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Mathura News: संत प्रेमानंद के शिष्यों की फाइनल दीक्षा पर रोक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 01 Oct 2026 12:27 AM IST
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Final initiation of Saint Premanand's disciples halted
वृंदावन। संत प्रेमानंद के शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद आश्रमों में हलचल मची हुई है। इसके बाद संत प्रेमानंद के शिष्यों की फाइनल दीक्षा और समय-समय पर शिष्यों के दर्शन पर भी अनिश्चितकाल के लिए रोक लगा दी है। इतना ही नहीं अब वृंदावनवास कर रहे दीक्षा पा चुके शिष्यों के लिए नियम कड़े कर दिए हैं। ड्रेस कोड में भी बदलाव किया गया है। फाइनल दीक्षा और उपस्थिति पर लगी रोक एवं संत दर्शन न मिलने से विभिन्न शहरों से आ रहे श्रद्धालु निराश होकर लौट रहे हैं।
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वराह घाट क्षेत्र स्थित जिस भवन में संत प्रेमानंद के शिष्यजन रह रहे हैं, उसकी चौथी मंजिल से गिरकर संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई। आश्रम की व्यवस्था में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। इसे लेकर सोशल मीडिया पर ब्रज संत महिमा के प्लेटफार्म पर पोस्ट डालकर जानकारी साझा की है। हालांकि इसे श्रीहित केलिकुंज आश्रम की अधिकृत पोस्ट नहीं बताया है। लेकिन इसमें दी कुछ बातों की पुष्टि की है।
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केलिकुंज के पूछताछ केंद्र पर तैनात सेवक ने बताया कि जहां संत द्वारा दी जाने वाली फाइनल दीक्षा देने एवं एक निश्चित पर श्रद्धालुओं की होने वाली उपस्थिति पर भी अनिश्चितकाल के लिए रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध एक अक्तूबर से लागू किया जाएगा। संत आश्रम के साधक की संदिग्ध परिस्थिति में मौत के मामले में लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी वजह से नकारात्मक टिप्पणी भी देखने को मिल रही हैं। इसे देखते हुए विशेष रूप से वृंदावनवास कर रहे दीक्षित शिष्यों के पहनावे और मर्यादा संबंधी नियमों में बदलाव किया गया है, जिसमें अब शिष्य पीले और सफेद रंग की पहनावा न पहनकर आमजन जैसे वस्त्रों में रहेंगे। सिर्फ साधक और संत के निजी सेवक ही सफेद और पीले रंग के कपड़ों में रहेंगे। संत फिलहाल मांट के बेलवन स्थित आश्रम में एकातंवास में हैं।
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बदला ड्रेस कोड, मायूस होकर लौटे श्रद्धालु
संत प्रेमानंद के शिष्य की मौत के बाद रमणरेती स्थित उनके आश्रम श्रीहित राधा केलि कुंज में श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आई है। शिष्यों के ड्रेस कोड में किए गए बदलाव का असर भी बुधवार को देखने मिला। वृंदावनवास कर रहे संत के शिष्य मुख पर तिलक एवं ब्रजरज लगाकर प्रतिदिन की तरह आश्रम जाते दिखे, उनका पहनावा पीले और सफेद रंग का न होकर सामान्य श्रद्धालुओं की तरह रंगीन कपड़ों में देखने को मिला। वहीं संत के सेवक पुराने ड्रेस कोड सफेद रंग का घुटनों तक अगोछा और शरीर के ऊपरी हिस्से पर बनियान एवं पीले रंग की लोई ओढ़े देखे गए। इधर फाइनल दीक्षा और उपस्थिति में अनिश्चितकाल तक प्रतिबंध लगने से श्रद्धालु मायूस होकर लौट रहे हैं। राजस्थान हनुमान गढ़ से आए सुबोध कुमार ने बताया कि वह संत दर्शन के लिए आए थे, लेकिन किन्ही कारण दर्शन नहीं हो पा पाए हैं। अयोध्या से आए अरुण कुमार आश्रम के बाहर नामजप करते दिखे। उन्होंने बताया कि बुधवार को दीक्षा से पहले उनकी उपस्थिति होनी थी, लेकिन उपस्थिति बंद हो जाने के कारण वह अब वापस मंदिरों में दर्शन करने के बाद बृहस्पतिवार सुबह जाएंगे।
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