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जेल में फांसी के फंदे पर झूलती मिली सजायाफ्ता की लाश
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 19 Sep 2016 12:07 AM IST
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डीआईजी ने किया जेल का निरीक्षण
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जिला कारागार में उम्रकैद की सजा काट रहे एक कैदी की लाश रविवार की शाम को करीब साढ़े चार बजे अस्पताल में पानी की टंकी के पाइप पर झूलती मिली। बंदियों ने शोर मचाया तो जेल अफसर दौड़े और शव को नीचे उतारा। जेल प्रशासन का कहना है कि उसने फांसी लगाकर जान दी है जबकि परिवार वाले जेल प्रशासन पर हत्या का आरोप लगा रहे हैं।
वृंदावन के मुहल्ला दुसायत निवासी सुखराम के बेटे ब्रजनंदन (55) और महावीर (65) हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। पुलिस ने 17 मई, 1987 को वृंदावन में हुई तेज सिंह की हत्या के मामले में इन दोनों के साथ एक तीसरे भाई शंकर सिंह को गिरफ्तार करके जेल भेजा था।
जिला जज के यहां से जमानत खारिज होने के बाद हाईकोर्ट में अपील दायर की गई। हाईकोर्ट से पांच महीने बाद जमानत मिल गई थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान 21 दिसंबर, 2015 को दोनों की जमानत खारिज करते हुए आजीवन कारावास की सजा सुना दी।
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सजायाफ्ता होने के साथ ही पुलिस ने महावीर कोे गिरफ्तार करके जेल भेज दिया जबकि ब्रजनंदन ने सरेंडर कर दिया था। तीसरे भाई शंकर सिंह की मौत जमानत अवधि के दौरान हो गई थी। परिवार वालों ने दोनों की जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। 14 सितंबर को अदालत ने सुनवाई करते हुए दोनों को जमानत देने से इंकार कर दिया। 16 सितंबर को परिवार वालों ने ब्रजनंदन से जेल में मुलाकात की। बताया कि जमानत खारिज हो गई है।
रविवार की शाम को जेल में उस वक्त हल्ला मचा जब अस्पताल में बनी पानी की टंकी के पाइप से बांधे गए फंदे से ब्रजनंदन झूलता मिला। शोरशराबा मचने पर अफसर मौके पर पहुंचे और उसके शव को नीचे उतारा। सूचना पाकर डीआईजी जेल शरद कुलश्रेष्ठ भी पहुंचे।
जेल अधीक्षक पीडी सलोनिया ने बताया कि ब्रजनंदन ने गमछे से फांसी लगाकर जान दी है। वह जमानत न मिलने से टेंशन में था। वहीं ब्रजनंदन के बेटे एडवोकेट कुलदीप सिंह का आरोप है कि उसके पिता की जेल में हत्या की गई है। जब वह लोग उनसे मिलने गए थे तब सब सामान्य था।
सुबह से ही उदास था ब्रजनंदन
ब्रजनंदन सुबह से ही उदास था। जेल अफसरों का कहना है कि जिस बैरक में वह रह रहा था वहां के बंदियों ने बताया कि किसी से बात नहीं कर रहा था। दो दिन पहले तक जरूर कह रहा था कि उसकी जमानत हो जाएगी और वह अपने घर को चला जाएगा। जेल में अपने सभी साथियों से उसने इस बात का जिक्र किया था।
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वृंदावन के मुहल्ला दुसायत निवासी सुखराम के बेटे ब्रजनंदन (55) और महावीर (65) हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। पुलिस ने 17 मई, 1987 को वृंदावन में हुई तेज सिंह की हत्या के मामले में इन दोनों के साथ एक तीसरे भाई शंकर सिंह को गिरफ्तार करके जेल भेजा था।
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जिला जज के यहां से जमानत खारिज होने के बाद हाईकोर्ट में अपील दायर की गई। हाईकोर्ट से पांच महीने बाद जमानत मिल गई थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान 21 दिसंबर, 2015 को दोनों की जमानत खारिज करते हुए आजीवन कारावास की सजा सुना दी।
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सजायाफ्ता होने के साथ ही पुलिस ने महावीर कोे गिरफ्तार करके जेल भेज दिया जबकि ब्रजनंदन ने सरेंडर कर दिया था। तीसरे भाई शंकर सिंह की मौत जमानत अवधि के दौरान हो गई थी। परिवार वालों ने दोनों की जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। 14 सितंबर को अदालत ने सुनवाई करते हुए दोनों को जमानत देने से इंकार कर दिया। 16 सितंबर को परिवार वालों ने ब्रजनंदन से जेल में मुलाकात की। बताया कि जमानत खारिज हो गई है।
रविवार की शाम को जेल में उस वक्त हल्ला मचा जब अस्पताल में बनी पानी की टंकी के पाइप से बांधे गए फंदे से ब्रजनंदन झूलता मिला। शोरशराबा मचने पर अफसर मौके पर पहुंचे और उसके शव को नीचे उतारा। सूचना पाकर डीआईजी जेल शरद कुलश्रेष्ठ भी पहुंचे।
जेल अधीक्षक पीडी सलोनिया ने बताया कि ब्रजनंदन ने गमछे से फांसी लगाकर जान दी है। वह जमानत न मिलने से टेंशन में था। वहीं ब्रजनंदन के बेटे एडवोकेट कुलदीप सिंह का आरोप है कि उसके पिता की जेल में हत्या की गई है। जब वह लोग उनसे मिलने गए थे तब सब सामान्य था।
सुबह से ही उदास था ब्रजनंदन
ब्रजनंदन सुबह से ही उदास था। जेल अफसरों का कहना है कि जिस बैरक में वह रह रहा था वहां के बंदियों ने बताया कि किसी से बात नहीं कर रहा था। दो दिन पहले तक जरूर कह रहा था कि उसकी जमानत हो जाएगी और वह अपने घर को चला जाएगा। जेल में अपने सभी साथियों से उसने इस बात का जिक्र किया था।