{"_id":"6abd5e709fb1261ef10d5245","slug":"entry-prohibited-for-outsiders-mathura-news-c-29-1-mtr1025-615864-2026-10-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mathura News: बाहरी लोगों के प्रवेश पर पाबंदी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mathura News: बाहरी लोगों के प्रवेश पर पाबंदी
विज्ञापन
मथुरा। वृंदावन के वराह घाट मार्ग स्थित गऊ कृपा कुंज आश्रम की चौथी मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या करने वाले 25 वर्षीय दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारीशरण की मौत की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, आश्रम की आंतरिक व्यवस्था पुलिस के लिए नए सवाल खड़े कर रही है। पुलिस अब सिर्फ मौत के घटनाक्रम और दीपक के मोबाइल की कॉल डिटेल तक सीमित नहीं है, बल्कि आश्रम में रहने वाले साधकों की दिनचर्या, बाहरी दुनिया से उनके संपर्क और अंदर की व्यवस्थाओं को भी जांच के दायरे में ले रही है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आश्रम की व्यवस्था काफी हद तक अत्याधुनिक तकनीक और अंदरूनी सिस्टम के सहारे संचालित होती है। यहां रहने वाले लोगों के बाहर से संपर्क को लेकर भी सख्त व्यवस्था होने की जानकारी पुलिस को मिली है। बताया जा रहा है कि दीक्षा लेने के बाद कई लोगों के निजी मोबाइल फोन जमा करा लिए जाते हैं। कुछ मामलों में मोबाइल फोन उनके परिचितों या परिवार वालों को वापस कर दिए जाते हैं। इसके बाद आश्रम की व्यवस्था देख रहे लोगों की ओर से उन्हें मोबाइल और सिम उपलब्ध कराया जाता है।
जांच में यह भी जानकारी सामने आई है कि समय-समय पर इन मोबाइल फोन की जांच की जाती है। यह देखा जाता है कि आश्रम में रहने वाला व्यक्ति निर्धारित संपर्क व्यवस्था के अलावा किसी अन्य व्यक्ति से तो बातचीत नहीं कर रहा। पुलिस अब इस व्यवस्था और दीपक के मोबाइल रिकॉर्ड के बीच भी कड़ी तलाश रही है। दीपक वर्ष 2025 में जबलपुर से वृंदावन आए थे और दीक्षा लेने के बाद आश्रम की व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहे थे।
विज्ञापन
आश्रम की सफाई भी अंदर वालों के हाथ
जांच में सामने आया है कि आश्रम में सफाईकर्मी तक को अंदर प्रवेश नहीं दिया जाता। बिजली मैकेनिक से लेकर सफाई और रोजमर्रा के काम आश्रम में रह रहे लोग ही करते हैं। किसी काम की जरूरत होने पर साधक सीधे बाहर के व्यक्ति से संपर्क नहीं करते, बल्कि आश्रम में व्यवस्था संभालने वाले लोगों को इसकी जानकारी देते हैं। इसके बाद वही लोग बाहर से संबंधित व्यक्ति को बुलाने या काम कराने की व्यवस्था करते हैं।
यानी आश्रम की चाहरदीवारी के भीतर कौन आ रहा है, किससे संपर्क हो रहा है और किस काम के लिए बाहरी व्यक्ति से संपर्क किया जा रहा है, इसकी एक निर्धारित कड़ी है। पुलिस इसी व्यवस्था को अब दीपक की मौत के घटनाक्रम से जोड़कर देख रही है।
-- -- -- -
दो घंटे बाद पुलिस को मिली थी सूचना
25 सितंबर को सुबह करीब 10:30 बजे दीपक चौथी मंजिल से नीचे गिरे थे। आश्रम के अन्य साधक उन्हें अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस को घटना की जानकारी करीब दो घंटे बाद दोपहर 12:30 बजे अस्पताल से मिली। जांच के दौरान दीपक का प्राइवेट पार्ट कटा मिलने से पुलिस का शक गहराया। कमरे से संबंधित सामग्री और सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की गई। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे परिजनों ने साजिश की आशंका जताते हुए पुलिस अधिकारियों को प्रार्थनापत्र दिया था।
