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विराट की कविताओं में परंपरा-आधुनिकता का प्रवाह
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 04 Feb 2016 11:18 PM IST
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हिंदी और ब्रजभाषा के कवि साहित्यकार डा. विष्णु विराट स्मृति समारोह के प्रथम चरण में आयोजित गोष्ठी में उनका स्मरण किया गया। साहित्यकारों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ वल्लभकुल संप्रदाय के पीठाधीश्वर गोस्वामी द्वारकेश लाल महाराज, विक्रम विवि उज्जैन के पूर्व आचार्य डा. हरिमोहन बुधौलिया, राजा बाबा, विराट की पत्नी डा. ब्रजबाला चतुर्वेदी आदि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
शुभारंभ में डा. विष्णु विराट की लोकप्रिय कविताओं की रिकार्डिंग सुनाई गई। संयोजक मोहन स्वरूप भाटिया ने कहा जीवन का अंतिम सत्य मृत्यु है लेकिन कुछ लोग जीवित रहते हुए मृतक के समान रहते हैं और कुछ लोग प्रतिभा और समाज के प्रति योगदान देकर अमर हो जाते हैं।
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दिल्ली से आए रामकुमार कृषक ने उनकी कविता में परंपरा और आधुनिकता का प्रभाव बताया। उज्जैन के भैरूलाल मालवीय ने कहा उनके काव्यों में प्राचीन और नवीन छंदों का निर्वाह देखने को मिला। डा. वेदप्रकाश अमिताभ, डा. नरेंद्र सिंह फौजदार, डा. केडी झा, डा. नटवर नागर ने भी अपने विचार रखे।
इस अवसर पर डा. अनिल चतुर्वेदी, डा. राजेंद्र कृष्ण अग्रवाल, उपेंद्र त्रिपाठी, जितेंद्र विमल, शिवदत्त चतुर्वेदी, विठठलेश चतुर्वेदी, चरण सिंह जादौन, सुभाष चंद्र गुप्ता, डा. एसपी गोस्वामी आदि उपस्थित रहे। संचालन महेंद्र नेह ने किया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ वल्लभकुल संप्रदाय के पीठाधीश्वर गोस्वामी द्वारकेश लाल महाराज, विक्रम विवि उज्जैन के पूर्व आचार्य डा. हरिमोहन बुधौलिया, राजा बाबा, विराट की पत्नी डा. ब्रजबाला चतुर्वेदी आदि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
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शुभारंभ में डा. विष्णु विराट की लोकप्रिय कविताओं की रिकार्डिंग सुनाई गई। संयोजक मोहन स्वरूप भाटिया ने कहा जीवन का अंतिम सत्य मृत्यु है लेकिन कुछ लोग जीवित रहते हुए मृतक के समान रहते हैं और कुछ लोग प्रतिभा और समाज के प्रति योगदान देकर अमर हो जाते हैं।
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दिल्ली से आए रामकुमार कृषक ने उनकी कविता में परंपरा और आधुनिकता का प्रभाव बताया। उज्जैन के भैरूलाल मालवीय ने कहा उनके काव्यों में प्राचीन और नवीन छंदों का निर्वाह देखने को मिला। डा. वेदप्रकाश अमिताभ, डा. नरेंद्र सिंह फौजदार, डा. केडी झा, डा. नटवर नागर ने भी अपने विचार रखे।
इस अवसर पर डा. अनिल चतुर्वेदी, डा. राजेंद्र कृष्ण अग्रवाल, उपेंद्र त्रिपाठी, जितेंद्र विमल, शिवदत्त चतुर्वेदी, विठठलेश चतुर्वेदी, चरण सिंह जादौन, सुभाष चंद्र गुप्ता, डा. एसपी गोस्वामी आदि उपस्थित रहे। संचालन महेंद्र नेह ने किया।