहे थे। इससे यादव बंधु पहले से ही उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रच रहे थे। 23 अप्रैल को दोपहर ढाई बजे के करीब सिंचाई विभाग की एक टीम मौके पर जांच करने पहुंची थी। उनके साथ हेमेंद्र गर्ग भी गए थे।
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इसकी जानकारी दोनों यादव भाइयों को उनके ठेकेदार संजू ने फोन कर दी थी। इसके बाद ही यादव बंधु बौखला गए थे। वह बस किसी तरह हेमेंद्र को रास्ते से हटाना चाहते थे। इसी को लेकर उन्होंने खोखा संचालक राकेश जोशी को फोन कर कहा था कि आखिर कब तक वह हेमेंद्र का इंतजाम करेगा। इसके साढ़े सात घंटे बाद ही रात 10 बजे के करीब राकेश जोशी ने एक अन्य आरोपी के साथ मिलकर हेमेंद्र को मौत के घाट उतार दिया।
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खोखे का नहीं लेते थे किराया, राकेश नहीं लेता था चौकीदारी
यादव बंधुओं के प्लॉट के सामने ही राकेश जोशी का खोखा रखा था। इसके लिए उससे कोई किराया वसूल नहीं किया जाता था। इसके एवज में राकेश निर्माणधीन दुकानों पर चौकीदारी करता था। वह भी कोई रुपया नहीं लेता था। धीरे-धीरे वह यादव बंधुओं के करीब होता चला गया। यहां तक कि निर्माण के लिए आने वाले सामान का लेखा-जोखा भी वही रखता था।