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Mathura News: स्वर्ण-रजत हिंडोले में श्रीबांकेबिहारीलालजी के दर्शन कर श्रद्धालुओं के नेत्र हुए सजल
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वृंदावन। ठाकुर श्रीबांकेबिहारी लाल हरे रंग की पोशाक और रत्नजड़ित आभूषणों को पहनकर जब स्वर्ण-रजत हिंडोले पर विराजे तो उनके दर्शन के लिए उमड़े भक्तों की आंखें श्रद्धा से सजल हाे उठीं। आराध्य के दर्शन की चाहत में कुछ लोगों ने पूरी रात सड़क पर गुजार दी। सुबह ठाकुरजी की झलक पाने के लिए हजारों श्रद्धालु भीड़ के बीच फंसे खड़े रहे। इस दौरान हर ओर राधे-राधे गूंज उठा।
सेवायतों ने सुबह 7:30 बजे मंदिर में स्वर्ण-रजत हिंडोले के सामने से जैसे ही हरे रंग का पर्दा हटा हटाया ठाकुरजी के दिव्य स्वरूप ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। हजारों श्रद्धालुओं की निगाहें एकटक आराध्य पर टिक गईं। सेवायत नितिन सावंरिया ने कहा कि हरियाली तीज पर जब बिहारीजी हिंडोले पर झूलते हैं तो मन में उन्हें धीरे-धीरे झुलाने का भाव आता है। इस दौरान कोई उनकी नजर उतारता है और कोई उनसे कहता है लाला ऐसे ही मुस्कुराते रहना।
दूर-दूर से आए श्रद्धालु
बिहारीजी के हिंडोला दर्शन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु वृंदावन पहुंचे। किसी ने घंटों यात्रा की, किसी ने लंबी कतार में प्रतीक्षा की। जैसे ही बिहारीजी की झलक मिली लोगों की सारी थकान मिट गई। मध्य प्रदेश के गुना से आई रितिका का कहना था कि ठाकुरजी के दर्शन के बाद उनके मन में आराध्य की छवि बसकर रह गई है।
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80वीं बार हिंडोले पर विराजे ठाकुरजी
ठाकुर बांकेबिहारीजी स्वर्ण-रजत हिंडोले पर 80वीं बार विराजमान हुए। करीब 79 वर्ष पुराने इस हिंडोले का निर्माण वर्ष 1942 से 1947 के बीच बनारस के कारीगरों ने पांच वर्षों में किया था। करीब पांच टन वजनी हिंडोले में सोने-चांदी की बारीक नक्काशी, नाचते मयूर, घुमावदार सीढ़ियां और सखियों की आकृतियां बनी हैं।
प्रियाजी संग खेली शतरंज
हिंडोला दर्शन के बाद ठाकुरजी के विश्राम के लिए सुखसेज सजाई गई। उनकी सेज के पास में रजत आईना, शृंगार सामग्री से सुसज्जित सुहाग पिटारी और प्रियाजी-प्रियतम के मनोरंजन के लिए चांदी की शतरंज रखी गई।
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सेवायतों ने सुबह 7:30 बजे मंदिर में स्वर्ण-रजत हिंडोले के सामने से जैसे ही हरे रंग का पर्दा हटा हटाया ठाकुरजी के दिव्य स्वरूप ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। हजारों श्रद्धालुओं की निगाहें एकटक आराध्य पर टिक गईं। सेवायत नितिन सावंरिया ने कहा कि हरियाली तीज पर जब बिहारीजी हिंडोले पर झूलते हैं तो मन में उन्हें धीरे-धीरे झुलाने का भाव आता है। इस दौरान कोई उनकी नजर उतारता है और कोई उनसे कहता है लाला ऐसे ही मुस्कुराते रहना।
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दूर-दूर से आए श्रद्धालु
बिहारीजी के हिंडोला दर्शन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु वृंदावन पहुंचे। किसी ने घंटों यात्रा की, किसी ने लंबी कतार में प्रतीक्षा की। जैसे ही बिहारीजी की झलक मिली लोगों की सारी थकान मिट गई। मध्य प्रदेश के गुना से आई रितिका का कहना था कि ठाकुरजी के दर्शन के बाद उनके मन में आराध्य की छवि बसकर रह गई है।
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80वीं बार हिंडोले पर विराजे ठाकुरजी
ठाकुर बांकेबिहारीजी स्वर्ण-रजत हिंडोले पर 80वीं बार विराजमान हुए। करीब 79 वर्ष पुराने इस हिंडोले का निर्माण वर्ष 1942 से 1947 के बीच बनारस के कारीगरों ने पांच वर्षों में किया था। करीब पांच टन वजनी हिंडोले में सोने-चांदी की बारीक नक्काशी, नाचते मयूर, घुमावदार सीढ़ियां और सखियों की आकृतियां बनी हैं।
प्रियाजी संग खेली शतरंज
हिंडोला दर्शन के बाद ठाकुरजी के विश्राम के लिए सुखसेज सजाई गई। उनकी सेज के पास में रजत आईना, शृंगार सामग्री से सुसज्जित सुहाग पिटारी और प्रियाजी-प्रियतम के मनोरंजन के लिए चांदी की शतरंज रखी गई।