{"_id":"582373cd4f1c1b7304b37277","slug":"fight-for-change-money","type":"story","status":"publish","title_hn":"खुले रुपये हों तभी बैठना बस में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खुले रुपये हों तभी बैठना बस में
अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 10 Nov 2016 12:36 AM IST
विज्ञापन
खुले रुपये हों तभी बस में बैठना
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नया बस स्टैंड से भरतपुर जाने वाली बस के कंडक्टर ने एलान कर दिया कि अगर खुले रुपये हों तभी बस में बैठना। 1000 और 500 रुपये का नोट नहीं चल पाएगा। कुछ यात्रियों ने कहा भी कि उनके पास तो 500 रुपये का ही नोट है लेकिन परिचालक ने बैठाने से साफ इंकार कर दिया। कुछ यात्रियों ने हंगामा किया लेकिन रोडवेज ने 1000 और 500 के नोट को प्रतिबंधित करने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया। कोसीकलां से आगरा के लिए रोडवेज बस में बैठे रामस्वरूप के पास 100 रुपये के नोट नहीं थे। 500 रुपये का नोट परिचालक को दिया तो उसने लेने से मना कर दिया।
पूरे 500 रुपये का डलवाना पड़ा पेट्रोल
पेट्रोल पंपों पर भी खूब अफरातफरी रही। पेट्रोल पंप वालों ने 500 और 1000 रुपये का नोट लेने से इंकार कर दिया था। हां इतना जरूर किया कि अगर किसी के 500 रुपये का नोट चलवाना है तो वह पूरे का पेट्रोल या डीजल डलवाए। इसे लेकर पेट्रोल पंपों पर खासा हंगामा रहा। कई जगह तो पंप वालों के साथ नोकझोंक भी हो गई थी। कुछ पंपों पर हंगामों की सूचना पाकर पुलिस भी पहुंच गई थी।
सब्जी चाहिए तो 100 का नोट लाइए
लोगों ने 1000 और 500 रुपये का नोट चलाने के लिए हर संभव जतन किया। सुबह से ही शुरूआत कर दी गई थी। किसी ने दूध वाले को कई महीने का एडवांस देने की बात कही तो किसी ने सब्जी वाले को 500 रुपये का नोट थमा दिया लेकिन सभी ने इंकार कर दिया। सब्जी वालों ने तो बड़ा नोट लिया ही नहीं। साफ साफ कह दिया था कि अगर 100 और 50 का नोट हो तभी सब्जी लीजिए।
विज्ञापन
पापा ये नोट बदलकर दो
बच्चों ने भी अपनी गुल्लक तोड़ डाली थी। जिसकी गुल्लक में भी पापा के द्वारा दिए गए 500 के नोट थे वह सुबह ही पापा से नोट बदलवाने को कहने लगे। हालांकि पापा ने बच्चों को समझाने की लाख कोशिश की मगर वह बार बार टीवी पर आने वाली सूचनाओं का जिक्र करते हुए नोट बदलने की जिद करते रहे।
बंद रहे कई मेडिकल स्टोर
खुले नोट के फेर में हर तरफ हल्ला रहा। शहर के कई मेडिकल स्टोर तो बंद हो गए थे। जो मेडिकल स्टोर रात को नौ बजे तक खुलते थे वह दोपहर को तीन बजे ही चले गए। दरअसल जो भी दवाई लेने के लिए आ रहा था वह एक हजार और पांच सौ का ही नोट दे रहा था। जिससे भी मेडिकल स्टोर वाले खुले रुपये मांगते, वही इंकार कर देता था। लिहाजा मेडिकल स्टोर वालों ने दुकान बंद करना ही उचित समझा।
नोटों के चक्कर में पुलिस चकरघिन्नी
500 और 1000 रुपये के नोटों की बंदी के एलान के बाद से लेकर बुधवार की रात तक पुलिस चकरघिन्नी बनी रही। पेट्रोल पंपों पर रात से ही पुलिस बल मुस्तैद करना पड़ा। एसपी सिटी अशोेक कुमार सिंह ने बताया कि मंगलवार से पेट्रोल पंपों की सुरक्षा बढ़ाई गई। यहां झगड़े का अंदेशा होना प्रतीत हो रहा था। बुधवार को इन पेट्रोल पंपों पर पुलिसबल तैनात किया गया।
टिकट विंडो पर होती रही तूतू-मैंमैं
जंक्शन और छावनी रेलवे स्टेशन पर विंडो पर लगे यात्रियों के हाथों में भी 500 और 1000 रुपये के ही नोट दिखाई दिए। इसके चलते टिकट क्लर्क से यात्रियों की तूतू-मैंमैं होती रही। क्लर्क ने खुले रुपये न होने की विवशता जताई। यात्री 11 नवंबर तक रेलवे स्टेशन पर 500 और 1000 रुपए के नोट लिए जाने संबंधी आदेश बताते हुए लड़ाई कर रहे थे। स्टेशन पर खानपान की स्टॉल्स पर भी कमोबेश यही हाल रहा। यात्री खाने-पीने का सामान खरीदने के दौरान 500 और 1000 रुपये का ही नोट दे रहे थे। इसके चलते स्टॉल संचालकों से भी चिकचिक होती रही। दिल्ली निवासी योगेश शर्मा ने बताया कि वे खाने-पीने की चीज 1000 रुपये का नोट होने की वजह से नहीं खरीद पा रहे हैं। पीएम ने मंगलवार रात में स्पष्ट किया था कि रेलवे स्टेशनों पर 11 नवंबर की रात्रि तक 500 और 1000 रुपये के नोट स्वीकार किए जाएंगे।