-- -- -
जांच के लिए भेजा मोबाइल
पुलिस सीसीटीवी और आश्रम में रहने वाले लोगों से पूछताछ कर रही है। दीपक का मोबाइल भी जांच के लिए भेजा है। जांच में सामने आया है कि आश्रम में बाहरी लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित है। सफाई से लेकर सभी व्यवस्थाएं आश्रम में रहने वाले लोग ही करते हैं। पुलिस फाॅरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद घटना से पर्दा हटने की संभावना है। - श्लाेक कुमार, एसएसपी
विज्ञापन
पुलिस जांच में सामने आया है कि आश्रम की व्यवस्था काफी हद तक अत्याधुनिक तकनीक और अंदरूनी सिस्टम के सहारे संचालित होती है। यहां रहने वाले लोगों के बाहर से संपर्क को लेकर भी सख्त व्यवस्था होने की जानकारी पुलिस को मिली है। बताया जा रहा है कि दीक्षा लेने के बाद कई लोगों के निजी मोबाइल फोन जमा करा लिए जाते हैं। कुछ मामलों में मोबाइल फोन उनके परिचितों या परिवार वालों को वापस कर दिए जाते हैं। इसके बाद आश्रम की व्यवस्था देख रहे लोगों की ओर से उन्हें मोबाइल और सिम उपलब्ध कराया जाता है।
विज्ञापन
जांच में यह भी जानकारी सामने आई है कि समय-समय पर इन मोबाइल फोन की जांच की जाती है। यह देखा जाता है कि आश्रम में रहने वाला व्यक्ति निर्धारित संपर्क व्यवस्था के अलावा किसी अन्य व्यक्ति से तो बातचीत नहीं कर रहा। पुलिस अब इस व्यवस्था और दीपक के मोबाइल रिकॉर्ड के बीच भी कड़ी तलाश रही है। दीपक वर्ष 2025 में जबलपुर से वृंदावन आए थे और दीक्षा लेने के बाद आश्रम की व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहे थे।
विज्ञापन
आश्रम की सफाई भी अंदर वालों के हाथ
जांच में सामने आया है कि आश्रम में सफाईकर्मी तक को अंदर प्रवेश नहीं दिया जाता। बिजली मैकेनिक से लेकर सफाई और रोजमर्रा के काम आश्रम में रह रहे लोग ही करते हैं। किसी काम की जरूरत होने पर साधक सीधे बाहर के व्यक्ति से संपर्क नहीं करते, बल्कि आश्रम में व्यवस्था संभालने वाले लोगों को इसकी जानकारी देते हैं। इसके बाद वही लोग बाहर से संबंधित व्यक्ति को बुलाने या काम कराने की व्यवस्था करते हैं।
यानी आश्रम की चाहरदीवारी के भीतर कौन आ रहा है, किससे संपर्क हो रहा है और किस काम के लिए बाहरी व्यक्ति से संपर्क किया जा रहा है, इसकी एक निर्धारित कड़ी है। पुलिस इसी व्यवस्था को अब दीपक की मौत के घटनाक्रम से जोड़कर देख रही है।
दो घंटे बाद पुलिस को मिली थी सूचना
25 सितंबर को सुबह करीब 10:30 बजे दीपक चौथी मंजिल से नीचे गिरे थे। आश्रम के अन्य साधक उन्हें अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस को घटना की जानकारी करीब दो घंटे बाद दोपहर 12:30 बजे अस्पताल से मिली। जांच के दौरान दीपक का प्राइवेट पार्ट कटा मिलने से पुलिस का शक गहराया। कमरे से संबंधित सामग्री और सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की गई। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे परिजनों ने साजिश की आशंका जताते हुए पुलिस अधिकारियों को प्रार्थनापत्र दिया था।
जांच के लिए भेजा मोबाइल
पुलिस सीसीटीवी और आश्रम में रहने वाले लोगों से पूछताछ कर रही है। दीपक का मोबाइल भी जांच के लिए भेजा है। जांच में सामने आया है कि आश्रम में बाहरी लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित है। सफाई से लेकर सभी व्यवस्थाएं आश्रम में रहने वाले लोग ही करते हैं। पुलिस फाॅरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद घटना से पर्दा हटने की संभावना है। - श्लाेक कुमार, एसएसपी