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कलियों की पोशाक से ठाकुरजी का शृंगार
अमर उजाला वृंदावन
Updated Fri, 20 May 2016 11:56 PM IST
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फूल-कलियाें की पोशाक
- फोटो : अमर उजाला वृंदावन
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ब्रज की भक्ति भी निराली है यहां भगवान भक्तों की भावनाओं के वशीभूत होते हैं। इसी भाव के अनुरूप भक्त अपने आराध्य की सेवा में संलग्न रहते हैं और उसी आत्मीय भाव से ठाकुरजी के श्रीविग्रहों की विधिपूर्वक सेवापूजा हो रही है। भाव सेवा के तहत ही आराध्य को भीषण गर्मी से बचाने के प्रयास शुरू हो गए हैं। कोई अपने आराध्य को कूलर, एसी में सुला रहा है तो कोई उन्हें फूल-कलियों से बने परिधान पहना रहा है।
गर्मियों के मौसम में धर्मनगरी वृंदावन के ठाकुर बांकेबिहारी, ठाकुर राधावल्लभ मंदिर, राधारमण मंदिर, राधादामोदर, राधाश्यामसुंदर, राधाजीवनवल्लभ, राधा गोविंददेव और इस्कान मंदिर सहित अन्य मंदिरों में ठाकुरजी के श्री विग्रह नित्य कलियों से जड़ित पोशाक धारण कर रहे हैं।
मंदिरों में भक्त अपने आराध्य के लिए फूल जड़ित शृंगार में मुकुट, कुंडल, जामा, कर्णफूल, पटुका, चोटी, हार, बाजूबंद, लहंगा, चंद्रिका, कौंदनी, कमरबंद इत्यादि बना रहे हैं। राधावल्लभ मंदिर में कलियों की पोशाक तैयार करने वाली ज्योति, तुलसी, गायत्री, राखी ने बताया वह हर सुबह ठाकुरजी के पोशाक और शृंगार तैयार करने के लिए मंदिर आतीं हैं और शाम तक कलियों की पोशाक तैयार कर मंदिर के सेवायतों को दे देतीं। इसके बाद इन पोशाकों को ठाकुरजी को धारण कराया जाता है। इन पोशाकों को मंदिर के पट बंद होने के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित कर दिया जाता है।
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आजीविका का भी है साधन
वृंदावन के मंदिरों में ठाकुरजी को कलियों के शृृंगार बनाने का यह क्रम अक्षय तृतीया से जगन्नाथ रथयात्रा तक जारी रहता है। इस दौरान नगर के मंदिरों में प्रतिदिन दर्जनों युवतियां, महिलाएं और वृद्धाएं कलियों के शृृंगार के कार्य में लग जातीं हैं। इस कार्य में उन्हें 200 से लेकर 350 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मिल जाते हैं।
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गर्मियों के मौसम में धर्मनगरी वृंदावन के ठाकुर बांकेबिहारी, ठाकुर राधावल्लभ मंदिर, राधारमण मंदिर, राधादामोदर, राधाश्यामसुंदर, राधाजीवनवल्लभ, राधा गोविंददेव और इस्कान मंदिर सहित अन्य मंदिरों में ठाकुरजी के श्री विग्रह नित्य कलियों से जड़ित पोशाक धारण कर रहे हैं।
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मंदिरों में भक्त अपने आराध्य के लिए फूल जड़ित शृंगार में मुकुट, कुंडल, जामा, कर्णफूल, पटुका, चोटी, हार, बाजूबंद, लहंगा, चंद्रिका, कौंदनी, कमरबंद इत्यादि बना रहे हैं। राधावल्लभ मंदिर में कलियों की पोशाक तैयार करने वाली ज्योति, तुलसी, गायत्री, राखी ने बताया वह हर सुबह ठाकुरजी के पोशाक और शृंगार तैयार करने के लिए मंदिर आतीं हैं और शाम तक कलियों की पोशाक तैयार कर मंदिर के सेवायतों को दे देतीं। इसके बाद इन पोशाकों को ठाकुरजी को धारण कराया जाता है। इन पोशाकों को मंदिर के पट बंद होने के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित कर दिया जाता है।
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आजीविका का भी है साधन
वृंदावन के मंदिरों में ठाकुरजी को कलियों के शृृंगार बनाने का यह क्रम अक्षय तृतीया से जगन्नाथ रथयात्रा तक जारी रहता है। इस दौरान नगर के मंदिरों में प्रतिदिन दर्जनों युवतियां, महिलाएं और वृद्धाएं कलियों के शृृंगार के कार्य में लग जातीं हैं। इस कार्य में उन्हें 200 से लेकर 350 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मिल जाते हैं।