भटकते रहे ग्राहक
एडवोकट रामपाल सिंह भात लेकर जाने के लिए दो हजार के छोटे नोटों का जुगाड़ करते नजर आए लेकिन कई दुकानें खंगालने के बाद भी महज एक हजार रुपये की ही व्यवस्था हुई। देव फर्नीचर के मालिक देवेंद्र शर्मा दिन निकलते ही इस बात से परेशान थे कि शादी के लिए फर्नीचर बुक कराने वाला ग्राहक सुबह ही बडे़ नोट लेकर सामान पैक कराने आ गया। अब बडे़ नोटों को बैंक में बदलवाने के लिए एक आदमी और लगाना पडे़गा।
विज्ञापन
पूरे 500 रुपये का डलवाना पड़ा पेट्रोल
पेट्रोल पंपों पर भी खूब अफरातफरी रही। पेट्रोल पंप वालों ने 500 और 1000 रुपये का नोट लेने से इंकार कर दिया था। हां इतना जरूर किया कि अगर किसी के 500 रुपये का नोट चलवाना है तो वह पूरे का पेट्रोल या डीजल डलवाए। इसे लेकर पेट्रोल पंपों पर खासा हंगामा रहा। कई जगह तो पंप वालों के साथ नोकझोंक भी हो गई थी। कुछ पंपों पर हंगामों की सूचना पाकर पुलिस भी पहुंच गई थी।
विज्ञापन
सब्जी चाहिए तो 100 का नोट लाइए
लोगों ने 1000 और 500 रुपये का नोट चलाने के लिए हर संभव जतन किया। सुबह से ही शुरूआत कर दी गई थी। किसी ने दूध वाले को कई महीने का एडवांस देने की बात कही तो किसी ने सब्जी वाले को 500 रुपये का नोट थमा दिया लेकिन सभी ने इंकार कर दिया। सब्जी वालों ने तो बड़ा नोट लिया ही नहीं। साफ साफ कह दिया था कि अगर 100 और 50 का नोट हो तभी सब्जी लीजिए।
विज्ञापन
पापा ये नोट बदलकर दो
बच्चों ने भी अपनी गुल्लक तोड़ डाली थी। जिसकी गुल्लक में भी पापा के द्वारा दिए गए 500 के नोट थे वह सुबह ही पापा से नोट बदलवाने को कहने लगे। हालांकि पापा ने बच्चों को समझाने की लाख कोशिश की मगर वह बार बार टीवी पर आने वाली सूचनाओं का जिक्र करते हुए नोट बदलने की जिद करते रहे।
बंद रहे कई मेडिकल स्टोर
खुले नोट के फेर में हर तरफ हल्ला रहा। शहर के कई मेडिकल स्टोर तो बंद हो गए थे। जो मेडिकल स्टोर रात को नौ बजे तक खुलते थे वह दोपहर को तीन बजे ही चले गए। दरअसल जो भी दवाई लेने के लिए आ रहा था वह एक हजार और पांच सौ का ही नोट दे रहा था। जिससे भी मेडिकल स्टोर वाले खुले रुपये मांगते, वही इंकार कर देता था। लिहाजा मेडिकल स्टोर वालों ने दुकान बंद करना ही उचित समझा।
नोटों के चक्कर में पुलिस चकरघिन्नी
500 और 1000 रुपये के नोटों की बंदी के एलान के बाद से लेकर बुधवार की रात तक पुलिस चकरघिन्नी बनी रही। पेट्रोल पंपों पर रात से ही पुलिस बल मुस्तैद करना पड़ा। एसपी सिटी अशोेक कुमार सिंह ने बताया कि मंगलवार से पेट्रोल पंपों की सुरक्षा बढ़ाई गई। यहां झगड़े का अंदेशा होना प्रतीत हो रहा था। बुधवार को इन पेट्रोल पंपों पर पुलिसबल तैनात किया गया।
टिकट विंडो पर होती रही तूतू-मैंमैं
जंक्शन और छावनी रेलवे स्टेशन पर विंडो पर लगे यात्रियों के हाथों में भी 500 और 1000 रुपये के ही नोट दिखाई दिए। इसके चलते टिकट क्लर्क से यात्रियों की तूतू-मैंमैं होती रही। क्लर्क ने खुले रुपये न होने की विवशता जताई। यात्री 11 नवंबर तक रेलवे स्टेशन पर 500 और 1000 रुपए के नोट लिए जाने संबंधी आदेश बताते हुए लड़ाई कर रहे थे। स्टेशन पर खानपान की स्टॉल्स पर भी कमोबेश यही हाल रहा। यात्री खाने-पीने का सामान खरीदने के दौरान 500 और 1000 रुपये का ही नोट दे रहे थे। इसके चलते स्टॉल संचालकों से भी चिकचिक होती रही। दिल्ली निवासी योगेश शर्मा ने बताया कि वे खाने-पीने की चीज 1000 रुपये का नोट होने की वजह से नहीं खरीद पा रहे हैं। पीएम ने मंगलवार रात में स्पष्ट किया था कि रेलवे स्टेशनों पर 11 नवंबर की रात्रि तक 500 और 1000 रुपये के नोट स्वीकार किए जाएंगे।
भटकते रहे ग्राहक
एडवोकट रामपाल सिंह भात लेकर जाने के लिए दो हजार के छोटे नोटों का जुगाड़ करते नजर आए लेकिन कई दुकानें खंगालने के बाद भी महज एक हजार रुपये की ही व्यवस्था हुई। देव फर्नीचर के मालिक देवेंद्र शर्मा दिन निकलते ही इस बात से परेशान थे कि शादी के लिए फर्नीचर बुक कराने वाला ग्राहक सुबह ही बडे़ नोट लेकर सामान पैक कराने आ गया। अब बडे़ नोटों को बैंक में बदलवाने के लिए एक आदमी और लगाना पडे़गा।