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Mathura: सुविधाएं देकर आपकी सांसों को छीन रहा है विकास, पर्यावरणविद अनिल जोशी ने जताई चिंता
Mon, 31 Oct 2022 03:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 31 Oct 2022 03:45 PM IST
सार
पर्यावरणविद ने कहा कि देश का विकास आवश्यक है, तभी देशवासियों को सुविधाएं मिल सकती हैं, लेकिन ऐसा विकास जो आपको सुविधाएं देकर सांसें रोक दे, यह एक बड़ा मुद्दा है।
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पर्यावरणविद डॉ. अनिल जोशी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
‘प्रगति से प्रकृति पथ तक’ यात्रा अपने नए पड़ाव मथुरा स्थित जीएलए विश्वविद्यालय पहुंच गई। रविवार की सुबह आगरा के हिंदुस्तान कॉलेज से पर्यावरणविद पद्मश्री डॉ. अनिल जोशी के नेतृत्व में यात्रा का जीएलए विवि में पहुंचने पर स्वागत किया गया।
डॉ. अनिल जोशी ने कहा कि समुद्र, धरती और आसमान प्रदूषित हो चुके हैं। समुद्र में लाखों टन कचरा एकत्रित हो गया है। इसका सीधा असर जीवों पर पड़ रहा है। समुद्र की कार्बन सोंखने की क्षमता पर भी प्रभाव पड़ रहा है। स्पेस में तीन हजार सैटेलाइट बिना उपयोग के घूम रहे हैं।
वहां करीब 35 हजार छोटे -छोटे हैं, जो आने वाले समय के लिए खतरा है। बात धरती की करें तो यहां कंक्रीट के जंगल तैयार हो रहे हैं, जिसका सीधा प्रभाव हमारे पर्यावरण पर पड़ रहा है। हम विकास की अंधी दौड़ में विनाश की तरफ बढ़ रहे हैं।
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डॉ. अनिल जोशी ने कहा कि समुद्र, धरती और आसमान प्रदूषित हो चुके हैं। समुद्र में लाखों टन कचरा एकत्रित हो गया है। इसका सीधा असर जीवों पर पड़ रहा है। समुद्र की कार्बन सोंखने की क्षमता पर भी प्रभाव पड़ रहा है। स्पेस में तीन हजार सैटेलाइट बिना उपयोग के घूम रहे हैं।
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वहां करीब 35 हजार छोटे -छोटे हैं, जो आने वाले समय के लिए खतरा है। बात धरती की करें तो यहां कंक्रीट के जंगल तैयार हो रहे हैं, जिसका सीधा प्रभाव हमारे पर्यावरण पर पड़ रहा है। हम विकास की अंधी दौड़ में विनाश की तरफ बढ़ रहे हैं।
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विकास तभी अच्छा, जिससे पर्यावरण स्वच्छ हो
पर्यावरणविद ने कहा कि देश का विकास आवश्यक है, तभी देशवासियों को सुविधाएं मिल सकती हैं, लेकिन ऐसा विकास जो आपको सुविधाएं देकर सांसें रोक दे, यह एक बड़ा मुद्दा है। विकास तभी अच्छा है जब देश का पर्यावरण स्वच्छ हो। विकसित देश प्रकृति के संसाधनों का दोहन कर रहे हैं, हमें प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को रोकने पर बल देना चाहिए तभी हम बेहतर विकास की ओर अग्रसर हो सकते हैं।उन्होंने कहा कि दुनिया भर में वायु प्रदूषण बहुत तेजी से पैर पसार रहा है। भारत के दिल्ली सहित तीस से अधिक शहर इसकी चपेट में हैं। यह बड़ी बीमारियों का कारण बन गया है। जितना हम प्रकृति से ले रहे हैं, उसका 50 फीसदी भी उसे वापस नहीं कर पा रहे हैं। प्रकृति का रौद्र रूप हमें बार-बार देखने को मिलता है। इसके कारण देशभर में विभिन्न प्रकार की महामारी फैल रही हैं। जिस तरह से प्रकृति इंसानों की देखभाल करती है, हमारा भी फर्ज बनता है कि वो प्रकृति का ध्यान रखें।