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100 हाथ से कमाओ, 1000 से दान करो : कैलाश सत्यार्थी
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कल्याण करोति नेत्र संस्थान के शुभारंभ पर बच्चे को चश्मा देते मुख्य अतिथि व अन्य
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गोवर्धन। मथुरा-गोवर्धन मार्ग पर नवनिर्मित कल्याणं करोति नेत्र संस्थान का शुभारंभ बुधवार को गणेश प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप जलाकर किया गया। इस दौरान 11 बच्चों को चश्मे बांटे गए।
मुख्य अतिथि नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि शास्त्रों में उल्लेख है कि 100 हाथों से कमाओ और हजार हाथ से दान करो। सात करोड़ लोग नेत्र हीन हैं। इनमें से 80 फीसदी को भी उपचार मिला होता तो वे भी दुनिया देख पाते। इस नेत्र संस्थान से लाखों लोग लाभान्वित होंगे।
संत गोविंदानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि किसी के जीवन में रोशनी भरने के समान कोई पुण्य नहीं होता। संत कौशल किशोर महाराज ने कहा कि शास्त्रों में परोपकार को सबसे बड़ा पुण्य कहा गया है। महेशानंद सरस्वती ने कहा कि संस्थान से किसी भी रूप में जुड़ा व्यक्ति पुण्य का भागी है।
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जीएलए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल, जमुना लाल बजाज फाउंडेशन के चेयरमैन शेखर बजाज, बीएचयू के पूर्व कुलाधिपति गिरीश त्रिपाठी ने भी नेत्र संस्थान से लाखों लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद जताई। फैमिली फाउंडेशन, यूएसए के रमेश गनात्रा, रमेश उमा गनात्रा ने कहा कि संस्थान के समर्पण भाव ने यहां आकर सहयोग करने के लिए विवश कर दिया।
एसएसपी/डीआईजी शैलेश कुमार पांडेय ने कहा कि प्रकृति का आनंद बगैर नेत्रों के नहीं लिया जा सकता है। संचालन सचिव सुनील कुमार शर्मा ने किया। संस्थाध्यक्ष बाबा बलराम दास, विधायक ठा. मेघश्याम सिंह, ओम प्रकाश धानुका, नयन दलाल यूएसए, अदिश जैन यूएसए, उमाकांत अग्रवाल, धनेश मित्तल, कल्याण दास अग्रवाल, दीनानाथ अग्रवाल, बीड़ी अग्रवाल, राधेश्याम सिंघल आदि मौजूद रहे।
हम सब जानते हैं कि आंखें केवल देखने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह हमारे सपनों, आशाओं, और भविष्य की खिड़की हैं। जब कोई व्यक्ति अपनी दृष्टि खोता है, तो वह केवल रोशनी ही नहीं खोता, बल्कि अपने सपनों को भी धुंधला होते देखता है। इस संस्थान के माध्यम से हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि लाखों लोगों के जीवन में फिर से रोशनी लौट सके। -मुरली कृष्ण मूर्ति, चेयरमैन, शंकरा आई फाउंडेशन यूएसए
कल्याणं करोति नेत्र संस्थान न केवल आधुनिक चिकित्सा तकनीकों का केंद्र होगा, बल्कि यह सेवा, करुणा और मानवता का प्रतीक बनेगा। यहां आने वाले हर मरीज को न केवल चिकित्सा मिलेगी, बल्कि उसे यह विश्वास भी मिलेगा कि वह अकेला नहीं है। संस्थान उन गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए वरदान साबित होगा, जिनके पास इलाज के साधन नहीं हैं। - नारायणदास अग्रवाल, कुलाधिपति, जीएलए विवि, मथुरा
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मुख्य अतिथि नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि शास्त्रों में उल्लेख है कि 100 हाथों से कमाओ और हजार हाथ से दान करो। सात करोड़ लोग नेत्र हीन हैं। इनमें से 80 फीसदी को भी उपचार मिला होता तो वे भी दुनिया देख पाते। इस नेत्र संस्थान से लाखों लोग लाभान्वित होंगे।
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संत गोविंदानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि किसी के जीवन में रोशनी भरने के समान कोई पुण्य नहीं होता। संत कौशल किशोर महाराज ने कहा कि शास्त्रों में परोपकार को सबसे बड़ा पुण्य कहा गया है। महेशानंद सरस्वती ने कहा कि संस्थान से किसी भी रूप में जुड़ा व्यक्ति पुण्य का भागी है।
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जीएलए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल, जमुना लाल बजाज फाउंडेशन के चेयरमैन शेखर बजाज, बीएचयू के पूर्व कुलाधिपति गिरीश त्रिपाठी ने भी नेत्र संस्थान से लाखों लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद जताई। फैमिली फाउंडेशन, यूएसए के रमेश गनात्रा, रमेश उमा गनात्रा ने कहा कि संस्थान के समर्पण भाव ने यहां आकर सहयोग करने के लिए विवश कर दिया।
एसएसपी/डीआईजी शैलेश कुमार पांडेय ने कहा कि प्रकृति का आनंद बगैर नेत्रों के नहीं लिया जा सकता है। संचालन सचिव सुनील कुमार शर्मा ने किया। संस्थाध्यक्ष बाबा बलराम दास, विधायक ठा. मेघश्याम सिंह, ओम प्रकाश धानुका, नयन दलाल यूएसए, अदिश जैन यूएसए, उमाकांत अग्रवाल, धनेश मित्तल, कल्याण दास अग्रवाल, दीनानाथ अग्रवाल, बीड़ी अग्रवाल, राधेश्याम सिंघल आदि मौजूद रहे।
हम सब जानते हैं कि आंखें केवल देखने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह हमारे सपनों, आशाओं, और भविष्य की खिड़की हैं। जब कोई व्यक्ति अपनी दृष्टि खोता है, तो वह केवल रोशनी ही नहीं खोता, बल्कि अपने सपनों को भी धुंधला होते देखता है। इस संस्थान के माध्यम से हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि लाखों लोगों के जीवन में फिर से रोशनी लौट सके। -मुरली कृष्ण मूर्ति, चेयरमैन, शंकरा आई फाउंडेशन यूएसए
कल्याणं करोति नेत्र संस्थान न केवल आधुनिक चिकित्सा तकनीकों का केंद्र होगा, बल्कि यह सेवा, करुणा और मानवता का प्रतीक बनेगा। यहां आने वाले हर मरीज को न केवल चिकित्सा मिलेगी, बल्कि उसे यह विश्वास भी मिलेगा कि वह अकेला नहीं है। संस्थान उन गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए वरदान साबित होगा, जिनके पास इलाज के साधन नहीं हैं। - नारायणदास अग्रवाल, कुलाधिपति, जीएलए विवि, मथुरा